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  • Aug 21 2017 2:08PM

इच्छाशक्ति के बावजूद ब्रांबे का नहीं हुआ विकास

इच्छाशक्ति के बावजूद ब्रांबे का नहीं हुआ विकास
रांची जिला मुख्यालय से 19 किलोमीटर दूर एनएच-75 के किनारे स्थित है ब्राम्बे पंचायत. चार राजस्व गांव ब्राम्बे, चुंद, मलटोटी व टिको तथा एक टोली करंजटोली को मिला कर बनी यह पंचायत मांडर प्रखंड के अंतर्गत आता है. लगभग साढ़े सात हजार की आबादी वाले इस पंचायत में जितना विकास होना चाहिए था, उतना विकास नहीं हो पाया. मुखिया जयवंत तिग्गा भी मानते हैं कि विकास की दौड़ में हम कहीं-न-कहीं थोड़े पीछे रह गये हैं. पंचायत के ब्राम्बे गांव में दो साप्ताहिक बाजार लगता है. अब रविवार के दिन भी ब्राम्बे में सब्जी मार्केट लगता है. इलाके की अधिकतर आबादी कृषि पर निर्भर है.
 
ब्राम्बे में दो बाजार लगने के कारण स्थानीय लोगों को इसी बाजार में रोजगार भी मिल जाता है. साथ ही ब्राम्बे में सेंट्रल यूनिवर्सिटी के खुल जाने से काफी संख्या में यहां के लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है. सेंट्रल यूनिवर्सिटी और दो दिन साप्ताहिक बाजार ब्राम्बे पंचायत की अर्थव्यस्था में नयी जान फूंक रही है. 
 
ब्राम्बे पंचायत में प्राथमिक शिक्षा के लिए सरकारी और गैर सरकारी स्कूल है. अधिकतर आबादी कृषि पर निर्भर होने के बावजूद इलाके के किसानों को सिचांई के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं है. किसान कुआं और तालाब पर ही अाज भी आश्रित हैं और इसी के सहारे अपने-अपने खेतों में सिंचाई कर पाते हैं. हालांकि साल 2017 में कुछ तालाबों का गहरीकरण किया गया है और किसानों को कुएं भी आवंटित हुए हैं. लेकिन, कुएं निर्माण में लगे लाभुकों को राशि मिलने में देरी हो रही है. 
 
इन लाभुकों को इसकी राशि मनरेगा के तहत भुगतान होने हैं, इस कारण लाभुकों को दो-तीन महीने तक का लंबा इंतजार भी करना पड़ता है. पंचायत के मुखिया भी यह मानते हैं कि भुगतान की लंबी प्रक्रिया के कारण मनरेगा को लेकर लोगों के मन में नकारात्मक भाव आ रहे हैं.
 
जयवंत तिग्गा बताते हैं कि कई किसानों को केजीवीके की ओर से कुआं दिया गया. कुआं बनकर तैयार भी है, लेकिन आज तक इन लाभुकों को राशि नहीं मिल पायी है. केजीवीके की ओर से ग्रामीणों के बीच बकरी पालन, मुर्गी, बतख और सूकर पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है.
 
ग्रामीणों के बीच बकरी पालन के लिए शेड निर्माण कराया जा रहा है. कई लोगों के बीच बतख और सूकर का वितरण भी किया गया है. जैविक खेती के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए किसानों को केजीवीके के माध्यम से डंपिग पिट बनवाया गया है, जहां वो कचरे से जैविक खाद बना सकते हैं.
 
मूलभूत सुविधाओं में बढ़ोतरी : ब्राम्बे पंचायत में मूलभूत सुविधाओं को लेकर एक साल में हुए बदलाव को देखा जा सकता है. गांवों में पीसीसी सड़कों का निर्माण हुआ है. ब्राम्बे गांव में नेजाम नगर से महुआ टोली तक पीसीसी सड़क बनायी गयी है. 
 
 वहीं, मंझला टोली और नीचे टोली में भी पीसीसी पथ बनी है. मलटोटी गांव में तालाब से लेकर अखरा तक सड़क बनी है. ग्राम चुंद में भी एक पीसीसी सड़क बनी है. पेयजल के लिए सौर ऊर्जा द्वारा संचालित मोटर पंप लगे हैं, जहां पर ग्रामीण आकर अपने इस्तेमाल के लिए पानी ले जा सकते हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि जितनी संख्या में सौर ऊर्जा संचालित मोटर पंप लगाये गये हैं, वो पर्याप्त नहीं है. 
 
इससे पंचायत के सभी गांवों के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. अभी भी गांवों में कई ऐसे टोले हैं, जहां पर पेयजल की काफी समस्या है. स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सुविधाएं तो बढ़ी, लेकिन उप स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपस्थिति नहीं के बराबर रहती है. उप स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति का लाभ झोला छाप डॉक्टर उठा रहे हैं. गांवों को रोशन करने के लिए गांवों के हर एक चौक पर बिजली के खंभों में एलइडी स्ट्रीट लाइट लगाये गये हैं. पंचायत के गांवों में स्वच्छ भारत अभियान को लेकर जागरूकता अभियान चलाये गये. स्कूली बच्चों ने रैली निकाली और इसका बदलाव भी दिखा. ग्रामीण स्वच्छता के प्रति जागरूक हो रहे हैं. खुले में शौच को लेकर भी लोग जागरूक हुए हैं और शौचालय निर्माण का कार्य भी चल रहा है, पर वो संतोषजनक नहीं है.
 
नशा उन्मूलन को लेकर ग्रामीण हो रहे जागरूक : जयवंत तिग्गा
 
ब्राम्बे पंचायत के मुखिया जयवंत तिग्गा यह स्वीकार करते हैं कि विकास कार्यों में थोड़े पीछे यह पंचायत जरूर है, लेकिन इच्छाशक्ति में कहीं कोई कमी नहीं है. शराबबंदी के मामले में उन्होंने कहा कि शराबबंदी को लेकर कई बार लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया गया. ग्रामसभा की बैठकों में भी नशा उन्मूलन को लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया है. इस प्रयास का सकारात्मक असर भी दिखता है. 
 
मुखिया बताते हैं कि विकास योजनाओं को लेकर जो राशि स्वीकृत की जाती है, वो पर्याप्त नहीं होती है, इसके कारण विकास कार्यों में रूकावट भी आती है और ग्रामीण भी नाराज हो जाते हैं. कई बार तो आवेदन देने के बाद भी योजनाओं को पास नहीं किया जाता है. इन सबके बावजूद अपने पंचायत क्षेत्र की जनता की शिकायतों को दूर करने का हरसंभव प्रयास चलता रहेगा.
 
ग्रामीण व वार्ड सदस्यों की नजर में बदलाव
 
ग्राम चुंद के वार्ड संख्या-तीन की पार्षद अनिता देवी बताती है कि विकास के मामले में चुंद काफी पीछे है. विकास योजनाओं में गांव की अनदेखी होती है. 
 
यही वजह है कि जितना विकास कार्य इन क्षेत्रों में होना चाहिए था, वो आज तक नहीं हो पाया है. योजना बनाओ अभियान के तहत ग्रामसभा की बैठक की जाती है, लेकिन बैठकों का जितना लाभ ग्रामीणों को मिलना चाहिए था, वो अब तक नहीं मिल पाया है. गांव चुंद के ही रामहरि उरांव बताते हैं कि अभी भी गांव और ग्रामीणों के बीच कई समस्याएं और मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखा जा सकता है. कुल मिलाकर कहें, तो गांवों में काम संतोषजनक नहीं हुआ है.