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  • Jun 21 2017 1:17PM

टाटी पश्चिमी पंचायत सचिवालय भवन का हाल, उदघाटन के चार माह बाद ही खुली भ्रष्टाचार की पोल

टाटी पश्चिमी पंचायत सचिवालय भवन का हाल, उदघाटन के चार माह बाद ही खुली भ्रष्टाचार की पोल

पंचायतनामा डेस्क

रांची जिला मुख्यालय से करीब 14 किमी दूर टाटी पश्चिमी पंचायत में पंचायती राज व्यवस्था दम तोड़ रहा है. शुरुआत पंचायत भवन से ही करते हैं. तीन साल पहले पंचायत भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ और इसी साल 27 जनवरी को पंचायत सचिवालय का उद्घाटन किया गया. अभी उद्घाटन के चार महीने ही बीते हैं कि प्लाई से बने दरवाजे दीमक के आहार बनने लगे. जगह- जगह दीवारें फटने लगे हैं और खिड़की-दरवाजे टूटने लगे हैं. प्रज्ञा केंद्र के ठीक बगल वाले कमरे के दरवाजे दीमक खा गये और पल्ला टूट कर अलग होने लगा है. खिड़कियों की छिटकनी टूट कर अलग हो गयी. सभी कमरों में गंदगी का अंबार है.

एक व्यक्ति, दो प्रभार 

पंचायत सेवक घासी राम मुंडा का कहना है कि ग्रामसभा के लिए समन्यव ही नहीं है. चूंकि मैं दो पंचायतों का सेवक हूं, इस वजह से एक ही समय में दोनों पंचायतों को समय दे पाना मुश्किल है. यह पूछने पर कि टाटी पश्चिमी पंचायत के कितने ग्रामसभा में आपने भाग लिया है, तो उन्होंने कहा कि रजिस्टर टाटी पंचायत में है, देखने के बाद ही बता पाऊंगा.

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया आंगनबाड़ी केंद्र : इस पंचायत में एक आंगनबाड़ी केंद्र है लेकिन वह पांच साल में पूरा नहीं हो सका. सिर्फ ढांचा खड़ा है. आंगनबाड़ी में खिड़की, दरवाजे भी नहीं लगे हैं. अर्धनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है. फिलहाल आंगनबाड़ी केंद्र स्थानीय सेविका विभा सिन्हा के घर पर ही चलता है. यह भी ग्रामीणों के लिए एक बड़ी समस्या है.

अन्य समस्याएं

टाटी पश्चिमी पंचायत शहर से सटा हुआ पंचायत है. 5000 से अधिक की आबादी और 1200 घरवाले इस पंचायत में रैयतों की संख्या कम और बाहर से आकर बसे लोगों की संख्या ज्यादा है. बसावट शहर जैसा है. इस वजह से यहां की समस्याएं भी शहर की तरह है. पंचायत में कचरा प्रबंधन के साधन नहीं है. यहां पर घरों का निर्माण हुआ है, लेकिन बिना किसी योजना के. निर्माण कार्य पूरे होने के बाद कई इलाकों में गलियां संकीर्ण हो गयी है. इसका मुख्य कारणों में से एक है सरकारी जमीन और सड़क का अतिक्रमण. बिना किसी योजना के घर बनाने से नाली और सड़क की परेशानी बड़ी हो गयी है. चूंकि यह पंचायत शहर से सटा है. जमीन के अभाव में प्राथमिक विद्यालय सामुदायिक विकास भवन में चलता है. यदि जरूरी पड़े, तो किसी दूसरे विकास कार्यों के लिए खाली जमीन नहीं के बराबर है. यहां से स्टेट हाइवे गुजरता है. मुख्य सड़क से भारी वाहनों का आना-जाना है, इसलिए दुर्घटना की भी आशंका बनी रहती है.

बिजली मीटर है, लेकिन बल्ब नहीं

टाटी पश्चिमी पंचायत में 10 से 12 कमरे हैं, लेकिन किसी भी रूम में एक अदद बल्ब तक नहीं है. पंचायत सचिवालय में वायरिंग कीलें ठोंक कर की गयी है. यहां एक लोक शिक्षा केंद्र भी चलता है. अलमीरा में कई किताबें तो रखी गयी है, लेकिन कोई पढ़ता नहीं है. अखबार या मैग्जिन इस पंचायत भवन में आता ही नहीं है. लोक शिक्षा केंद्र में कैरम बोर्ड भी है, लेकिन जब कैरम बोर्ड दिया जा रहा था, उस समय उसकी गोटी नहीं दी गयी. इस वजह से कैरम बोर्ड का पैकेट आज तक खुला ही नहीं.

