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  • Mar 18 2019 5:33PM

गैस, अस्थमा के साथ हड्डी जोड़ में आता काम

गैस, अस्थमा के साथ हड्डी जोड़ में आता काम

निरभ किशोर
जिला: गोड्डा

गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी व बोआरीजोर प्रखंड में जड़ी-बूटियों का खजाना है. यहां का चिरौता तो आदिवासियों के दो वक्त की रोटी के जुगाड़ का साधन भी है, जिसे शहर व हाट-बाजार में बेच कर इन्हें दो पैसे मिल जाते हैं. खासतौर पर राजमहल की पहाड़ियों से जुड़ा यह इलाका आयुर्वेदिक प्लांट का सबसे बड़ा केंद्र है. कई वैज्ञानिकों की खोज का प्रमुख केंद्र भी यह क्षेत्र रहा है, हालांकि इन दिनों इन क्षेत्रों में औषधीय पौधों पर माफियाओं की नजर के कारण धीरे धीरे यह विलुप्त होता जा रहा है. इस मामले में वन विभाग का रवैया भी उदासीन रहा है. ऐसी स्थिति में हाल के एक वर्ष में गोड्डा के साथ-साथ पूरे झारखंड, बिहार व नॉर्थ इस्ट के लिए बायोडायवर्सिटी पार्क में औषधीय पौधों को लगाकर लुप्त होती औषधीय पौधों को संरक्षित करने का काम किया गया है. एक माह पहले गोड्डा सदर अस्पताल में आयुर्वेदिक वाटिका विकसित की गयी है

बायोडायवर्सिटी में हैं औषधीय पौधे
बायोडायवर्सिटी व आयुर्वेदिक वाटिका में मुख्य रूप से काली तुलसी, सफेद तुलसी, चिरौता, हड़जोड़ा, लेमन ग्रास, शतावरी, अश्वगंधा, कोरफाड, सर्पगंधा, धृतकुमारी, हल्दी, सदाफुली, गुलबख्शी, रीठा, भुई एलोना, सब्जा, गोडमार, गुलबेल, अमरलता, मोगली इरंड, जमालगौटा, हाजमा, अदूलसा, कंदबेल, पुत्ररंजिवा, सफेद मूसली, बेल, कपूर तुलसी, द्रोणपुष्पी, लाजवंती, टीटभांट आदि औषधीय पौधे हैं.

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इन रोगों में मिलता है लाभ
ऐसे औषधीय पौधे, जो खेती के दृष्टिकोण से लगाये गये हैं, उसमें रक्त की शुद्धता, कफ, बुखार, चर्म संबंधी रोग, बीमारी, हड्डी जोड़ने, नर्वस सिस्टम को ठीक करने, अस्थमा, पेट के कीड़े-मकोड़े मारने, लीवर टॉनिक, कब्ज से छुटकारा दिलाने के लिए, बीपी संबंधी बीमारी, कैंसर, शारीरिक दुर्बलता, पौरुष जागृति, जॉन्डिस, डायबिटीज, जोड़ों के दर्द आदि के लिए ये औषधीय पौधे बेहतर माने जाते हैं.

औषधीय पौधे की जानकारी जरूरी : नीतेश कुमार बंटी
युवा किसान नीतेश कुमार बंटी कहते हैं कि गोड्डा सदर अस्पताल में 26 प्रकार के औषधीय पौधे लगाये गये हैं. उन्होंने खुद भी औषधीय पौधों की खेती शुरू की है. औषधीय पौधों की जानकारी जरूरी है.

औषधीय पौधों के प्रचार-प्रचार पर जोर हो : भारती
भारती बताते हैं यहां औषधीय पौधों की खेती से लोग बेहतर कमाई कर सकते हैं, लेकिन इस ओर सरकार का ध्यान नहीं है. प्रशिक्षण का भी अभाव है. प्रचार-प्रसार हो, तो किसानों को लाभ मिलेगा.