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  • Nov 8 2019 3:58PM

समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं ममता

समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं ममता

सुपर्णा पाल

प्रखंड: नाला

जिला: जामताड़ा 

जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड अंतर्गत कुलडंगाल की ममता देवी की जिंदगी अब धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है. वह अपने पति और दो बच्चों के साथ खुशहाल जीवन जी रही हैं. समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में यह बदलाव आया है. पहले स्थिति ऐसी नहीं थी. दरअसल ममता मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ी थीं. उनके पिताजी किसी तरह उनकी जरूरतों को पूरा कर पाते थे. इस तरह से उनकी जिंदगी तंगहाली में गुजरी थी. इसके बाद 18 वर्ष की उम्र में उनकी शादी शांत कुमार पाल से हो गयी. शांत भी मध्यमवर्गीय परिवार से थे. अच्छी पढ़ाई-लिखाई नहीं होने के कारण बेरोजगार थे. पति की बेरोजगारी के कारण दोनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. जिंदगी आगे बढ़ रही थी. शादी के दो साल बाद उन दोनों को एक बेटी हुई. बेटी होने के बाद उनका खर्च और बढ़ गया. इसके बाद शांत कुमार पाल छोटा-मोटा काम करने लगे. उससे घर का खर्च चलाना मुश्किल था. इसके तीन साल बाद दोनों को एक और बेटा हुआ. बेटा होने के बाद खर्च और बढ़ गया. इसके कारण घर में कलह की स्थिति उत्पन्न होने लगी. पैसे की कमी के कारण घर में झगड़े होने लगे. इस बीच ममता को जेएसएलपीएस द्वारा संचालित महिला समूह की जानकारी मिली. उनके गांव में सीआरपी दीदियां आयी थीं, जो गांव में समूह का गठन करा रही थीं. ममता भी जय गणेश आजीविका सखी मंडल से जुड़ गयीं और समूह में बुक कीपर का काम करने लगीं. समूह से जुड़ने के कारण ममता को घर से काफी ताने सुनने पड़े. यहां तक कि उन्हें समूह छोड़ने का दबाव दिया जाने लगा. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और समूह से जुड़ी रहीं. इसके बाद उन्होंने समूह से लोन लेकर सब्जी बेचने का काम शुरू किया. इससे उनकी आर्थिक स्थिति में थोड़ा सुधार आया. फिर उन्होंने एक और लोन लिया और अपनी दुकान खोल ली, जिसमें चाय और नाश्ता का सामान बेचने लगीं. दुकान में बिक्री अच्छी होने लगी. तब ममता के पति भी दुकान में हाथ बंटाने लगे. अच्छी आय होने के बाद अब ममता के दोनों बच्चे स्कूल जा रहे हैं. समूह की मदद से उनकी बेटी को सुकन्या योजना का लाभ भी मिल रहा है. इस तरह से दोनों अब खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं.