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  • May 20 2019 4:51PM

गांवों की मिट्टी की सेहत का हाल बतायेगा डिजिटल नक्शा

गांवों की मिट्टी की सेहत का हाल बतायेगा डिजिटल नक्शा

मिथलेश झा 

अब गांव की मिट्टी की सेहत का हाल एक डिजिटल नक्शा से पता चल जायेगा. यह डिजिटल नक्शा हर गांव में बहुत जल्द लगने वाला है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर जोर-शोर से काम चल रहा है. खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता और उसकी उत्पादकता के बारे में नक्शे में पूरी जानकारी रहेगी. खाता और खेसरा संख्या के साथ. कृषि कल्याण अभियान किसानों की आय दोगुनी करने की केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है. गांव के खेत की मिट्टी की गुणवत्ता के आधार पर डिजिटल नक्शा तैयार करना और उसे हर गांव में लगाना इसी योजना का एक अहम हिस्सा है. योजना के मुताबिक, नक्शे में जो विस्तृत विवरण होंगे, उसमें मिट्टी की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता, कटाव की मॉडलिंग (सॉयल इरोजन मॉडलिंग), कौन-सा फसल लगायें, हाइड्रोलॉजी, ग्लोबल चेंज और उसकी निगरानी, मृदा और जल संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र का मॉडल (इकोलॉजी मॉडल), लैंड यूज, वाटरशेड मैनेजमेंट और पर्यावरण की गुणवत्ता शामिल हैं.

झारखंड के 300 गांव शामिल
कृषि कल्याण अभियान के तहत अब तक झारखंड, बिहार समेत देश के 117 जिलों के 5,725 गांवों के आंकड़े जुटाये जा चुके हैं. इसमें झारखंड के छह जिले के 300 गांव शामिल हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल के पांच जिलों के 25-25 गांवों को भी इसमें शामिल किया गया है. मृदा सर्वेक्षण पदाधिकारी दिनेश पटेल ने बताया कि पहले चरण में 112 जिलों के 25-25 गांवों को शामिल किया गया था. दूसरे चरण में पांच और जिलों को शामिल कर लिया गया. इस तरह 112 जिलों के 50-50 गांव इसमें शामिल हो गये. दूसरी तरफ, नये पांच जिलों के 25-25 गांव इसमें जुड़ गये. इस तरह कुल गांवों की संख्या 5,725 हो गयी.

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डिजिटल नक्शा बनाने में जुटीं संस्था
कृषि कल्याण अभियान के तहत झारखंड के 18 जिलों को शामिल किया गया था. इसमें छह जिले (रांची, गिरिडीह, दुमका, बोकारो, चतरा और गढ़वा) में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई. हर जिले के 50-50 गांवों को इसमें शामिल किया गया है. मृदा सर्वेक्षण पदाधिकारी दिनेश पटेल के मुताबिक, रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर, इसरो की संस्था स्पेश एप्लिकेशन सेंटर (अहमदाबाद), स्टेट सेंटर फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी और सॉयल एंड लैंड यूज सर्वे ऑफ इंडिया संयुक्त रूप से इसका नक्शा बनाने की दिशा में काम कर रहा है. श्री पटेल ने बताया कि राज्य सरकार से उपलब्ध कराये गये आंकड़ों के आधार पर ये संस्थाएं डिजिटल नक्शा बनाने में जुटी हैं.

खेतों की मिट्टी की जांच 12 पैरामीटर पर
राज्य के 300 गांवों के खेतों की मिट्टी की 12 पैरामीटर पर जांच की जा रही है. जल संसाधन के बारे में भी विस्तृत जानकारी जुटायी जा रही है. पूरी जानकारी एकत्र करने के बाद इसकी मैपिंग हो रही है. उसी के आधार पर डिजिटल नक्शा तैयार होगा और उसे संबंधित गांवों में लगाया जायेगा. मिट्टी की जांच के बाद उसकी कमियों का उपचार किया जायेगा और उसकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.

हर 80 से 100 हेक्टेयर की प्रोफाइलिंग
योजना के मुताबिक, हर 80 से 100 हेक्टेयर भूमि की मिट्टी की कम से कम एक प्रोफाइल जरूर बनायी जायेगी. 200 से 500 मीटर की दूरी पर ऑगर बोर परीक्षण और उसकी सैंपलिंग की जायेगी. भूमि के नक्शा में मिट्टी की शृंखला, उसकी गहराई, सतह की मिट्टी की बनावट, स्लोप, मिट्टी का कटाव और सतह के बारे में जानकारी मसलन पत्थर, बजरी, कोयला का चार्ट भी शामिल होगा.

