ground zero

  • Apr 16 2019 5:47PM

नि:शुल्क गैस कनेक्शन ने ग्रामीण महिलाओं के चेहरे पर बिखेरी मुस्कान

नि:शुल्क गैस कनेक्शन ने ग्रामीण महिलाओं के चेहरे पर बिखेरी मुस्कान

पवन कुमार
जिला: रांची

पहिले 10 किलोमीटर दूर राड़हा पतरा से झूरी लानेक पड़त रहे, एक दिन काठी लानेक में दिनभर लाइग जात रहे और एको हफ्ता काठी नई चलत रहे, पर अब सब दिक्कत दूर होय गेलक. पहले सवाल का जवाब सिरांगो गांव की झुबली उरांव ने कुछ इस तरीके से दियासिरांगो गांव रांची जिला अंतर्गत कांके प्रखंड की मालश्रृंग पंचायत में स्थित हैआदिवासी बहुल इस गांव में 210 परिवार रहते हैंमुखिया झानो देवी के मुताबिकफिलहाल गांव में मात्र 20 घर ही ऐसे होंगेजहां गैस चूल्हा नहीं जलता है. 150से अधिक घरों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिल चुका हैबाकी लोग संपन्न हैंतो उन्होंने खुद से ही गैस कनेक्शन ले लिया है.

यह भी पढ़ें: पहाड़िया जनजाति बहुल सोनवा गांव को धुएं से मिली मुक्ति

गैस कनेक्शन मिलने से ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी में बदलाव आया है. पहले महिलाओं को लकड़ी खरीदनी पड़ती थी या फिर गांव से करीब 10 किलोमीटर दूर राड़हा जंगल में जाना पड़ता था. महिलाओं को लकड़ी लाने के लिए सुबह तीन बजे घर से निकलना पड़ता था और लकड़ी का गट्ठर उठाकर उतनी ही दूर पैदल चलना पड़ता था, पर अब जिंदगी आसान हो गयी है. पहले गांव में लोग लकड़ी की जरूरतों के लिए पेड़ काटते थे, पर अब पेड़ काटने की जरूरत नहीं पड़ती है.

केस स्टडी- 1
अब सुबह नाश्ता बनाने के लिए सोचना नहीं पड़ता है : सोनिया देवी
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ मिलने से सोनिया देवी काफी खुश हैं. बताती हैं कि पहले सुबह बच्चों के लिए नाश्ता बनाने में काफी परेशानी होती थी. समय भी काफी लगता था. लकड़ी जलने से निकलने वाले धुएं के कारण बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते थे, पर अब परेशानी खत्म हो गयी है. समय की बचत होती है और धुएं से भी राहत मिल रही है. घर साफ रहता है. घर की छत धुएं से काली नहीं होती है. कुल मिलाकर कहें, तो जिंदगी पहले से काफी बेहतर हो गयी है.

यह भी पढ़ें: महिलाओं के खिल उठे चेहरे

केस स्टडी- 2
बारिश के मौसम में परेशानी होती थी : सीमा देवी
सिरांगो गांव की सीमा देवी बताती हैं कि जब उनके पास गैस चूल्हा नहीं था, तो बारिश के दिनों ज्यादा परेशानी होती थी. जल्दी खाना बनाकर खेत में जाना पड़ता था, पर लकड़ी पूरी तरह से सूखी हुई नहीं होने के कारण जल्दी जलती भी नहीं थी. गैस कनेक्शन मिलने से अब बरसात के दिनों में खेतों में काम करने के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है. खर्च के बारे में बताते हुए सीमा बताती हैं कि गैस चूल्हा जलाने में लकड़ी से कम खर्च होता है.

केस स्टडी- 3
अब खाना बनाने पर बर्तन काला नहीं होता है : झुबली उरांव
झुबली उरांव कहती हैं कि अब चावल गैस चूल्हा में चढ़ाकर दूसरा काम कर सकते हैं. कोई मेहमान घर में आता है, तो तुरंत उनके लिए चाय-नाश्ता का इंतजाम हो जाता है. इतना ही नहीं, अब खाना बनाने में बर्तन काला नहीं होता है.

यह भी पढ़ें: गैस कनेक्शन से ग्रामीण महिलाओं की बदली जिंदगी

केस स्टडी- 4.
लकड़ी लाने के लिए दूर जाने से मिली मुक्ति : कतकी देवी
कतकी देवी ने बताया कि गैस कनेक्शन मिलने से जिंदगी काफी आसान हो गयी है. अब खुद के लिए भी समय मिल जाता है. पहले खाना बनाने में काफी समय लग जाता था, पर अब समय की बचत होती है. एक और फायदा हुआ कि अब भरी गर्मी में लकड़ी ढोकर नहीं लाना पड़ता है.

केस स्टडी- 5
घर साफ रहता है : हीरामनी देवी
हीरामनी देवी बताती हैं कि पहले रसोई घर में गोइठा और लकड़ी रखने के कारण घर गंदा रहता था. धुआं से रसोईघर काला दिखाई पड़ता था, लेकिन अब घर भी साफ रहता है. जल्दी-जल्दी खाना बनाकर काम में जाने में आसानी भी होती है. तीन से चार दिन मजदूरी करने से गैस भरने का पैसा भी जमा हो जाता है.