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  • Jul 17 2019 3:16PM

जोहार मंत्र से गांवों से दूर हो रही गरीबी

जोहार मंत्र से गांवों से दूर हो रही गरीबी

पवन कुमार 

15 नवंबर 2017 को शुरू हुई जोहार परियोजना के जरिये उन्नत कृषि तकनीक से उच्च मूल्य खेती, बाजार की उपलब्धता, सिंचाई की व्यवस्था, पशुपालन, मछली पालन, वनोपज और कौशल विकास के माध्यम से झारखंड के 3500 गांवों की तस्वीर बदल रही है. दो लाख परिवारों को लक्षित कर वर्ल्ड बैंक और झारखंड सरकार (ग्रामीण विकास विभाग) द्वारा छह साल के लिए परियोजना चलायी जा रही है. जोहार के तहत महिला समूहों को मिला कर अब तक राज्य के 17 जिलों के 68 प्रखंडों में 2550 से ज्यादा उत्पादक समूहों का गठन हो चुका है. उन्नत तकनीक, उन्नत बीज और खाद, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और सामूहिक खेती से उत्पादन बढ़ रहा है. बाजार तक पहुंच बढ़ी है, जिससे फसलों के अच्छे दाम मिल रहे हैं. फायदा किसानों को हो रहा है. इस तरह गांवों से गरीबी दूर करने का मंत्र बन गया है जोहार.

खेती को बिजनेस व किसान बन रहे बिजनेस मैन
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उत्पादक समूहों को मिला कर एक उत्पादक कंपनी बनायी गयी है, ताकि उत्पादक समूहों को बाजार की परेशानी नहीं हो. कृषि को बिजनेस और किसान को बिजनेसमैन बनाने के उद्देश्य से उत्पादक समूह और उत्पादक कंपनी का कॉन्सेप्ट रखा गया है. उत्पादक समूह से उन महिला किसानों को जोड़ा जा रहा है, जो सखी मंडल से जुड़ी हुई हैं. प्रत्येक उत्पादक समूह में आजीविका कृषि मित्र, आजीविका पशु सखी, मत्स्य मित्र और वनोपज मित्र का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि उत्पादक समूहों को परेशानी नहीं हो. प्रशिक्षित सामुदायिक कैडर्स को एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया का सर्टिफिकेशन कराया जा रहा है, ताकि वो भविष्य में संगठित रूप से कार्य कर सकें.

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इन क्षेत्रों में हो रहे कार्य

1. उच्च मूल्य खेती : उन्नत तकनीक के जरिये ज्यादा उपज, उन्नत किस्म की खाद और बीजों के इस्तेमाल से बेहतर उत्पादन हो रहा है. परियोजना के तहत उत्पादक समूह बनने से छोटी जोत वाली ग्रामीण महिलाएं सामूहिक खेती से अच्छा मुनाफा कमा रही हैं. खाद- बीज एक साथ सस्ते दाम में मिल जाते हैं. किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा उन फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिनके बाजार में अच्छे दाम मिलते हों. किसानों को सामूहिक रूप से दलहन और सब्जी की खेती करने के लिए कहा जाता है, क्योंकि बाजार में हमेशा मांग रहती है. इसके तहत किसान पाठशाला के जरिये उत्पादक समूह की महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है.

2. मत्स्य पालन : परियोजना के तहत बीज फीड और जाल उपलब्ध कराया जाता है. उत्पादक समूह से जुड़े किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है और मत्स्य मित्र उनकी मदद के लिए उपलब्ध रहते हैं. फिलहाल 600 उत्पादक समूह मछली उत्पादन कर रहे हैं. परियोजना के तहत एक एकड़ तालाब के सुधारीकरण के लिए हार्वेस्टिंग मशीन, जाल और यंत्र के लिए 26,725 रुपये की राशि और सीड प्रोडक्शन के लिए 21,578 रुपये की राशि दी जाती है.

3. पशु पालन : जोहार परियोजना के तहत पशुपालन के जरिये आय बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. इसके तहत छोटे पशुओं जैसे बकरी, मुर्गी और सूकर पालन पर जोर दिया जा रहा है. नस्ल सुधार करने के लिए ब्रीडर विलेज बनाये जा रहे हैं. राज्य में 24 ब्रीडर विलेज बनाने पर काम हो रहा है. ब्रीडर विलेज की किसान पाठशाला में परियोजना की तरफ से प्रशिक्षक आते हैं, जो बकरियों केे बेहतर रख-रखाव की जानकारी देते हैं. बकरी शेड बनाने के लिए परियोजना के तहत ब्रीडर विलेज में उत्पादक समूह से जुड़ी महिला को 7,500 रुपये दिये जाते हैं.

4. वनोपज : लेमन ग्रास, मुनगा, लाह, इमली, चिरौंजी और तुलसी जैसे उत्पादों को महिलाओं द्वारा एक जगह जमा किया जाता है. इसके साथ ही उत्पाद की प्रोसेसिंग एवं बाजार भाव पर जोर दिया जाता है.

5. सिंचाई : ड्रिप और स्प्रींक्लर्स के माध्यम से सिंचाई की जाती है, ताकि कम पानी में बेहतर उत्पादन हो सके. 2200 माइक्रो इरिगेशन यूनिट लगायी जा रही है. एक यूनिट में 25 एकड़ भूमि की सिंचाई की व्यवस्था होगी.

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जोहार से बढ़ रही चान्हो की चमक

राजधानी रांची के चान्हो प्रखंड में जोहार परियोजना के जरिये बदलाव दिखने लगा है. पूरे प्रखंड में सरहुल आजीविका फार्मर प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी के तहत 52 उत्पादक समूह हैं, जिनमें से 45 उत्पादक समूह उच्च मूल्य खेती का काम कर रहे हैं और सात उत्पादक समूह मत्स्य पालन से जुड़े हैं. इन 52 उत्पादक समूह से 2,285 सदस्य जुड़े हैं. प्रखंड के पांच गांवों में चल रहे उत्पादक समूह के माध्यम से अब तक 1104 मीट्रिक टन सब्जी राज्य के बाहर के बाजारों में भेजी जा चुकी है. बाजार जोहार परियोजना के तहत उपलब्ध कराया गया था. मत्स्य पालन में भी एक फसल पूरा हुआ है. दो क्विंटल मछली स्थानीय बाजार में उत्पादक समूह द्वारा बेची गयी है, जिससे महिलाओं को मुनाफा हुआ है.

केस स्टडी- 1
सम्मान, अधिकार और रोजगार मिला : शशिबाला मिश्रा
आजीविका महिला उत्पादक समूह मुख्य रूप से मत्स्य पालन करता है. उत्पादक समूह की अध्यक्ष शशिबाला मिश्रा ने बताया कि आस-पास के सात गांवों के सात समूह मत्स्य पालन करते हैं. इसमें 225 महिलाएं हैं. सभी समूह कुल 75 एकड़ जल क्षेत्र में मत्स्य पालन करते हैं. ओपा गांव के डैम के 20 एकड़ क्षेत्रफल को महिलाओं ने समिति बनाकर लीज पर लिया है. बड़ी मछली को 150 रुपये प्रतिकिलो और छोटी मछली को 130 रुपये प्रतिकिलो की दर से तालाब से ही बेच दिया गया. इससे महिलाओं को मुनाफा हुआ. कंपनी का शेयर होल्डर बनना महिलाओं के लिए गर्व की बात है.

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केस स्टडी- 2
पैसा, समय और मेहनत की बचत : संगीता देवी
चान्हो प्रखंड के पतरातू गांव में पतरातू आजीविका उत्पादक समूह का गठन किया गया है. यह समूह हाइवैल्यू एग्रीकल्चर का काम कर रही है. इस समूह में 68 सदस्य हैं. सभी सदस्यों को 30-30 डिसमिल जमीन खेती के लिए देना है. फिलहाल उत्पादक समूह की महिलाएं गांव में ही किसानों से सब्जी लेकर बाहर के बाजारों में भेज रही हैं. रोजाना लगभग डेढ़ से दो क्विंटल सब्जी महिलाएं गांव से बाहर भेज रही हैं. समूह की सक्रिय सदस्य संगीता देवी ने कहा कि बाजार की व्यवस्था होने से अब हमें अपने उत्पाद को बेचने में परेशानी नहीं हो रही है.

केस स्टडी- 3
उन्नत कृषि के लिए सिंचाई की व्यवस्था : गुंजरी देवी
महुआटोली आजीविका उत्पादक समूह की अध्यक्ष गुंजरी देवी बताती हैं कि जोहार परियोजना के तहत सिंचाई की सुविधा दी जा रही है. कुआं भी खोदा गया है. इस बार सब्जी का बिचड़ा तैयार करना था, लेकिन नगड़ी से बिचड़ा ऑर्डर किया गया है. 90 सदस्यों वाले आजीविका उत्पादक समूह से 45 किसानों ने टमाटर का बिचड़ा खरीदने के लिए ऑर्डर किया है, बाकी किसान खुद से बिचड़ा तैयार करेंगे.

गेम चेंजर साबित होगी जोहार परियोजना : बिपिन बिहारी

जोहार के परियोजना निदेशक बिपिन बिहारी ने कहा कि जोहार परियोजना झारखंड के लिए गेम चेंजर साबित होगी. भारत में इस तरह की यह पहली योजना है, जिसमें महिला किसानों की भागीदारी तय की गयी है. पिछले दो वर्षोंकी कार्य प्रगति से वर्ल्ड बैंक संतुष्ट है. इसके तहत आर्थिक, बौद्धिक और सामाजिक तौर पर महिला किसानों को मदद की जा रही है. परियोजना पूरा होने के बाद दो लाख चिह्नित लाभुक किसान झारखंड के 22 लाख किसानों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे.