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  • Dec 5 2018 1:25PM

खाने का ठिकाना नहीं, लेकिन बिजली बिल हजारों में

खाने का ठिकाना नहीं, लेकिन बिजली बिल हजारों में

नीलम कुमारी मिश्रा

प्रखंड: पांकी
जिला: पलामू

पलामू जिला अंतर्गत पांकी प्रखंड की नवडीहा पंचायत के बालुडीह गांव में बिजली है. वर्ष 2009 में इस गांव के लोगों को बिजली नसीब हुई. ग्रामीण कहते हैं कि गांव में बिजली आने का सपना पूरा हो गया, लेकिन बिजली का कोई ठिकाना नहीं रहता है. अपर्याप्त व अनियमित बिजली आपूर्ति से कोई विशेष फायदा नहीं है. काम के वक्त बिजली गायब रहती है.

रात 12 के बाद बिजली मिलने का कोई मतलब नहीं है. इसका एक नुकसान ये उठाना पड़ रहा है कि जेब ढीली जरूर हो रही है. दो वक्त की रोटी जिन्हें मयस्सर नहीं, उन्हें भी बिजली विभाग की ओर से हजारों का बिल दिया जा रहा है. आश्चर्य तो यह है कि इन गरीबों को इसकी जानकारी तक नहीं.

परेशानी बन गयी बिजली
पांकी प्रखंड मुख्यालय से साढ़े तीन किलोमीटर दूर है बालुडीह. इसके बाद भी विकास के आईने से काफी पिछड़ा गांव है. यहां गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले लोग हैं. आजीविका का मुख्य साधन खेती-बाड़ी है. वह भी पूरी तरह बारिश पर आधारित. बारिश हुई, तभी खेती संभव है. ऐसे में मेहनत मजदूरी से लोगों का गुजारा होता है. वर्ष 2009 में गांव में जब बिजली आयी, तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा. लगा सपना पूरा हो गया, लेकिन बिजली विभाग के पदाधिकारियों की मनमानी कहिए. आज यही बिजली परेशानी का कारण बन गयी है.

अनमीटर्ड बता कर ऐंठ रहा पैसे
बिजली विभाग की ओर से शुरू से ही घरों में बिजली का मीटर लगाया गया है. समय से बिजली का बिल भी उन्हें नहीं मिला. कुछ माह पूर्व बिजली विभाग द्वारा पुराना मीटर हटा कर नया मीटर लगाया जा रहा है. इसके बाद भी अनमीटर्ड बता कर उनसे बिल के नाम पर पैसे ऐंठे जा रहे हैं. भोले-भाले ग्रामीणों को भले ही पर्याप्त बिजली न मिली, लेकिन बिजली विभाग ने बिल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा.

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बिजली बिल हजारों में, भोले-भाले ग्रामीणों को भनक तक नहीं
दो वक्त की रोटी के लिए कड़ी मशक्कत करने वाले ग्रामीणों को तो पता भी नहीं कि उनके नाम पर हजारों का बिजली बिल बकाया है. ट्रांसफॉर्मर जलने से कई माह अंधेरे में भी ग्रामीण रहे, लेकिन शिकायत के बाद भी बिजली विभाग के कर्मचारियों की नींद नहीं खुलती. ग्रामीणों को पैसे खर्च कर ट्रांसफॉर्मर खुद ही लाने पड़ते हैं और बिजली में खरीबी आने पर ग्रामीण खुद खर्च कर मिस्त्री से बनवाते हैं, लेकिन बिजली विभाग बेफिक्र रहता है. हां, इस दौरान बिजली बिल जरूर बनता रहता है.

पेट की आग बुझाएं या डाल्टनगंज जाएं
बिजली विभाग के पदाधिकारियों से मुलाकात कर आग्रह करने या शिकायत करने के लिए भी ग्रामीणों को 50 किलोमीटर दूर डाल्टनगंज जाने की विवशता है. ऐसे में वे गरीब ग्रामीण पेट की आग बुझाने के लिए मेहनत-मजदूरी करें या इसे छोड़ कर शिकवा-शिकायत करने डाल्टनगंज जाएं. वहां जाने-आने का खर्च भी उनके बूते नहीं.

बिजली बिल के नाम पर भी फर्जीवाड़ा
ग्रामीण चौतरफा परेशान हैं. मनमाना बिजली बिल देने पर भी उनके साथ फर्जीवाड़ा किया जा रहा है. पुरानी पांकी स्थित बिजली बिल संग्रह केंद्र के कर्मचारी आनंद कुमार ने बिजली बिल में सरेआम फर्जीवाड़ा किया. डाल्टनगंज स्थित बिजली कार्यालय में इसकी शिकायत की गयी, लेकिन उनका जवाब चौंकाने वाला था. कार्रवाई करने की बजाय उन्होंने खुद ही निबट लेने को कहा. ग्रामीणों की अनभिज्ञता का फायदा उठाकर उनसे बिजली बिल के पैसे तो ले लिए जा रहे हैं, लेकिन पैसे जमा नहीं किये जा रहे हैं. फर्जी (जेरॉक्स) बिल देने के कारण उन्हें दोबारा पैसे का भुगतान करना पड़ रहा है.

फिक्स रेट देख चौंक जाएंगे
फिक्स रेट में बदलाव देख आप चौंक जायेंगे. 80 रुपये से लेकर 500 रुपये तक फिक्स रेट गांवों में तय किये गये हैं. इस कारण एक माह का बिल शहर से भी अधिक वसूले जा रहे हैं. बिजली विभाग की कार्रवाई से भयभीत कुछ ग्रामीण मजबूरन बिल चुकाने को बाध्य हैं.