gound zero

  • Sep 18 2018 4:18PM

आज भी रस्सी बना कर जीवन गुजारने को विवश हैं बिरहोर

आज भी रस्सी बना कर जीवन गुजारने को विवश हैं बिरहोर

दीपक पांडेय

पंचायत : दुमदुमी
प्रखंड : तोपचांची
जिला : धनबाद 

धनबाद जिला अंतर्गत तोपचांची प्रखंड मुख्यालय से चार किलोमीटर दूर दुमदुमी पंचायत के चलकरी गांव में बिरहोर जनजाति के 47 परिवार रहते हैं. इनकी आबादी करीब डेढ़ सौ है. इनकी संख्या दिन--दिन घटती जा रही है. इनके कल्याण के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही हैं, इसके बावजूद बिरहोर परिवार संघर्ष करने पर विवश हैं.

उत्थान के लिए आज भी कर रहे संघर्ष
तोपचांची झील से सटी मखारो पहाड़ी की तलहटी में बसी बिरहोर जनजाति आज भी अपने उत्थान के लिए संघर्ष कर रही है. मूलभूत सुविधाओं से वंचित बिरहोर परिवार जंगल से लकड़ी चुनकर और चेहरलत्ता की छाल व सीमेंट की बोरी की रस्सी बना कर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं.

बिरहोर के उत्थान को लेकर प्रयासरत : विकास कुमार
डुमडुमी पंचायत के मुखिया विकास कुमार कहते हैं कि आदिम जनजाति बिरहोर परिवार को सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जानेवाली मूलभूत सुविधाएं प्रदान की गयी हैं, हालांकि चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराये जाने की जरूरत है.

नशा पर रोक के लिए जागरूकता अभियान : विजय कुमार
प्रखंड विकास पदाधिकारी विजय कुमार कहते हैं कि सामाजिक दंड बिरहोर परिवार की सभ्यता व संस्कृति से जुड़ा है. इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता. शराब प्रथा की रोकथाम के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. सफलता भी प्राप्त हुई है. बिरहोर परिवार के मुखिया व कई महिलाएं शराब का सेवन न के बराबर करते हैं.

अपराध की प्रकृति पर सजा का निर्धारण : बड़ा शूकर
बिरहोर समुदाय के प्रमुख बड़ा शूकर कहते हैं कि बिरहोर समुदाय के नियमों से वर्षों से शांति और स्थिरता बनाये रखने में मदद मिली है. अपराध की प्रकृति के आधार पर व्यक्ति को सजा सुनायी जाती है. अगर एक व्यक्ति झगड़े का दोषी पाया जाता है, तो उसे चावल, खस्सी व हड़िया का जुर्माना भरना पड़ता है.