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  • Aug 30 2019 11:50AM

बैंक सखी बनकर बनायी खुद की पहचान

बैंक सखी बनकर बनायी खुद की पहचान

अंजुम बानो

प्रखंड: चितरपुर

जिला: रामगढ़

रामगढ़ जिले के चितरपुर अंतर्गत उत्तरी चितरपुर गांव की रहने वाली बिजली दीदी बैंक सखी बनकर आज खुद की पहचान बना चुकी हैं और समूह की दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रही हैं. सभी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वो मेहनत कर रही हैं. बिजली दीदी बताती हैं कि जब वो समूह से नहीं जुड़ी थीं उस वक्त उनका खुद का कोई अस्तित्व नहीं था. परिवार में गरीबी थी. पति सनी रजक पानी टंकी में काम करते हैं, लेकिन समय से मानदेय नहीं मिलता है. घर में दो बेटियां, एक भाई और मां हैं.

पैसों की कमी के कारण घर चलाना मुश्किल हो रहा था. इस बीच वर्ष 2016 में जब जेएसएलपीएस द्वारा महिला समूह का गठन किया गया, तो बिजली दीदी सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़ गयीं. समूह से जुड़ने के बाद उनका चयन पुस्तक संचालक के तौर पर किया गया. जब चितरपुर कलस्टर में बैंक सखी का चुनाव हुआ, तब बिजली दीदी का चयन बैंक सखी के तौर पर किया गया. वो बैंक ऑफ इंडिया चितरपुर शाखा में बैंक सखी का काम करने लगीं. बैंक सखी के तौर पर बिजली दीदी समूह से जुड़ी महिलाओं का खाता खोलने काम करती हैं. इसके अलावा ग्रामीणों को अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा और पर्सनल खाता भी खुलवाने का काम करती हैं.

इसके अलावा सभी महिलाओं को जागरूक भी करती है. बैंक सखी के तौर पर उनको 3000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है. जिससे वो अपने बच्चों का भरण-पोषण अच्छे तरीके से कर रही हैं. सखी मंडल की महिलाएं कहती हैं कि बिजली दीदी के बैंक सखी बन जाने के बाद से उन्हें बैंक के काम काज में बहुत आसानी हुई है. अब वो चाहती हैं कि चप्पल बनाने की मशीन खरीद कर अपने ग्राम संगठन से जुड़ें.

समूह की दीदियों को एक रोजगार से जोड़ें, ताकि उनके साथ-साथ दूसरी महिलाएं भी आर्थिक तौर पर मजबूत हो सकें. इसके लिए उन्होंने क्लस्टर संगठन से 70,000 रुपये का लोन भी लिया है. ऋण दिया गया है. अपनी सफलता के लिए वो जेएसएलपीएस को धन्यवाद देती हैं और कहती हैं कि जेएसएलपीएस से उन्हें नयी पहचान मिली है.