gound zero

  • Aug 7 2017 1:05PM

ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के गांव की हकीकत: थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है

ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के गांव की हकीकत: थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है

''झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की बयार बहे, इस उद्देश्य से राज्य सरकार मूलभूत सुविधाएं देने की बातें करती है. ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की योजनाएं कहां तक पहुंची. इसी को जानने पंचायतनामा की टीम ने गांवों का दौरा किया. इसकी शुरुआत राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के पैतृक आवास माहिल-जामटोली गांव से की. यह गांव खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड स्थित हांसा पंचायत के अंतर्गत आता है. इस पंचायत की पहचान मंत्री के पैतृक आवास के अलावा शहीद जावरा उरांव, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी निक्की प्रधान और राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी नौरी मुंडू के यहां से जुड़े होने से है. असीम पहचान समेटे हांसा पंचायत में विकास तो कुछ हद तक दिखी, लेकिन मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के आवास तक जानेवाली सड़क आज भी कीचड़ से सने हैं. हालांकि पंचायत के अन्य क्षेत्रों की सड़कें अच्छी है. गांव में बदलाव की तसवीर दिखायी दे रही है. मनरेगा के तहत रोजगार के साधन लोगों को मिल रहे हैं, जिससे पलायन कम हुआ है. गांव में तालाबों की संख्या अधिक होने के कारण ग्रामीणों की निर्भरता कृषि पर बढ़ी है, लेकिन सिंचाई की पूर्णरूपेण व्यवस्था अभी नहीं कही जा सकती है. शिक्षा के क्षेत्र में पंचायत अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है. यानी मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के पंचायत क्षेत्र में कार्य तो हुए, लेकिन इसे पूर्णरूपेण नहीं कहा जा सकता है. पढ़िए पवन कुमार की यह विशेष रिपोर्ट. ''

राजधानी रांची से 35 किलोमीटर दूर खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड का हांसा पंचायत. यह पंचायत इस कारण चर्चा में है, क्योंकि इसी पंचायत का एक गांव माहिल- जामटोली में झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा का पैतृक आवास है. माहिल गांव को प्रकृति ने असीम सुंदरता से नवाजा है. गांव में तालाब हैं. खेती योग्य जमीन है. लेकिन इसके ठीक उलट मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के आवास तक जाने के लिए आपको कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना होगा. इस गांव की गलियों में ही नीलकंठ सिंह मुंडा का बचपन बीता और बड़े हुए. नीलकंठ सिंह मुंडा के घर के बगल में ही धान का खेत है, जिसमें धान की फसल लगी है. हालांकि, कुछ ऐसी भी जमीन है, जो बारिश कम होने की वजह से अभी भी परती पड़ी है, क्योंकि वहां पर पानी की सुविधा नहीं के बराबर है. हांसा पंचायत का माहिल गांव एक राजस्व गांव है. माहिल गांव से अलग होकर एक टोली बना है जामटोली. माहिल गांव का चयन आदर्श गांव के लिए हुआ है. गांव तक जाने के लिए लिए पक्की सड़क बनी तो है, लेकिन मंत्री के आवास तक जाने में अापको कीचड़ भरे रास्ते से होकर ही गुजरना होगा.

कृषि पर आधारित आजीविका

माहिल गांव में अधिकतर ग्रामीण अपनी आजीविका के लिए कृषि पर ही निर्भर हैं. अधिकतर ग्रामीण आज भी अपने खेतों की सिंचाई के लिए बारिश पर ही निर्भर हैं. हाल के दिनों में डोभा निर्माण के बाद ग्रामीणों को थोड़ी राहत जरूर मिली है. बावजूद इसके, अभी भी पूरी तरह से ग्रामीण कृषि कार्य नहीं कर पा रहे हैं. दुग्ध उत्पादन में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है. हाल के दिनों में गांव में गौ-पालन को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया गया. इसी के तहत माहिल गांव में भी ग्रामीणों के बीच दुधारू गाय का वितरण किया गया है, जिससे काफी ग्रामीणों को रोजगार भी मिला है. इन सब सुधारों का फायदा यह हुआ कि अब इलाके में पलायन में कमी आयी है. इसका असर भी एक बदलाव के तौर पर दिखा है. 

