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  • Jun 5 2019 6:23PM

कुएं व डाड़ी के पानी से लोग बुझा रहे हैं प्यास

कुएं व डाड़ी के पानी से लोग बुझा रहे हैं प्यास

दुर्जय पासवान
जिला: गुमला 

गुमला जिले की लाइफलाइन नदियां सूख चुकी हैं. तालाब, कुआं व चेकडैम में भी कहीं-कहीं बूंदभर पानी है. कई गांवों में पानी खत्म हो गया है. लोग प्यास बुझाने व घरेलू काम के लिए जहां-तहां से पानी जुगाड़ कर रहे हैं. गुमला के ग्रामीण इलाकों में स्थिति भयावह हो गयी है. गांवों में चापाकल खराब पड़े हैं, लेकिन मरम्मत नहीं करवाया जा रहा है. गांवों में लोग चुआं, झरना व नदी के पझरा का पानी पी रहे हैं. इलाके का जलस्तर काफी नीचे चला गया है. लाइफलाइन शंख, कोयल, लावा, बासा, कांजी, लफरी, खटवा, पुग्गू, देवाकी, बाघमुंडा व तोरपा नदी सूख चुकी है. करोड़ों रुपये से बने कई जलाशयों में कम मात्रा में पानी है. मनरेगा व विभिन्न योजनाओं से बने चेकडैम व तालाब में पानी खत्म हो गया है और जमीन फटने लगी है. पीएचइडी विभाग के अनुसार, जिले में 15,974 चापाकल है. इसमें 3,299 चापाकल खराब पड़े हैं. चालू स्थिति में 12,675 चापाकल है. गुमला शहर को 10 लाख गैलेन पानी की जरूरत है, लेकिन पाइपलाइन व जलमीनार की कमी के कारण दो लाख गैलेन पानी ही गुमला शहरी क्षेत्र को सप्लाई हो पा रही है. गुमला शहर के कई इलाकों में पेयजलापूर्ति बंद है

823 आंगनबाड़ी केंद्र व 297 स्कूलों में पानी नहीं
जिले के 823 आंगनबाड़ी केंद्र व 297 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में पानी नहीं है. यहां चापाकल लगाया ही नहीं गया है, जिस कारण यहां पढ़नेवाले बच्चों को सालोंभर पानी के लिए परेशानी झेलनी पड़ती है. जानकारी के अनुसार, गुमला जिले में 1670 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 823 केंद्रों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है, जबकि 315 केंद्र में चापाकल खराब पड़ा है. इसकी मरम्मत नहीं हो रही है. कई बार खराब चापाकलों की मरम्मत की मांग की गयी है. इसके बाद भी विभाग द्वारा पहल नहीं की जा रही है. विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 58 स्कूल ड्राइ जोन में हैं, जहां जमीन खोद कर पानी निकालना काफी मुश्किल है.

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पांच साल में एक भी नया चापाकल नहीं लगा
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने पांच साल में एक भी नया चापाकल नहीं लगाया है और न ही नये चापाकल बनाने के लिए कोई प्रस्ताव तैयार किया गया है. गुमला जिले में वर्षों पूर्व जो चापाकल बने थे, उन्हीं चापाकलों की पांच साल से मरम्मत कर प्यास बुझायी जा रही है, जबकि कई पुराने चापाकलों की स्थिति ऐसी ही है. यही वजह है कि जिले के 944 गांवों में से आधा से अधिक गांवों में चापाकल खराब है. खराब चापाकलों का या तो पाइप सड़ गया है या फिर हैंडल टूट गया है. कुछ चापानल के पाइप भी गायब है.

अधिकारियों की अपनी बात
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, गुमला के प्रभारी कार्यपालक अभियंता चंदन कुमार ने कहा कि सरकार का मानना है कि 150 व्यक्ति पर एक चापाकल काफी है. अगर किसी गांव में एक चापाकल है, तो उससे 150 व्यक्ति अपनी प्यास बुझा सकते हैं. सरकार ने जो सर्वे कराया है उसके अनुसार वर्तमान में 62 व्यक्ति पर एक चापाकल है. इस लिहाज से गांवों में नये चापाकल की जरूरत नहीं है. इस कारण पेयजल विभाग ने पांच साल में एक भी नया चापाकल नहीं लगवाया है. उन्होंने बताया कि यह स्थिति सिर्फ गुमला जिले की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की है. आपात स्थिति में गुमला डीसी, सांसद, विधायक व अन्य मदों से चापाकल लगाया गया है, लेकिन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा एक भी चापाकल नहीं लगाया गया है. पुराने चापाकलों की मरम्मत करायी जा रही है. इस गर्मी में 497 पुराने चापाकलों की मरम्मत करायी जा रही है. गुमला डीसी शशि रंजन ने भी जिले के सभी 12 प्रखंड के बीडीओ को निर्देश दिया है कि जिन गांवों में चापाकल खराब है, उन गांवों के चापाकलों की मरम्मत करायी जाये, जिससे लोगों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़े.

चापाकलों की स्थिति
प्रखंड                    पंचायत                      कुल चापाकल                खराब चापाकल
गुमला                        25                             2188                           388
सिसई                       18                             1946                            343
भरनो                        12                             1396                            312
रायडीह                     13                              1004                           195
चैनपुर                       10                              1191                           311
डुमरी                         09                             801                             167
जारी                          05                             502                             151
पालकोट                     14                            1588                             312
बसिया                        15                            1566                             368
कामडारा                     10                            1220                             277
घाघरा                         18                            1522                             259
बिशुनपुर                      10                             1050                            216
कुल                         159                         15974                          3299