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  • Sep 18 2018 2:22PM

उपेक्षित कुम्हार समाज हक-अधिकार के लिए करेगा आंदोलन

उपेक्षित कुम्हार समाज हक-अधिकार के लिए करेगा आंदोलन

शेख कलीम

जिला : धनबाद

सरकारी उदासीनता के कारण कुम्हार समाज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है. इस कारण कुम्हार समाज हक-अधिकार के लिए एकजुट होकर आंदोलन करने का मन बना चुका है. राज्य में कुम्हारों की संख्या तकरीबन 32 लाख है. प्रत्येक विधानसभा में 10 हजार से लेकर 50 हजार तक मतदाता हैं. इसके बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति बदतर है. आधुनिकता के इस दौर में लोग मिट्टी की थाली व ग्लास की जगह प्लास्टिक की थाली व ग्लास का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं. एक तरफ जहां प्लास्टिक के बर्तन में खाने-पीने से लोगों का सेहत खराब हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुम्हारों की रोजी-रोटी मारी जा रही है. कुम्हार मिट्टी के जो भी बर्तन बनाते हैं, वह आकर्षक होता है. मिट्टी के बने बर्तन में खाने-पीने से सेहत खराब नहीं होता है. कुम्हारों की सबसे बड़ी समस्या मिट्टी नहीं मिलना है. अगर किसी तरह मिट्टी मिल भी जाये और सामान तैयार कर लिया जाये, तो उसे बेचने के लिए उपयुक्त बाजार की समस्या है.

1.
कुम्हार समाज के उत्थान की दिशा में राज्य सरकार को गंभीर होने की जरूरत है. प्लास्टिक के सामानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगे, तभी लोग मिट्टी के बर्तन का उपयोग करने को बाध्य होंगे.
पप्पू पंडित, सदस्य, झारखंड प्रजापति कुम्हार महासंघ

2.
सरकार से हमारी मांग आर्थिक उत्थान, सामाजिक विकास एवं राजनीतिक हिस्सेदारी की है. इसके अलावा माटी कला बोर्ड में बजटीय राशि का प्रावधान, कुम्हार समाज को आरक्षण की व्यवस्था, लोकसभा व विधानसभा चुनाव में समाज के लोगों को प्रतिनिधित्व का मौका दिया जाना चाहिए.
राजेंद्र महतो, प्रदेश अध्यक्ष, झारखंड प्रजापति कुम्हार महासंघ