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  • Apr 16 2018 3:51PM

परसाबेड़ा के साव टोला में आज भी नहीं बना शौचालय, खुले में शौच को मजबूर हैं ग्रामीण

परसाबेड़ा के साव टोला में आज भी नहीं बना शौचालय, खुले में शौच को मजबूर हैं ग्रामीण

 पंचायत : केदला दक्षिणी

प्रखंड : मांडू
जिला : रामगढ़
रवींद्र कुमार

खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) का अवार्ड ले चुके रामगढ़ जिले में आज भी ऐसी कई पंचायतें हैं, जहां शौचालय निर्माण का कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है. आज भी लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं. मांडू प्रखंड की केदला दक्षिणी पंचायत स्थित परसाबेड़ा का साव टोला भी इनमें से एक है. करीब 370 की आबादी वाले इस गांव में एक भी शौचालय नहीं है. गांव की महिलाएं, पुरुष व बच्चे सभी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं.

रैयती जमीन बता महिलाओं ने ध्वस्त किया शौचालय
सरकार के स्वच्छता अभियान के तहत यहां भी शौचालय बनाने का काम शुरू किया गया था. पहले चरण में 19 शौचालय बनाये जा रहे थे. शौचालय के लिए भवन बन कर लगभग तैयार हो चुका था. टंकी बनाने के लिए गड्डे खोदे भी जा रहे थे, तभी परसाबेड़ा मांझी टोला की महिलाओं ने उक्त जमीन को अपनी रैयती जमीन बताते हुए अधिकांश शौचालयों को तोड़ कर ध्वस्त कर दिया तथा शौचालय निर्माण कार्य को रोक दिया. साव टोला के ग्रामीणों द्वारा इसकी शिकायत पंचायत के मुखिया सहित संबंधित पदाधिकारियों से भी की गयी, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता ने नहीं लिया. इसके कारण यहां के लोगों का शौचालय आज तक नहीं बन पाया है.

गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव
सुविधाओं से वंचित परसाबेड़ा गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंची. यहां के ग्रामीण आज भी ढिबरी युग में जीने को विवश हैं. इस गांव में किसी के पास टीवी नहीं है. कुछ लोगों के पास मोबाइल है, लेकिन उसे चार्ज कराने के लिए इन्हें कॉलोनी जाना पड़ता है. आने-जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है. केदला नगर से जंगल होकर सात किलोमीटर व परसाबेड़ा मुख्य मार्ग से करीब चार किलोमीटर उबड़-खाबड़ मार्ग से गांव आना पड़ता है. गांव के अंदर चारपहिया वाहन नहीं आ सकता है. बीमार पड़ने पर खाट या बाइक से मरीजों को हॉस्पिटल ले जाना पड़ता है. गांव में पानी की निकासी के लिए नाली तक नहीं बनी है. गांव के अधिकांश बच्चे संसाधन की कमी व गरीबी के कारण उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पाते हैं. गांव में स्कूल नहीं है. वर्ष 2013-14 में एक आंगनबाड़ी केंद्र के लिए भवन बना, लेकिन वह आज तक चालू नहीं हुआ. गांव के कुछ बच्चे यहां से दूर परसाबेड़ा सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते हैं.

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जलसंकट से जूझते ग्रामीण
परसाबेड़ा के साव टोला में पेयजल की गंभीर समस्या है. इस टोले में एक भी कुआं नहीं है. दो चापाकल हैं. इनमें एक खराब है. इस कारण नहाने-धोने के लिए लोगों को पास की बंद खदान व बोकारो नदी जाना पड़ता है, हालांकि पंचायत जनप्रतिनिधियों की पहल पर टाटा स्टील की ग्रामीण विकास समिति द्वारा नल से पानी पहुंचाने का भरोसा दिया गया है.

क्या कहते हैं ग्रामीण
केदला दक्षिणी पंचायत के परसाबेड़ा साव टोला के ग्रामीणों ने बताया कि कोयला खदान के राष्ट्रीयकरण (सन 1973) से पूर्व जब यहां पोखरिया खदानें चलती थीं. उसी समय हमारे पूर्वज यहां रोजी-रोटी की तलाश में आये थे. कोयला खदानों में काम करते हुए यहीं घर बना कर बस गये. गरीबी के कारण वो यहां मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं.

जमीन विवाद के कारण शौचालय निर्माण का कार्य रूका : निर्मल महतो
केदला दक्षिणी पंचायत के मुखिया निर्मल महतो कहते हैं कि जमीन विवाद के कारण यहां शौचालय निर्माण का कार्य रूका हुआ है. शौचालय निर्माण का कार्य रोकने वाले परसाबेड़ा के ग्रामीणों से बात करने का प्रयास किया जा रहा है, हालांकि अभी तक सफलता नहीं मिली है. गांव में बिजली- पानी के लिए टाटा स्टील की ग्रामीण विकास समिति के पदाधिकारियों से बात कर गांव में बिजली-पानी देने का काम प्रगति पर है. गांव में नाली व सड़क निर्माण के लिए योजना बनायी गयी है.