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  • Mar 18 2019 1:23PM

एलोयवेरा विलेज के रूप में विकसित हो रहा देवरी गांव

एलोयवेरा विलेज के रूप में विकसित हो रहा देवरी गांव

पंचायतनामा डेस्क
प्रखंड: नगड़ी
जिला: रांची

सुंदर त्वचा और घने बाल के लिए लोग एलोयवेरा का इस्तेमाल करते हैं. इस कारण अब ग्रामीण भी इसके प्रति जागरूक हो गये हैं. एलोयवेरा में कई औषधीय गुण हैं, जिनका विभिन्न प्रकार की बीमारियों के उपचार में आयुर्वेदिक एवं यूनानी पद्धति में प्रयोग किया जाता है. पेट के कीड़े, पेट दर्द, चर्म रोग, जलने पर, नेत्र रोग, चेहरे की चमक बढ़ाने वाली स्किन क्रीम, शेम्पू, सौन्दर्य प्रसाधन तथा सामान्य शक्तिवर्धक टॉनिक के रूप में एलोयवेरा काफी उपयोगी है. औषधीय गुणों के कारण एलोयवेरा को बगीचों तथा घर के आसपास लगाया जाता है. पहले इस पौधे का उत्पादन व्यावसायिक रूप से नहीं किया जाता था. यह खेतों की मेढ़ में और नदी किनारे अपने आप ही उग जाता है, लेकिन अब इसकी बढ़ती मांग के कारण किसान व्यावसायिक रूप से इसकी खेती कर रहे हैं

एलोयवेरा विलेज के तौर पर किया जा रहा विकसित
राजधानी रांची के नगड़ी प्रखंड अंतर्गत देवरी गांव को एलोयवेरा विलेज के तौर पर विकसित किया जा रहा है. इसके तहत ग्रामीणों के बीच एलोयवेरा के पौधे का वितरण बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कांके के द्वारा किया गया. आइसीएआर जनजातीय उपयोजना के अधीन देवरी गांव को एलोयवेरा विजेल के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसके जरिये किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी. देवरी गांव के अधिकतर घरों में एलोयवेरा के पौधे लगे हुए हैं. इसके अलावा आवश्यक उपकरण ग्रीन हाउस की सुविधा भी दी गयी है.

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ग्रामीणों को हैं एलोयवेरा के इस्तेमाल की जानकारी
देवरी पंचायत की मुखिया मंजू कच्छप ने बताया की दिसंबर के महीने में ग्रामीणों को एलोयवेरा के पौधे दिये गये थे. ग्रामीण एलोयवेरा के इस्तेमाल के प्रति जागरूक हैं. चेहरे और बाल में लगाने के लिए एलोयवेरा के पत्ते को काटकर महिलाएं घर ले जाती थीं. इसके अलावा नगड़ी स्थित जलछाजन विभाग के कार्यालय में जाकर भी एलोयवेरा के पौधे 25 रुपये प्रति पौधे की दर से खरीद सकते हैं.

बनेगा मॉडल एलोयवेरा विलेज
बीएयू के वनोत्पाद एवं उपयोगिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ कौशल कुमार कहते हैं कि देवरी को मॉडल एलोयवेरा विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित किया गया. उन्हें एलोयवेरा के पौधे दिये गये. ग्रीन हाउस दिया गया. स्थानीय मुखिया के सहयोग से बीएयू द्वारा इसे विकसित किया जा रहा है.