gram savraj

  • Aug 18 2018 9:52AM

जगेश्वर के जुनून से लहलहाता बगियारी

जगेश्वर के जुनून से लहलहाता बगियारी

 प्रखंड : कसमार

जिला : बोकारो

कसमार के बगियारी निवासी जगेश्वर गोसाईं को पेड़-पौधों से खास लगाव है. इसके संरक्षण व संवर्द्धन के प्रति इनकी दीवानगी देखते ही बनती है. कैसे अधिक से अधिक पौधे लगाये जाएं और उसकी सुरक्षा कर हरियाली लायी जाये, इसी प्रयास में वे लगे रहते हैं. यूं कहें कि अपना पूरा दिन पेड़-पौधों की हिफाजत में गुजार देते हैं. जगेश्वर न तो वन विभाग के कर्मचारी हैं और न ही किसी एनजीओ से जुड़े हैं. बावजूद इसके हरियाली लाने का जुनून सबको प्रेरित करता है.

घूम-घूम कर संस्थानों में किया पौधरोपण
जगेश्वर गोसाईं बरसात जैसे खास मौसम में निजी खर्च और संसाधन से घूम-घूम कर पौधे लगाते हैं. अब तक मध्य विद्यालय जामकुदर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय बगदा, स्वास्थ्य उपकेंद्र खैराचातर, पंचायत सचिवालय टांगटोना, उत्क्रमित मध्य विद्यालय बगियारी, आरआरपीएस खैराचातर जैसी दर्जनों जगहों पर खुद जाकर पौधे लगा चुके हैं. बताते हैं कि पौधे लगा कर उन्हें काफी संतुष्टि मिलती है. उनकी सोच है कि स्कूल, कॉलेज, हॉस्पीटल, पंचायत सचिवालय, सड़क के किनारे हर जगह हरियाली हो. इसी सोच के तहत अपनी स्कूटी पर पौधे लेकर निकल पड़ते हैं और पहुंच जाते हैं पौधरोपण करने. लगाये गये जगहों पर पौधों का हाल जानने भी बार-बार जाते हैं.

सड़क के दोनों किनारे हरियाली से बदली तस्वीर
करीब पांच साल पहले रांगामाटी-खैराचातर मुख्य पथ पर रांगामाटी से बगदा के बीच वन विभाग, सामाजिक वानिकी ने सड़क किनारे पौधरोपण शुरू किया, तो हर किसी को यही अंदाजा था कि पथ तट रोपन की अन्य योजनाएं भी सफल नहीं होगी. शायद सफल नहीं भी होतीं, अगर जगेश्वर गोसाईं नहीं होते. जगेश्वर को इस योजना के तहत महज एक वाचर के रूप में नियुक्त किया गया था, लेकिन उन्होंने अन्य वाचरों की तरह खानापूर्ति नहीं की. इन पौधों की देखभाल में जगेश्वर ने खुद को पूरी तरह से समर्पित कर दिया. हर पल इन पौधों की रखवाली में मुस्तैद रहे. पौधों में पानी और खाद डालने से लेकर खर-पतवार की सफाई खुद करते रहे. लगभग चार साल तक जगेश्वर ने जो मेहनत की उसका परिणाम अब दिखने लगा है. सारे के सारे पौधे खिल उठे हैं. खास बात तो यह है कि इस योजना के तहत लगभग 2500 पौधे लगाये गये हैं और इनमें से संभवत: एक भी पौधा को जगेश्वर ने मरने नहीं दिया. जगेश्वर आज भी इन पौधों की देखभाल के प्रति समर्पित हैं. बगदा से रांगामाटी तक वह हमेशा भ्रमण करके पौधों की रखवाली करते रहते हैं. इन पेड़-पौधों के कारण इस सड़क की दोनों ओर हरियाली से तस्वीर बदल गयी है