gram savraj

  • Jul 17 2018 10:53AM

बासुकी अगरबत्ती से बदल रही बदिया गांव की तसवीर

बासुकी अगरबत्ती से बदल रही बदिया गांव की तसवीर

आदित्यनाथ पत्रलेख

प्रखंड : चमराबहियार
प्रखंड : जरमुंडी
जिला : दुमका

बासुकी अगरबत्ती निर्माण कार्य से जरमुंडी के बदिया गांव की महिलाएं न सिर्फ अपना, बल्कि चमराबहियार पंचायत की तस्वीर बदल रही हैं. इस पंचायत के सभी गांवों की महिलाओं को अगरबत्ती निर्माण से जोड़ने की मुहिम चलायी जा रही है. जेएसएलपीएस द्वारा सखी मंडल स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आधुनिक मशीनों से लैस करके बदिया गांव में अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन ने बदिया गांव को गोद भी ले लिया है. ग्रामीण महिलाओं को बासुकी ब्रांड अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण इलाहाबाद बैंक के सहयोग से दिया जा रहा है. समूह की दर्जनों महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है. महिलाएं आधुनिक मशीन से अगरबत्ती बना रही हैं. श्रावणी मेले में जिला प्रशासन की ओर से बासुकी अगरबती का बाजारीकरण किया जायेगा. इसके लिए श्रावणी मेले में बासुकीनाथ एवं देवघर में बासुकी अगरबत्ती का स्टॉल भी लगाया जायेगा. ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है.

शराब छोड़ अगरबत्ती निर्माण में जुटी ग्रामीण महिलाएं
इस पंचायत की महिलाएं, जो कभी दारू-हड़िया बेचकर परिवार का गुजारा करती थीं. अब अपनी मेहनत से बनायी बासुकी अगरबत्ती से दूसरों के घरों को सुगंधित कर रही हैं. इस व्यवसाय से जुड़ने मात्र से ही उनके जीवन में बदलाव दिखने लगा है. अब इस गांव की महिलाओं ने दारू-हड़िया न बेचने का संकल्प लिया है. जिला प्रशासन की देखरेख और आजीविका मिशन के इस प्रयास से इस गांव की महिलाओं के हाथों की बनी अगरबत्ती पूरे क्षेत्र में सुगंध फैला रही है.

मंदिर के बेलपत्र एवं फूलों से हो रहा है अगरबत्ती निर्माण
बासुकीनाथ मंदिर में भगवान पर चढ़ाये गये फूल एवं बेलपत्र से ही बासुकी अगरबत्ती का निर्माण किया जा रहा है. अगरबत्ती के लिए व्यापक मात्रा में फूल और बेलपत्र भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है. कुल 33 मशीनों के द्वारा महिलाएं बासुकीनाथ में अर्पित बेलपत्र व पुष्प का पेस्ट बनाकर उससे अगरबत्ती का निर्माण कर रही हैं. ऑटोमेटिक मशीन की मदद से एक घंटे में चार किलोग्राम अगरबत्ती बनायी जा रही है. बासुकी अगरबत्ती 10 अलग- अलग रंगों में बनायी जा रही है. अगरबत्ती के निर्माण से इस गांव की महिलाओं को एक अलग पहचान मिल रही है. इस कारण जिला प्रशासन ने इन्हें ब्लू आर्मी नाम दिया है.

महिलाओं को सशक्त बनाने की पहल
महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें दक्ष बना कर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन की यह पहल सराहनीय है. ये महिलाएं अब रोल-मॉडल बनती जा रही हैं. बासुकी अगरबत्ती महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर बना रही है.

अगरबत्ती बनाने के तरीके
प्रशिक्षक अंजुला बताती हैं कि लकड़ी के कोयले से चारकोल बनता है. लकड़ी के बुरादे से पाउडर और देवदार की छाल से जैकेट बनाया जाता है, जिससे लट्ठापन आता है और इससे अगरबत्ती चिपकती है. अगरबत्ती बनाकर महिलाएं काफी खुश हैं.

अभियान से लोगों में आयी जागरूकता
जरमुंडी प्रखंड अंतर्गत चमराबहियार पंचायत के गांव बदिया, बभनडीहा, बारा, चमराबहियार, जरका, कन्हैयापुर, खिजुरिया, खिलकिनारी, नवाडीह, पलसिया एवं ठाढ़ी गांव के महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अगरबत्ती बनाने के व्यवसाय से जोड़ने का कार्यक्रम है. इसके लिए बदिया गांव के आसपास के गांवों की महिलाओं को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. सैकड़ों महिलाएं हड़िया-दारू बनाना छोड़ अगरबत्ती बना रही हैं.

ग्रामीण महिलाओं का रुकेगा पलायन
इस गांव की महिलाएं हमेशा से रोजगार के अभाव में दूसरे प्रदेश पलायन कर जाती थीं. अगरबत्ती निर्माण कार्य में जुड़ी महिलाएं चांदमुनी हांसदा, चुड़की मुर्मू, मक्कू टुडू, मकु मुर्मू, मारग्रेट टुडू, पानमुनी हांसदा एवं मटकी सोरेन ने बताया कि पहले परिवार के साथ दूसरे राज्यों में काम की तलाश में पलायन करते थे. अब वह नहीं जाती हैं. रोजगार के लिए अब भटकना नहीं पड़ रहा है, बल्कि अगरबत्ती निर्माण से जुड़ कर सम्मान के साथ अपने गांव में ही रहकर पैसे कमा रही हैं.