gram savraj

  • Dec 31 2018 4:19PM

11वीं सदी में शिव आराधना और मंदिर निर्माण का प्रतीक है खखपरता धाम

11वीं सदी में शिव आराधना और मंदिर निर्माण का प्रतीक है खखपरता धाम

अभिषेक शास्त्री
लोहरदगा

झारखंड के छोटानागपुर की धरती पुरातात्विक दृष्टिकोण से शैव कल्ट का क्षेत्र रही है. यह शिव आराधना का प्रमुख केंद्र रही है. लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, खूंटी और रांची में पुरातात्विक सर्वेक्षण एवं खुदाई में इस बात के प्रमाण इसे और पुष्ट करते रहे हैं. रांची से 70 किलोमीटर पश्चिम स्थित लोहरदगा जिला इसका खास उदाहरण है. लोहरदगा का पूरा क्षेत्र सदियों से शिव आस्था का खास केंद्र रहा है. यहां खखपरता धाम, अखिलेश्वर धाम, महादेव मंडा के साथ-साथ शहर के छात्रबगीचा में कुआं खुदाई में प्राप्त विशाल शिवलिंग प्रामाणिक साक्ष्य हैं.

इनमें खखपरता धाम का शिव मंदिर अपने निर्माण व ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. इतिहासकार और पुरातत्व विभाग ने अपनी जांच में आधिकारिक तौर पर स्थापित किया है कि यह मंदिर और क्षेत्र सदियों पहले शिव आराधना का बड़ा केंद्र था. खखपरता धाम के रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि यह धाम 11वीं सदी में शिव आराधना का बहुत बड़ा केंद्र था. मंदिर के पत्थर ओड़िशा शैली के हैं. इस तरह के पत्थर और डिजाइन का प्रयोग आज से 11वीं सदी में देखे जाते थे. खखपरता में मंदिर एक 200 फीट ऊंचे चट्टान पर निर्मित है. मंदिर का निर्माण पत्थरों को एक-दूसरे में सांचे के साथ जोड़ कर किया गया है. मंदिर का निर्माण ओड़िशा की पंचरथ पद्धति के अनुसार हुई है

मंदिरों की श्रृंखला से भी जुड़ा है खखपरता
वर्ष 2010 में पुरातत्व विभाग द्वारा किये गये वैज्ञानिक सर्वेक्षण में खखपरता मंदिर की पहाड़ी की तलहटी में 10 मंदिरों की श्रृंखला का पता चला था. खुदाई में यहां इन श्रृंखला मंदिरों का ढांचा भी प्राप्त हुआ था. मार्च 2011 से यहां इन आठ मंदिरों के निर्माण की योजना शुरू की गयी थी. श्रृंखला मंदिरों को खुदाई में प्राप्त नक्शे और प्रारूप के यथावत ही निर्माण कराया गया. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने वैज्ञानिक उत्खनन के द्वारा पहाड़ी की तलहटी में मंदिरों के समूह को प्रकाश में लाने का कार्य किया था. इसमें 10 मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं और बीच में एक मां दुर्गा की प्रतिमा मिली थी.

मंदिर स्थल की खुदाई में पुराने पत्थर और शिवलिंग मिले हैं. श्रृंखला मंदिर निर्माण में एक लाइन में पांच मंदिर बनाये गये हैं. उसके बाद उत्तर पूर्व में पांच मंदिर बनाये गये हैं. बीच में एक हवनकुंड सहित मां दुर्गा का मंदिर बनाया गया है. मंदिरों के निर्माण के लिए ओड़िशा से कारीगर और लाल पत्थरों को लाया गया था. इन मंदिरों को भी पंचरथ पद्धति से किया गया है. मंदिर निर्माण में चूना, बेल, गुड़ और कुंदु का आटा को मिला कर एक विशेष घोल तैयार कर पत्थरों को जोड़ने का काम किया गया है.राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में खखपरता गांव को शिव नगरी के रूप में विकसित करने का काम किया है.