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  • Oct 2 2018 10:07AM

टाना भगतों के जीवन में स्वच्छता सर्वोपरि, तन-मन को साफ रखना उनका मूलमंत्र

टाना भगतों के जीवन में स्वच्छता सर्वोपरि, तन-मन को साफ रखना उनका मूलमंत्र

पवन कुमार

पंचायत : सुपा-वन
प्रखंड : भरनो
जिला : गुमला

रांची-गुमला जिले की सीमा पर स्थित है भरनो प्रखंड की सुपा-वन पंचायत. इस पंचायत के कई गांवों में टाना भगत के कई परिवार रहते हैं. सुकुरहुट्टू, सुपा अंबाटोली, सुपा पतराटोली और जतरीटोली में टाना भगत रहते हैं. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अनुयायी टाना भगत के जीवन में स्वच्छता सर्वोपरि है. तन और मन को साफ रखना उनका मूलमंत्र है. इसके लिए टाना भगत कई विशेष नियमों का पालन भी करते हैं. टाना भगत बेहद ही सादा जीवन जीते हैं और साफ रहना पसंद करते हैं. प्रकृति के करीब रहना इन्हें पसंद है. ये बहुत ईमानदार होते हैं. इनके लोकगीतों में भी स्वच्छता का पुट छिपा होता है. सुपा-वन पंचायत के सभी टाना भगत खेती-बारी करते हैं. कुछ परिवार पढ़े-लिखे हैं और वो दूसरे जगहों पर रहते हैं. इस पंचायत के सभी टाना भगत परिवारों का खपरैल मकान है, लेकिन घर और आंगन बिल्कुल साफ रहता है. सरकारी सुविधाओं का अभाव, समाज में आधुनिकता का प्रवेश और बदलते समय ने इनकी जीवन शैली को प्रभावित किया है.

हर रोज होती है घर की सफाई
टाना भगत परिवारों में हर रोज घर की सफाई और लीपाई-पुताई दिनचर्या में शामिल है. घर की महिलाएं हर दिन गोबर से घर को लीपती हैं. इसके साथ ही घर के आस-पास भी साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है. हर दिन सुबह और शाम का खाना बनाने से पहले चूल्हा को लीपा जाता है. बिना चूल्हा लीपे खाना नहीं बनता है. इसके बाद तांबे वाले बर्तन में पानी लिया जाता है. उस पानी में तुलसी, अरवा चावल, दूबी घांस, हल्दी, आम का पत्ता और दूध डाला जाता है. फिर उस पानी को पूरे घर में छिड़का जाता है और चूल्हा में छिड़क कर उसे पवित्र किया जाता है. कई टाना भगत इस पानी को नहाने के पानी में मिला कर नहाते भी हैं. इस नियम को तांबा-तुलसी नियम कहा जाता है. यह प्रक्रिया टाना भगतों की दिनचर्या में शामिल है.

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घर में बकरी और मुर्गी नहीं पालते हैं
टाना भगत स्वच्छता को लेकर इतने सजग रहते हैं कि वो अपने घरों में मुर्गी और बकरी नहीं पालते हैं. उनके मुताबिक, मुर्गी व बकरी घरों को गंदा करती है. इसके पीछे उनकी एक और वजह है कि वो शुद्ध शाकाहारी होते हैं और जीव हत्या को पाप समझते हैं. उनका मानना है कि बकरी और मुर्गी को पालने के बाद उन्हें उसे बेचना पड़ेगा, जो बाद में मारे जायेंगे. खेती-बारी करने के लिए गाय-बैल पालते हैं, लेकिन अब अधिकतर टाना भगत जुताई के लिए ट्रैक्टर का इस्तेमाल करते हैं.

बाहर के खाने से परहेज करते टाना भगत
टाना भगत घर के बाहर का खाना नहीं खाते हैं. अगर वो लंबी दूरी पर जाते हैं, तो सिर्फ फल खाकर रहते हैं या खुद से खाना बनाते हैं. उनका मानना है कि बाहर का खाना संक्रमित भी हो सकता है. इसलिए वो खुद से साफ-सफाई बरतते हुए खाना बनाते हैं. टाना भगत परिवारों में डायरिया की शिकायतें बहुत कम आती हैं.

शौचालय का नहीं मिला लाभ : पुनय उरांव टाना भगत
सुपा अम्बाटोली के पुनय उरांव टाना भगत बताते हैं कि हर रोज उनके घर में तांबा तुलसी का नियम होता है. बिना नहाये घर में वो खाना नहीं खाते हैं. स्वच्छता के पूरे नियमों को अपनाते हैं, लेकिन शौचालय नहीं मिला है, जिसका आज भी उनको मलाल है. घर में शौचालय नहीं होने से खुले में शौच को विवश हैं.

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तन व मन दोनों साफ रखना बहुत जरूरी : सिंघा टाना भगत
सिंघा टाना भगत बताते हैं कि हम महात्मा गांधी के अनुयायी हैं. हमें स्वच्छता का पाठ पढ़ाया गया है. हम उनका पालन करते हैं. 60 वर्षीय सिंघा टाना भगत कहते हैं कि सर्दी, गर्मी या बरसात किसी भी मौसम में बिना नहाये वो खाना नहीं खाते हैं. तन व मन दोनों साफ रखना बहुत जरूरी है और टाना भगत इसे बखूबी निभाते हैं.

घर से मिली स्वच्छता की सीख : संजय टाना भगत
मध्य विद्यालय, सुकुरहुट्टू में आठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे संजय टाना भगत ने कहा कि घर से स्वच्छता की सीख मिलती है. हमेशा साफ रहते हैं. हर रोज नहाना उनकी दिनचर्या में शामिल है. बाहर का कुछ भी खाना नहीं खाते हैं. वो स्कूल में मिड डे मिल भी नहीं खाते हैं.

सफाई ही टाना भगत का धर्म है : गजेंद्र टाना भगत
सुकुरहुट्टू गांव के गजेंद्र टाना भगत बताते हैं कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, हमें स्वच्छता के नियमों का हमेशा पालन करना पड़ता है. हम अपने घर और खुद को साफ रखते हैं. प्रकृति के बीच में रहकर प्रकृति को साफ रखना ही हमारा उद्देश्य है, ताकि हम अपनी आनेवाली पीढ़ी तक अपनी स्वच्छता के मूलमंत्र को पहुंचा सकें.

नशा और मांस से रहते हैं दूर : लदुआ टाना भगत
जतरीटोली के लदुआ टाना भगत बताते हैं कि हम नशा नहीं करते हैं, क्योंकि नशा करने से हमारा शरीर स्वस्थ और स्वच्छ नहीं रहेगा. मांस भी नहीं खाते हैं, क्योंकि इससे भी संक्रमण का खतरा होता है. जतरीटोली में लगभग टाना भगत के 50 परिवार हैं और सभी साफ-सुथरा रहते हैं. इसके साथ ही अपने आस-पास के लोगों को स्वच्छता का संदेश देते हैं.