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  • May 20 2019 5:13PM

अमृत जल का कमाल, रसोई घर के कचरे से बन रही है जैविक खाद

अमृत जल का कमाल, रसोई घर के कचरे से बन रही है जैविक खाद

पंचायतनामा टीम
रामगढ़

आप रसोई घर के सूखे/गीले कचरे (सब्जी का छिलका/ बचा हुआ खाना) को क्या करते हैं? खुले में फेंक देते होंगे. अमूमन तकनीकी जानकारी के अभाव में अधिकतर लोग यही करते हैं. स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता को लेकर लोगों को प्रेरित किया गया, क्योंकि उत्तम स्वास्थ्य के लिए साफ-सफाई बेहद जरूरी है. इसके बावजूद स्वास्थ्य और पर्यावरण के नुकसान की चिंता किये बगैर हम सब खुले में कूड़ा-कचरा या गीला कचरा फेंक गंदगी फैलाते रहते हैं. आप किचन वेस्ट से बेस्ट (जैविक खाद) बना सकते हैं. झारखंड में पहली बार पतरातु विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल, पतरातु) द्वारा इकोफ्रेंडली टेक्निक अपनाते हुए अमृत जल के माध्यम से अपनी कैंटीन से निकलनेवाले गीले कचरे से महज 30 दिनों में ही जैविक खाद बनायी जा रही है. इससे फूलों की हरियाली बढ़ गयी है

 

कैंटीन के कचरे से बन रही जैविक खाद
रसोई घर से निकलने वाला गीला (हरा) कचरा अनुपयोगी नहीं होता है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हरे कचरे से आप जैविक खाद बना सकते हैं. किचन गार्डेन या थोड़ी जमीन (गमला) में खेती कर इस जैविक खाद का सदुपयोग कर सकते हैं. फूलों की हरियाली या इसके उत्पाद में आपको गुणवत्ता दिखेगी. एनटीपीसी की सब्सिडियरी कंपनी पतरातु विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पतरातु) झारखंड सरकार के जेबीवीएनएल के साथ संयुक्त उपक्रम में है. इसके परिसर में कैंटीन की व्यवस्था है. कैंटीन के कचरे से जैविक खाद. सुनकर आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन ये सच है. तकनीक के जरिये इससे निकलने वाले गीले (हरे) कचरे को रिसाइकिल किया जा रहा है. रसोई घर के कचरे को सौ फीसदी खाद में परिवर्तित किया जा रहा है. दो जुलाई 2018 को मशीन के जरिए किचन वेस्ट से बेस्ट (जैविक) बनाने की विधिवत शुरुआत की गयी थी. देवराजे ऑर्गनाइजेशन फॉर सोशल सर्विस द्वारा यह कार्य किया जा रहा है.

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ऐसे बन रही जैविक खाद
सबसे पहले हरे/गीले और भूरे/सूखे (सूखा घास या पत्ता) कचरे को जमा किया जाता है. इसके बाद उसकी छंटनी की जाती है. सूखा और गीले कचरे को अलग-अलग किया जाता है. दो तरह की छोटी-छोटी मशीनें लगी हुई हैं. एक मशीन से सभी बड़े कचरों के छोटे-छोटे टुकड़े किये जाते हैं. इसके बाद सूखे व गीले कचरे को दूसरी मशीन (मिक्सर) में डाला जाता है. इसके बाद उसमें अमृत जल और कल्चर को मिक्स कर देते हैं. करीब एक घंटे तक मिक्सर में रहने के बाद उसे निकाल लिया जाता है और डिकंपोजिंग यूनिट में विशेष देखभाल में 20-25 दिनों के लिए रख देते हैं. इसके बाद जैविक खाद तैयार हो जाती है. इसका उपयोग आप फूल, पौधों और सब्जी उगाने में कर सकते हैं. जैविक खाद की बिक्री कर आमदनी की जा सकती है.

आप भी बना सकते हैं जैविक खाद
आप भी अपने रसोई घर के सूखे व गीले कचरे का सदुपयोग कर जैविक खाद बनाना चाहते हैं और उसका उपयोग अपने घर के फूल-पौधों या सब्जी उगाने में करना चाहते हैं, तो आप बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कांके के बीपीडी विभाग के सीइओ सिद्धार्थ जायसवाल से विस्तृत जानकारी ले सकते हैं. उनसे मोबाइल नंबर 9431079933 पर संपर्क किया जा सकता है.

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किचन वेस्ट से बना रहे बेस्ट : पीके बिश्वास
पीवीयूएनएल, पतरातु के मानव संसाधन प्रमुख पीके बिश्वास ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए कैंटीन के हरे कचरे का सदुपयोग करने का प्रयास किया गया है. किचन वेस्ट को मशीन के जरिये रिसाइकिल कर जैविक खाद बनायी जा रही है. इसका उपयोग परिसर में लगे फूल-पौधों में किया जा रहा है.

अमृत जल से बन रही जैविक खाद
देवराजे ऑर्गनाइजेशन फॉर सोशल सर्विस के संस्थापक प्रशांत ओझा ने कहा कि झारखंड में पहली बार पीवीयूएनएल परिसर में अमृत जल के जरिये किचन वेस्ट से जैविक खाद बनायी जा रही है. 45-60 दिनों में बननेवाली जैविक खाद अमृत जल से महज 25-30 दिनों में तैयार हो जा रही है. इस इनोवेशन के लिए इन्हें पुरस्कृत किया गया है.

बीएयू से मिला तकनीकी सहयोग : सिद्धार्थ जायसवाल
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), कांके के बीपीडी विभाग के सीइओ सिद्धार्थ जायसवाल ने कहा कि किचन वेस्ट मैनेजमेंट के लिए बीएयू द्वारा तकनीकी सहयोग दिया गया. आम लोग भी अपनी रसोई के सूखे और गीले कचरे से जैविक खाद बनाकर जरूरत की सब्जियां उगा सकते हैं.