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  • Jun 29 2019 11:37AM

न फसल बीमा की राशि मिली, न बीज

न फसल बीमा की राशि मिली, न बीज

अमरनाथ पोद्दार
जिला: देवघर 

संताल परगना में खरीफ फसल की खेती के लिए रोहन नक्षत्र को अनुकूल माना गया है. इस दौरान हुई हल्की बारिश के बाद देवघर के किसानों ने खेतों में धान का बिचड़ा डालना शुरू कर दिया है. रोहन नक्षत्र की बारिश से मिट्टी में नमी आ गयी है. किसानों ने अपने खेतों की जुताई कर मिट्टी को धूप में दो दिनों तक सूखने के लिए छोड़े जाने के बाद बिचड़ा डालना शुरू किया है. कृषि वैज्ञानिक डॉ पीके सिंह के मुताबिक संताल परगना की मिट्टी के लिए रोहन नक्षत्र में बारिश फायदेमंद है. खेतों में बिचड़ा डालने से पहले बीजोपचार जरूर करना चाहिए. बाजार से बीजोपचार की दवा बाविस्टिन खरीद कर एक लीटर पानी में मात्रा के हिसाब से डालें. इस पानी में धान का बिचड़ा डाल लें. कुछ देर बाद जो खराब धान है, वह पानी में तैरने लगेगा, तब उसे पानी से बाहर निकाल लेना चाहिए. बाकी नीचे बैठे हुए धान को सूती कपड़े में कुछ देर तक सूखने दें. उसके बाद इस बिचड़े की खेतों में बुआई करें. श्रीविधि से बिचड़ा बुआई करने से समय पर बिचड़ा तैयार होगा और उत्पादन बढ़ेगा.

जिले में नहीं है सरकारी अनुदानित बीज
सरकार से अनुदानित दर पर मिलनेवाला धान व मक्का का बीज अब तक देवघर जिले को प्राप्त नहीं हुआ है. किसानों को रोहन नक्षत्र में बाजार से महंगी दर पर धान का बीज खरीदना पड़ रहा है. पिछले वर्ष किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर बीज मिला था, लेकिन इस वर्ष समय रहते बीज नहीं मिलने के कारण बाजार से दोगुनी दर पर बीज खरीदना पड़ रहा है.

अब तक नहीं मिली फसल बीमा की राशि
सुखाड़ के बाद भी फसल बीमा की राशि नहीं मिली है. वर्ष 2018 में राज्य सरकार द्वारा देवघर जिले को सुखाड़ घोषित किये जाने के बाद भी जिले को फसल बीमा की राशि नहीं मिल पायी है. जिले भर में 60 हजार से अधिक किसानों ने फसल बीमा कराया है, लेकिन बीमा राशि अब तक नहीं मिल पायी है. बीमा राशि नहीं मिलने से किसानों को खरीफ फसल की खेती करने में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

कई किसानों ने शुरू की वैकल्पिक खेती, हो रहा है फायदा
मोहनपुर प्रखंड स्थित बांक पंचायत के सरसा गांव में कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये मूंग के बीज से किसानों ने 10 एकड़ में खेती की है. किसान दशरथ ठाकुर, जितेंद्र ठाकुर आदि ने बताया कि मूंग की खेती में कम पानी की जरूरत होती है. इस साल खेतों को परती रखने की बजाये मूंग की खेती की गयी है. यही कारण है कि पूरे खेत में मूंग की फसल लहलहा रही है.