पेयजल की समस्या

टाटी पश्चिमी पंचायत में पेयजल का भारी संकट है. यह क्षेत्र औद्योगिक है. यहां पर जो सप्लाई का पानी आता है, वह उद्योग के लिए चला जाता है. स्थानीय ग्रामीणों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है. टाटी पश्चिमी पंचायत स्वर्णरेखा नदी तट पर बसा है, लेकिन इस पंचायत में भूगर्भ जलस्तर पाताल को छूने लगा है. 700 फीट पर भी पानी नहीं मिल रहा है. इस वजह से यहां के लोग पानी के लिए खासा परेशान हैं. स्वर्णरेखा नदी में थोड़ा-बहुत पानी है, लेकिन वह भी राइस मिल की गंदगी और दूसरे उद्योगों की गंदगी से प्रदूषित हो चुकी है. नदी का भी अतिक्रमण तेजी से हो रहा है. नदी में पशुओं को नहलाने और मल-मूत्र विसर्जित करने से भी नदी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है.

जेनरेटर-सोलर बना शो पीस

टाटी पश्चिमी पंचायत में 13वें वित्त आयोग की राशि से जेनसेट खरीदा गया था, लेकिन जेनसेट आज तक चला ही नहीं. इसके बाद पंचायत सचिवालय के छत पर सोलर पैनल सिस्टम लगाया गया. तार बिछाये गये, लेकिन सोलर पैनल से आज तक बिजली जेनरेट ही नहीं हुई. टाटी पंचायत रांची शहर का औद्योगिक क्षेत्र से भी जुड़ा है. इसके बावजूद, इस इलाके में बिजली की समस्या बरकार रहती है. बिजली के अभाव में प्रज्ञा केंद्र के कामकाज पर भी असर पड़ता है. कई बार बिजली नहीं होने के कारण समय पर लाभुकों का काम नहीं हो पाता है.

पंचायत समिति सदस्य को नहीं मिली जगह

टाटी पश्चिमी पंचायत में पंचायत समिति सदस्य शैलेश मिश्रा को अभी तक बैठने की जगह भी नहीं मिल पायी है. हाल ही में चयनित पंचायत स्वयंसेवकों के लिए भी बैठने की जगह नहीं है. पंचायत समिति सदस्य शैलेश मिश्रा का कहना है कि मुखिया को कई बार बोला गया, लेकिन वह कहती हैं कि पंचायत समिति के लिए पंचायत सचिवालय में कोई कमरा या कुर्सी का प्रावधान नहीं है. हालांकि जब हमने मुखिया से बात की, तो उन्होंने कहा कि पंचायत समिति को कमरा नहीं दिया गया है, लेकिन सचिवालय में जगह की कमी नहीं है. वह चाहें तो बैठ सकते हैं.

केंद्र संचालक को सताता है चोरी का डर

प्रज्ञा केंद्र बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के ही चल रहा है. दो साल पहले यहां पर कनेक्शन से संबंधित उपकरण लगाये गये, लेकिन आज तक इंटरनेट कनेक्शन ही नहीं पहुंचा. लिहाजा केंद्र संचालक स्वपन चक्रवर्ती ने अपने खर्चे से ब्रॉडबैंड कनेक्शन लिया है. वह कहते हैं कि हमलोगों का हार्डवेयर का काम है. कीमती मशीनें होती है, लेकिन सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं है. इसलिए हमेशा चोरी का डर लगा रहता है. प्रज्ञा केंद्र के कंप्यूटर और दस्तावेजों की चोरी न हो जाये, इसलिए अपने खर्चे से दरवाजे का मरम्मत कराया, लेकिन दरवाजे में अभी भी मजबूती नहीं है. 

ग्रामीणों का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि टाटी पश्चिमी पंचायत में ग्रामसभा यदा-कदा ही होती है. कई बार मुखिया फर्जी ग्रामसभा करा देती हैं. ग्रामसभा की सूचना किसी को नहीं दी जाती है. जिस वजह से कई योजनाओं की जानकारी तक नहीं मिल पाती है. अचानक से जब काम शुरू होता है, तब पता चलता है. मुखिया के घरवाले और मुखिया पति की मनमानी चलती है. 

ग्रामीणों की मर्जी के बिना नहीं होता कोई काम : मुखिया

मुखिया सुनीता देवी का कहना है कि गांव में नाली और सड़क बनाने का काम चल रहा है. ग्रामीणों की मर्जी के बिना कोई काम नहीं होता. बतौर इसके लिए ग्रामसभा का आयोजन होता है. वहीं पर हम फैसला लेते हैं.

मुखिया-पंचायत सेवक भी नहीं बैठते : पहले तल्ले पर मुखिया और पंचायत सेवक का कार्यालय तो है, लेकिन कभी कभार ही खुलता है. स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि पंचायत का कामकाज मुखिया सुनीता देवी के पति ही संभालते हैं. पंचायत सेवक तो पंचायत भवन आते ही नहीं हैं. टाटी पश्चिमी पंचायत के सचिव घासीराम मुंडा महिलौंग पंचायत के भी सचिव हैं और ज्यादा ध्यान महिलौंग पंचायत में ही देते हैं. स्थानीय लोग जब सचिव को फोन करते हैं, तो जवाब आता है कि वह फील्ड में हैं. इस संबंध में घासीराम मुंडा कहते हैं कि एक साथ दो पंचायत और एक प्रखंड का काम देखना मुश्किल है. हम दबाव में आकर काम कर रहे हैं.