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  • Oct 17 2018 4:12PM

खेती कर खुशहाल हैं नेवदा टोली के किसान

खेती कर खुशहाल हैं नेवदा टोली के किसान

पंचायतनामा डेस्क
पंचायत: उमेडंडा
प्रखंड: बुढ़मू

राजधानी रांची से लगभग 50 किलोमीटर दूर रांची-पतरातू सीमावर्ती क्षेत्र में बसा गांव है उमेडंडा. बुढ़मू प्रखंड का यह कस्बा जंगलों से घिरा है. इसी गांव का एक टोला है नेवदा टोली. जो काफी ऊंचाई पर बसा हुआ है और अधिकांश खेत पहाड़ों की तराई में हैं. नेवदा टोली में 95 घर हैं. यहां के ग्रामीण खेती पर निर्भर हैं. तराई जमीन होने के कारण मकई यहां की प्रमुख फसल है. इसके अलावा गांव के लोग धान और सब्जियां भी उगाते हैं. नेवदा टोली से हर साल करीब 45 से 50 टन धान की बिक्री विभिन्न बाजारों में की जाती है. 15-20 टन मकई की बिक्री होती है. सभी किसान यहां की खूबसूरत वादियों में खेती-बारी करके खुशहाल जीवन जी रहे हैं

सब्जी उत्पादन शुरू होने से रुका पलायन
सेनापति किस्पोट्टा नेवदा टोली के जागरूक किसान हैं. खेती इनका पुश्तैनी पेशा है. पहले यहां के ग्रामीण सिर्फ धान और मकई की खेती करते थे. इसके बाद बाकी समय ग्रामीण अन्य कार्य के लिए गांव से बाहर चले जाते थे. इसी बीच सेनापति ने गांव में सब्जी की खेती की शुरुआत की. सेनापति के खेती-बारी को देख अन्य ग्रामीण भी प्रेरित हुए और वो भी सब्जी उत्पादन में जुट गये. इससे किसानों को लाभ होने लगा. इससे गांवों में पलायन भी रुक गया. इस गांव से लगभग हर रोज टमाटर, खीरा, धनिया पत्ता और फूलगोभी जैसी सब्जियां ट्रक के जरिये धनबाद, दुर्गापुर व आसनसोल के बाजारों में भेजी जाती हैं, जिससे किसानों को अच्छे दाम मिल जाते हैं. स्थानीय बाजारों में भी किसान अपनी सब्जियां बेचते हैं. इस बार की बारिश से सब्जियों की फसल को नुकसान हुआ है.

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ठगे जाते हैं किसान
सरकार धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है, लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है. कीटनाशक और बीज के मामले में भी किसानों को कई बार निराशा हाथ लगती है. जानकारी के अभाव में स्थानीय दुकानदार किसानों से कीटनाशक और बीज के दाम भी ज्यादा वसूलते हैं और सही सामान भी नहीं देते हैं.

दिल से करें खेती, रहेंगे हमेशा खुशहाल : सेनापति किस्पोट्टा
सेनापति किस्पोट्टा के पास साढ़े तीन एकड़ जमीन है, जिसमें वो धान और सब्जी की खेती करते हैं. फिलहाल ढाई एकड़ जमीन में फूलगोभी और ओल की सब्जी लगी हुई है. इसके अलावा पांच एकड़ जमीन लीज में लेकर भी वो खेती करते हैं. सेनापति बताते हैं कि हर सप्ताह वो 50-55 टोकरी फूलगोभी बाहर के बाजारों में भेजते हैं. खेती की कमाई से ही उन्होंने अपने तीन बेटियों को ग्रेजुएशन कराया है. एक बेटी पैथोलॉजी की पढ़ाई कर काम भी कर रही है. अभी एक बेटा और बेटी पढ़ रहे हैं. खेती-बारी से ही उन्होंने मोटरसाइकिल खरीदी और पक्का मकान बनाया. वह कहते हैं कि अगर दिल से खेती-बारी की जाये, तो हर किसान खुशहाल जीवन जी सकता है.