गांव में मूलभूत सुविधाओं  का अब भी अभाव

गांव में मूलभूत सुविधाएं अभी तक पूरी नहीं हो पायी है. गांव तक पहुंचने के लिए खेतों के बीच से एक पीसीसी सड़क बनायी गयी है. सड़क के दोनों ओर गार्डवॉल बनाये गये हैं, लेकिन अब यह सड़क जर्जर और पुरानी हो चुकी है. कई जगहों पर नाली नहीं होने की वजह से मिट्टी सड़कों पर आ गयी है, जिससे ग्रामीणों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है. नालियों का निर्माण जामटोली में नहीं के बराबर हुआ है. जामटोली में करीब 12 से 15 आवास है और अधिकतर मकान कच्चे हैं. लाल मिट्टी के रंग से रंगी दिवारे और खपरैल छत इस गांव के घरों की निशानी है. सभी घर दूर-दूर में हैं. गांव में चारों ओर हरियाली है. माहिल गांव से जामटोली की दूरी लगभग एक किलोमीटर से अधिक है. मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के आवास के सामने दरवाजे से गुजर रही सड़क की तसवीर भी बारिश के कारण बिगड़ी हुई दिख रही है. सड़क में गंदा पानी और कीचड़ है. देखने से यह प्रतीत होता है, मानों यहां कोई सड़क बनी ही ना हो. नाली नहीं होने के कारण मिट्टी बह कर सड़क पर जमा हो गये, जिससे यह हालात पैदा हुए हैं. हां, माहिल गांव में सड़क अच्छी है और नालियों का भी निर्माण हुआ है. इसके बावजूद माहिल गांव में भी सड़कों पर कीचड़ भरे पड़े हैं. कई जगहों पर चलना भी मुश्किल है. 

पेयजल के लिए लगे हैं सौर ऊर्जा से संचालित मोटर

जामटोली एक पिछड़ा इलाका है. पीने के पानी के लिए लोग आज भी कुएं पर निर्भर हैं. हालांकि, जामटोली में कुछ चापाकल लगाये गये हैं, लेकिन वो पर्याप्त नहीं है. गर्मी में पीने के पानी के लिए ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के आवास के सामने ही एक पानी की टंकी बनी है, लेकिन इसे देख कर नहीं लगता है कि यहां से पूरे टोले में पीने के लिए पर्याप्त पानी मिल पाता होगा. माहिल गांव की बात करें, तो पेयजल को लेकर इलाके में काम हुआ और पेयजलापूर्ति को लेकर हालात बदले हैं. गांव में शुद्ध पेयजल के लिए मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के द्वारा प्याऊ का निर्माण कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को शुद्ध पानी पीने के लिए मिल रहा है. इसके आलावा गांव में चापानल भी लगाये गये हैं. पेयजल के लिए सौर ऊर्जा से संचालित मोटर लगाये गये हैं, जिसका लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है. 

उप स्वास्थ्य केंद्र है पर डॉक्टर रहते हैं नदारद

स्वास्थ्य की बात करें, तो हांसा पंचायत के माहिल गांव में एक उप स्वास्थ्य केंद्र है. इस केंद्र में स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का जिक्र है, लेकिन केंद्र में डाॅक्टर और एएनएम नदारद रहते हैं. ग्रामीण बताते हैं कि उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और एनएम की नियुक्ति है, लेकिन कभी भी वो समय पर नहीं आते हैं. जब मन करता है, सेंटर को बंद करके चले जाते हैं. इसके कारण ग्रामीण उप स्वास्थ्य केंद्र से मिलनेवाली सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं. ग्रामीणों को कई बार तो केंद्र के बाहर गेट पर ताला लटका मिलता है. 

सामाजिक सरोकार की योजनाएं 

पंचायत क्षेत्र के कई जरूरतमंदों के पास लाल कार्ड और बीपीएल कार्ड है. वृद्धा और विधवा पेंशन का लाभ भी ग्रामीणों को मिल रहा है. हां, कुछ लोगों को अभी भी इन सुिवधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी ग्रामीणों को मिल रहा है. 

एक राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी स्कूल में पढ़ाने को मजबूर

खूंटी की धरती ने देश को कई बेहतरीन हॉकी के खिलाड़ी दिये हैं. हेसेल गांव की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी निक्की प्रधान और 18 राष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल चुकी नौरी मुंडू माहिल गांव की रहनेवाली है. आलम देखिये, नौरी मुंडू, आज अपनी आजीविका के लिए एक िनजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाती हैं. एक राष्ट्रीय खिलाड़ी के तौर पर उन्हें जो सुविधाएं मिलनी चाहिए थी, वो आज तक उन्हें नहीं मिल पायी है. माहिल गांव में एक खेल का ग्राउंड है, जहां पर बच्चे हॉकी का अभ्यास करते हैं, लेकिन वहां पर भी उन्हें अभ्यास करने के लिए मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं.

मेराल गांव में शहीद जावरा मुंडा का आवास

हांसा पंचायत का एक गांव है मेराल. इस गांव की पहचान उरी हमले में शहीद हुए जवान जावरा मुंडा से है. शहीद जावरा मुंडा का घर मेराल गांव में है. शहीद के घर तक पंहुचनेवाली सड़क का हाल बेहाल है. नाली नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर बहता है और सड़क कीचड़ से सन जाती है. इसके कारण ग्रामीणों को सड़क पर चलना दूभर हो जाता है. ऐसा नहीं है कि पंचायत में नालियों का निर्माण नहीं हुआ है. नालियां हैं, लेकिन कई जगह ऐसे हैं, जहां नाली निर्माण होना बेहद जरूरी है.