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  • Jul 5 2019 4:29PM

डाकिया योजना का कमाल, बिरहोर परिवारों को घर पर मिलता अनाज

डाकिया योजना का कमाल, बिरहोर परिवारों को घर पर मिलता अनाज

रवींद्र यादव

प्रखंड: नोवामुंडी

जिला: पश्चिमी सिंहभूम

पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत नोवामुंडी प्रखंड स्थित टाटिबा के बिरहोर परिवारों में सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से चेहरे पर खुशी दिखने लगी है. बदलते सामाजिक परिवेश में रहन-सहन व साफ-सफाई पर वे विशेष जोर देने लगे हैं. जैसे-जैसे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता जा रहा है, वैसे-वैसे उनकी आर्थिक स्थिति बदलती जा रही है. पीवीटीजी डाकिया योजना के अंतर्गत हर परिवार को 35 किलोग्राम चावल दिया जा रहा है. आदिम जनजाति बिरहोर के बच्चों को आवासीय विद्यालयों में सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है. खास कर 33 बच्चियों को सरकारी विद्यालयों में निःशुल्क नामांकन कर गुणात्मक शिक्षा दी जा रही है. टाटिबा गांव में 90 बिरहोर परिवार रहते हैं. आबादी 317 है. सभी परिवारों को बिरसा आवास योजना के तहत पक्का घर मिला है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 40 परिवारों को नि:शुल्क गैस सिलिंडर व चूल्हा मिला है. शेष 50 परिवारों को जल्द ही गैस कनेक्शन देने की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है

दो बच्चे आइटीआइ पास, निजी खदान में कर रहे नौकरी
टाटिबा के आइटीआइ पास दशरथ बिरहोर व विष्णु बिरहोर टाटिबा स्थित एक निजी लौह अयस्क खदान में नौकरी कर रहे हैं. साथ ही दोनों नोवामुंडी कॉलेज में पढ़ाई भी कर रहे हैं. अभिभावक जागरूक हैं. वे अपने छोटे-छोटे बच्चों को आंगनबाड़ी व स्कूल भेजते हैं

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सोलर आधारित दो डीप बोरिंग की सुविधा
बिरहोर बस्ती में पेयजलापूर्ति की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है, ताकि पेयजल को लेकर इन्हें दिक्कत नहीं हो. यहां सोलर आधारित दो डीप बोरिंग है.

वनोपज बना आर्थिक आधार
आज भी बिरहोर परिवार जंगलों पर आश्रित हैं. सूखी लकड़ी, महुआ, करंज व सरजोम समेत अन्य वृक्षों के फल चुन कर बीज निकालते हैं और बाजार में बिक्री कर अपना घर-परिवार चलाते हैं. बिरहोर महिलाएं कहती हैं कि सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए वनोपज आधारित कुटीर उद्योग के तौर पर प्रोसेसिंग यूनिट लगाये, ताकि महिलाओं को रोजगार मिल सके.

केस स्टडी-1
घर बैठे मिलता है चावल : पिंकी बिरहोर
पिंकी बिरहोर कहती हैं कि उज्ज्वला योजना ने उनके जीवन में भी उजाला ला दिया. डाकिया योजना से जहां 35 किलोग्राम चावल घर बैठे मिल जाता है, वहीं गैस चूल्हा मिलने से अब लकड़ी खोजने के लिए जंगल नहीं जाना पड़ता है. कहती हैं कि महिला सशक्तीकरण पर सरकार अधिक ध्यान दे, तो महिलाओं की स्थिति अच्छी हो सकती है.

केस स्टडी-2
पहले घर में खाना बनाने को सोचना पड़ता था : रोयबारी बिरहोर
रोयबारी बिरहोर कहती हैं कि पहले घर में खाना बनाने के लिए सोचना पड़ता था. कंद-मूल खाकर रहना पड़ता था. रोजगार नहीं रहने के कारण आर्थिक स्थिति भी खराब रहती है, लेकिन अब डाकिया योजना के माध्यम से घर में अनाज पहुंचता है. नि:शुल्क गैस चूल्हा मिलने से खाना बनाना आसान हुआ है. लोगों को भरपेट भोजन नसीब हो रहा है.

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केस स्टडी-3
डाकिया योजना ने भोजन उपलब्ध कराया : सरोती बिरहोर
सरोती बिरहोर कहती हैं कि सरकार बिरहोर के विकास के लिए अधिक ध्यान दे. इससे बिरहोर की स्थिति भी सुधरेगी और क्षेत्र का विकास भी होगा. इसके अलावा संसाधन आधारित रोजगार सृजित करने की जरूरत है. डाकिया योजना ने बिरहोर परिवार को भोजन उपलब्ध कराया. इसी तरह अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी सरकार ख्याल रखे, तो हमारी स्थिति बेहतर हो जायेगी.

बिरहोर परिवारों को स्वरोजगार का प्रशिक्षण मिलेगा : बीडीओ
नोवामुंडी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी समरेश प्रसाद भंडारी ने कहा कि टाटिबा के बिरहोर परिवारों को खास कर महिलाएं को स्वरोजगार के माध्यम से वनोपज पर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की पहल की जायेगी. इसके लिए वरीय पदाधिकारियों को पत्राचार किया जायेगा. इसके अलावा स्वरोजगार सृृजन के पहले बिरहोर परिवारों को रोजगार परक प्रशिक्षण दिलाया जायेगा.