सर्वे में शामिल रांची जिला के गांव
दुमु (बेरो), खटंगा, सिरांगो, बनहौरा (कांके), सलसूद (सोनाहातू), उलीडीह, पालना, पेराडीह (तमाड़), भंडरिया (इटकी), रामपुर, ओबेरिया, सरवल (नामकुम), सुमु, ओझासारम, बारे, डंडिया (बुढ़मू), बांसजारी (मांडर), हुरहुरी (चान्हो), अरमालटदाग (लापुंग), कोंका (खलारी), नरकोपी (बेरो), गारू (रातु), अरचोरा (नगड़ी), सिंघपुर (सिल्ली), बानपुर, गेतलसूद, रंगामाटी, ओबेर, बड़कीगोरांग, सोसोनावागढ़, नावागढ़, बदरी, लेपसार, धुरलेता, सुरसू, पैलादा, जसपुर, बिसा, दोकाद, सीताडीह, हेसातु, अरवाबेड़ा, मुसागू, रेसनबेनादाग, कामता, सिंगारी, जाराडीह, साहेदा (सभी गांव अनगड़ा प्रखंड में), बिंजी और सरले (बुढ़मू प्रखंड)

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योजना में शामिल दुमका जिला के गांवों के नाम
टिटमो, लकराघाटी, सोनवाडांगल, कुलसुनघाटा, गंगवारा, दोमोहानी, भालसुमर, भालकी, चित्रगरिया, धावा, तारनी, बमनखेता, सोनाधाप, चोरकाटा, गुमरो, सिरियामरा, भटुरिया, जाटपहाड़ी, जोगिया, अमरपुर, कारुडीह, पलासी, पतजोड़, दिघी, कुमीरडाहा, सरैया, मोहिला, बाकीडीह, ककानिया, मनियारपुर, नावाडीह, कुरुडीह, जगतपुर, सराईपानी, महतोटोला, जियापानी, महुबोना, धानकुटो, नकटी, कुसुंबा, कदमा, गामरो, पालमा, सिरुडीहा, बांकडीह, धारिया, राजबाध, बागीहोपा, सुगापहाड़ी और सुल्तानटिकर.

गिरिडीह जिला के गांव, जिन्हें योजना में शामिल किया गया
मंदारडीह, जरुआडीह, अम्बाडीह, गुरितानर, करमाटुंगरी, बरियाबाद, कसियाटोला, पोखरिया, सुगासर, घाटकुल, गोपाई, पालमो, हरिला, तारानारी, सिंगदाहा, बराई, धनाईपुर, सिहोडीह, चुंगलो, नाईकडीह, गंगापुर, पावापुर, गिरिडीह, जामजोरी, फिटकुरिया, बेरहाबाद, धुराईता, धुरगारागी, बाराटांड़, नवडीह, गोलैया, अम्बाटाड़, सिजुआ, तिल्याबानो, नावाडीह, बांदी, पेरसोन, टुकटुको, गनहोनिया, लुकईया, यास्को, कुलगो, साधा, चेरवा, सरुआ, संख, बादीडीह, नगवां और कोनी.

जिलावार मिट्टी सैंपल जांच की स्थिति :

दो चरणों में मिट्टी सैंपल की जांच हुई. पहले व दूसरे चरण की जांच में गांवों की संख्या बराबर रही, जबकि मिट्टी सैंपल जांच की संख्या में परिवर्तन आया.

जिला गांवों की संख्या मिट्टी सैंपल की जांच मिट्टी सैंपल की जांच (पहला चरण) (दूसरा चरण)
बोकारो 25 608 588
चतरा 25 752 450
दुमका 25 492 585
गढ़वा 25 1357 338
गिरिडीह 25 358 429
रांची 25 888 644

गांवों में जल्द दिखेगा डिजिटल नक्शा : दिनेश पटेल
भारतीय मृदा एवं भू-उपयोग सर्वेक्षण की रांची शाखा के प्रमुख और मृदा सर्वेक्षण पदाधिकारी दिनेश पटेल ने बताया कि इस योजना में राज्य सरकारों की भी मदद ली जा रही है. राज्यों के राजस्व और कृषि विभाग की मदद से यह नक्शा तैयार हो रहा है. राजस्व विभाग नक्शा उपलब्ध करा रहा है, जबकि कृषि विभाग को खाता और खेसरा संख्या उपलब्ध कराना है. एक बार पूरी जानकारी मिल जाये, तो पूरे आंकड़े के साथ डिजिटल नक्शा तैयार कर उसे गांवों में टांग दिया जायेगा. इसके बाद कोई भी उस गांव की मिट्टी और जल संसाधन के बारे में पूरी जानकारी उस नक्शा से ले सकेगा. नक्शा वेबसाइट पर भी उपलब्ध होगा, जिसमें पूरा विवरण होगा.