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  • May 20 2019 4:37PM

दोलैचा पंचायत के हर घर में शौचालय से महिलाओं के खिल उठे चेहरे

दोलैचा पंचायत के हर घर में शौचालय से महिलाओं के खिल उठे चेहरे

पंचायतनामा टीम
प्रखंड: लापुंग
जिला : रांची 

राजधानी रांची से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है लापुंग प्रखंड. यह रांची जिले का सीमावर्ती प्रखंड है. इस प्रखंड की कई पंचायतों को वर्ष 2018 में ओडीएफ घोषित किया गया. दोलैचा पंचायत को भी वर्ष 2018 में ओडीएफ किया गया. पंचायत में कुल पांच राजस्व गांव हैं. इसकी आबादी करीब 10 हजार है. आदिवासी बहुल इस पंचायत में कृषि ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन है. मुखिया प्रकाश बारला बताते हैं कि लापुंग प्रखंड में सबसे देरी से शौचालय निर्माण का काम शुरू हुआ, लेकिन बहुत जल्द ही सभी घरों में शौचालय बन गये और पंचायत को ओडीएफ कर दिया गया. दोलैचा गांव के कुछ घरों में पहले से ही शौचालय था, जिसका वो खुद उपयोग करते थे. अधिकतर आबादी के पास शौचालय नहीं था, जिसके कारण गांव में काफी गंदगी फैली रहती थी. बारिश के मौसम मेें गांव की सड़कों पर चलना दूभर था, पर अब हालात बदल गये हैं

 

ग्रामीणों को जागरूक करने में हुई परेशानी
गांव में शौचालय तो बन गये पर उसके इस्तेमाल के लिए ग्रामीणों को जागरूक करना सबसे मुश्किल भरा काम था. पहले तो ग्रामीण शौचालय के इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं थे. कई बार ग्रामीणों को समझाया गया. शौचालय से होनेवाले लाभ के बारे में बताया गया. काफी मुश्किलों के बीच ग्रामीण इस्तेमाल करने के लिए तैयार हुए. घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया गया. स्कूली बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गयी. धीरे-धीरे ग्रामीणों को शौचालय का लाभ समझ में आया और महिलाओं ने सबसे पहले शौचालय का इस्तेमाल करना शुरू किया. अब सभी ग्रामीण शौचालय का इस्तेमाल कर रहे हैं. अब ग्रामीण खासकर महिलाओं का कहना है कि घर से बाहर शौच जाने की परेशानी से मुक्ति मिल गयी है. महिलाएं अब खुश हैं कि उन्हें शौच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता है.

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पहले भालू से लगता था डर : पिंकी देवी
दोलैचा पंचायत की पिंकी देवी कहती हैं कि साल 2018 में उनके गांव में शौचालय का निर्माण हुआ. पहले के दिनों को याद करते हुए पिंकी बताती हैं कि शौच के लिए पहले घर से बाहर जाना पड़ता था, जिसके कारण बहुत परेशानी होती थी. तबीयत खराब होने पर परेशानी और बढ़ जाती थी. खास पर गर्भवती महिलाओं के लिए समस्या बहुत गंभीर थी. बारिश के दिनों में सांप-बिच्छू का प्रकोप इलाके में अधिक होता है. इसके कारण डर भी बना रहता था. साथ ही जंगली क्षेत्र होने के कारण भालू भी गांव में आ जाते थे. इस कारण रात में अभी भी कोई घर से बाहर नहीं निकलता है. घर में शौचालय बन जाने के बाद यह सब समस्या दूर हो गयी है. अब किसी भी मौसम में परेशानी नहीं होती है और डर भी नहीं लगता है.

हम औरतों को मिला सम्मान : शनियारो देवी
शौचालय बने से कई फायदा मिलल. सबसे बड़ा फायदा तो इ होलक की औरत जाइत के इज्जत मिल गेलक, नहीं तो पहले राइत-अंधार बेरा घर से बाहर जाइक पड़त रहे. गांव की शनियारो देवी अधिक पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन शौचालय महिलाओं के लिए कितना जरूरी है, इसके महत्व को बखूबी समझती हैं. बताती हैं कि औरत को रात में अकेले में बाहर निकलना बहुत खतरनाक हो सकता है. रात में शौच करने जाने के लिए किसी पुरुष सदस्य को जागना पड़ता था. अब घर के पास शौचालय बन जाने से यह समस्या दूर हो गयी है. अब अच्छा लगता है कि गांव की गरीब महिलाओं को सम्मान से जीवन जीने का अधिकार मिल गया.

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गंदगी और बीमारी से मिली मुक्ति : प्रेरणा बारला
प्रेरणा बारला इंटर में पढ़ाई करती हैं. शौचालय नहीं होने का दर्द उनसे बेहतर कौन समझ सकता है. प्रेरणा बताती हैं कि पहले सर्दी, गर्मी या बारिश हर मौसम में सुबह चार बजे उठ कर शौच के लिए जाना पड़ता था. इसके कारण अच्छी तरह से नींद भी नहीं हो पाती थी. कभी रात में अगर पेट खराब हो गया, तो यह समस्या और बड़ी हो जाती थी. खुले में शौच करने के कारण आस-पास गंदगी होती थी और बीमारियां अलग से फैलती थीं. शौचालय मिल जाने से अब चिंता से मुक्ति मिल गयी है. अब सुबह उठने की हड़बड़ी नहीं होती है. अब हमारे घर के आस-पास गंदगी भी नहीं होती है. गांव की सड़कों पर अब बारिश के मौसम में चलने में परेशानी पहले की अपेक्षा अब काफी कम हो गयी है. इतना ही नहीं, बुजुर्गों को भी इससे काफी राहत मिली है.

महिलाओं को मिला फायदा : सुकुरमुनी कुमारी
दोलैचा गांव की इंटर की छात्रा सुकुरमुनी बताती हैं कि शौचालय का मिलना ग्रामीण युवतियों व महिलाओं के लिए वरदान की तरह है, क्योंकि गांव में अधिकतर गरीब परिवार रहते हैं, जो किसी तरह से अपना पेट भरते हैं. ऐसे में चाह कर भी वो अपनी बेटी-बहू के लिए शौचालय नहीं बना सकते हैं. अब घर में ही शौचालय मिल गया है. अब हमें रात में उठ कर बाहर नहीं जाना पड़ता है. हाथी भी गांव में आते हैं, जिसके कारण रात में घर से निकलने में डर लगता था. पहले शौच करने बाहर जाना बड़ी परेशानी का सबब था. घर से दूर और लोगों की नजरों से दूर ऐसी जगह जाना हर रोज सुरक्षित नहीं था, पर अब सब समस्या खत्म हो गयी है. सुकुरमुनी के चेहरे पर फैली संतुष्टि की मुस्कान पूरी कहानी बयां कर देती है.