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  • May 4 2019 5:12PM

युवा शिल्पकार छत्रवीर आदिवासी कला को दे रहे बढ़ावा

युवा शिल्पकार छत्रवीर आदिवासी कला को दे रहे बढ़ावा

संजय सरदार
जिला: पूर्वी सिंहभूम

झारखंड में पेंटिंग एवं शिल्पकला के क्षेत्र में छत्रवीर सिंह जाना-पहचाना नाम हैं. इन्होंने अपनी कला को कभी व्यवसाय नहीं बनाया.आदिवासी कला को संरक्षण देने को लेकर वह प्रयासरत हैं. वह पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत मुसाबनी प्रखंड के जादूगोड़ा थाना क्षेत्र स्थित ईंचड़ा गांव के रहनेवाले हैं. उन्हें बचपन से ही पेंटिंग का शौक रहा है. मैट्रिक तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने बालेश्वर आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में पेंटिंग एवं शिल्पकला की पढ़ाई की. वर्ष 2008 में पास करने के बाद वह इस क्षेत्र में कार्य करने लगे. आज अच्छे कलाकार के साथ-साथ एक बेहतर शिल्पकार भी हैं.

50 से अधिक वीर महापुरुषों की बना चुके हैं प्रतिमा
आदिवासी भूमिज समाज से जुड़े होने के कारण वो आदिवासी कला के चित्रण में काफी रूचि लेते हैं. भुवनेश्वर में पेंटिंग प्रदर्शनी में कला दिखा चुके हैं. 50 से अधिक वीर महापुरुषों की प्रतिमा बना चुके हैं. उपायुक्त कार्यालय, जमशेदपुर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं घाटशिला अनुमंडल कार्यालय में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा बना चुके हैं. छत्रवीर कहते हैं कि उन्हें बचपन से ही पेंटिंग का शौक रहा है. इस कारण वह इस क्षेत्र में आए. इन्हें नौकरी का भी ऑफर मिला, लेकिन झारखंड में कला को पहचान दिलाने के उद्देश्य से उन्होंने नौकरी नहीं की. छत्रवीर को विभिन्न संस्थानों से कई अवार्ड मिल चुके हैं.