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  • Jul 17 2018 12:23PM

महिला सशक्तीकरण की मिसाल हैं आशा जायसवाल

महिला सशक्तीकरण की मिसाल हैं आशा जायसवाल

 दशमत सोरेन 

पंचायत : उत्तरी घाघीडीह
प्रखंड : जमशेदपुर
जिला : पूर्वी सिंहभूम

पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत जमशेदपुर प्रखंड की उत्तरी घाघीडीह पंचायत की पंचायत समिति सदस्य आशा जायसवाल महिला सशक्तीकरण की मिसाल हैं. उन्होंने अपनी मेहनत और आत्मबल से न सिर्फ अपने घर की हालत बदली, बल्कि समाज को एक नयी दिशा भी दी. आर्थिक रूप से कमजोर आशा अपनी कार्यकुशलता की वजह से पंचायत समिति सदस्य बनीं. उन्होंने बागबेड़ा-हरहरगुट्टू क्षेत्र की करीब दो सौ महिलाओं को आर्थिक रूप से सबल बनाया है. महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़ कर उन्होंने स्वरोजगार के गुर सिखाये. अब महिलाएं गृहस्थी की गाड़ी खींचने में अपने पति की मदद कर रही हैं. यही नहीं अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में भी पढ़ा रही हैं. आशा के प्रयास से महिलाएं आठ से 10 हजार रुपये मासिक आमदनी कर रही हैं.

पंचायत प्रतिनिधि के रूप में बनायीं अलग पहचान
पंचायत समिति सदस्यों को अपनी पंचायत में विकास कार्य करने के लिए कोई फंड नहीं है. इसके बावजूद आशा जायसवाल ने क्षेत्र की जनता को निराश नहीं किया. जिला, प्रखंड व पंचायत के प्रतिनिधियों से मिल कर वे विकास का कार्य करा रही हैं. उन्होंने विकास कार्य के लिए कभी भी फंड के अभाव का रोना नहीं रोया. गर्मी में पानी की व्यवस्था करनी हो या फिर बरसात में नाले की सफाई. हर कार्य वह आसानी से करा लेती हैं.

बैंक ऑफ बड़ौदा का ग्राहक सेवा केंद्र खोला
पंचायत समिति सदस्य आशा जायसवाल की ओर से हरहरगुट्टू बाजार के पास बैंक ऑफ बड़ौदा के सहयोग से ग्राहक सेवा केंद्र खोला गया है. यहां बैंकिंग से जुड़े सभी कार्य किये जाते हैं. खाता खोलने से लेकर रुपये जमा करने व निकासी करने का काम होता है. सबसे बड़ी खासियत है कि यदि किसी बुजुर्ग का बैंक खाता अन्य बैंक में हो, तो भी वे ग्राहक सेवा केंद्र से आसानी से रुपये की निकासी कर सकते हैं. 72 बैंकों के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा का टाइअप है. बैंकिंग का सारा कामकाज वह खुद संभालती हैं. इस कार्य में उनके पति संतोष जायसवाल भी उनका सहयोग करते हैं.

एक अच्छी मां का दायित्व भी निभा रहीं आशा
आशा एक जनप्रतिनिधि व सामाजिक दायित्व का निर्वहन करने के साथ-साथ अपना गृहस्थ जीवन भी संभाल रही हैं. वह अपने बेटे व बेटी को पढ़ने-लिखने को लेकर उचित मार्गदर्शन करती हैं. वे अपने 18 वर्षीय पुत्र ऋषभ जायसवाल को कोलकाता के एक इंस्टीट्यूट से सीए की तैयारी करवा रही हैं, वहीं बेटी श्रेया जायसवाल कदमा के एक निजी स्कूल में पढ़ती है.

एनजीओ से महिलाओं को जोड़ कर दे रहीं रोजगार
आशा जायसवाल शिक्षित व अशिक्षित महिलाओं को राष्ट्रीय महिला उत्थान समिति से जोड़ रही हैं. समिति की ओर से उन्हें सिलाई-कढ़ाई, पत्तल, मोमबत्ती, अगरबत्ती, ठोंगा, नैपकिन समेत अन्य घरेलू चीजों को बनाने की ट्रेनिंग दिला कर स्वरोजगार से जोड़ रही हैं. इससे महिलाओं को घर बैठे अच्छी आमदनी हो रही है.

प्राकृतिक आपदा के शिकार लोगों की थी मदद
उतराखंड में आयी प्राकृतिक आपदा के शिकार लोगों को सहयोग के लिए आशा जायसवाल व उनकी टीम ने अभियान चलाकर 50 हजार की राशि जमा की थी. उक्त राशि को पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त के जरिये राहत कोष में जमा कराया गया था.

अबला नहीं, सबला हैं महिलाएं : आशा जायसवाल
पंचायत समिति सदस्य आशा जायसवाल बताती हैं कि महिला सशक्तीकरण को लेकर पूरा देश चिंतित है. ऐसे में महिलाओं को आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए. वह शिक्षित-अशिक्षित महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश कर रही हैं.