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  • Oct 1 2018 12:57PM

टारगेट तय कर सफलता पाने का जुनून होना चाहिए

टारगेट तय कर सफलता पाने का जुनून होना चाहिए

 विजय बहादुर

vijay@prabhatkhabar.in

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पंकज रजक. हॉकी का उभरता हुआ सितारा. इस सितारे से जब आप मिलिएगा, तो उसकी आंखें बहुत कुछ बोलती हैं. उसकी आंखों में केवल सपने ही नहीं हैं. हौसले भी हैं. मंजिल तय करने की तमन्ना है. फासलों को पाटने का जुनून है. एक लाइन में कहें, तो वह सब कुछ है, जो किसी इंसान में कोई भी बाधा पार करने के लिए होना चाहिए.
हॉकी की दुनिया के इस चमकते सितारे पंकज को कई बार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट गोलकीपर का अवार्ड मिल चुका है. फिलहाल पंकज एनआइओएस से 12वीं की पढ़ाई के साथ राउरकेला में सेल हॉकी एकेडमी में प्रशिक्षण ले रहा है. हुरहुरू (पतरातू) में जन्मे पंकज ने दसवीं तक की पढ़ाई संत रॉबर्ट बालक विद्यालय, सिंदूर से की है. वर्ष 2012 में दसवीं में पढ़ते हुए उसे स्कूल की तरफ से अंडर स्कूल हॉकी नेशनल टूर्नामेंट खेलने का अवसर मिला. इसके बाद पंकज ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. एक के बाद एक उपलब्धियां उसके खाते में जुड़ती चली गयीं.

वर्ष 2012 में अंडर स्कूल नेशनल टूर्नामेंट खेलने के बाद पंकज ने कोच कोलेश्वर गोप की सलाह पर साई, रांची के चयन प्रतियोगिता में भाग लिया. उसका चयन साई, रांची के लिए हो गया. यहां उसने 2014 तक प्रशिक्षण प्राप्त किया. इसी दौरान सेल हॉकी एकेडमी, राउरकेला में उसका चयन हो गया. फिलहाल उसका प्रशिक्षण राउरकेला सेल हॉकी एकेडमी में ही चल रहा है.

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हॉकी के प्रति गजब का जुनून
पढ़ाई के साथ-साथ हॉकी के मैदान में भी पंकज ने जम कर पसीना बहाया. पंकज की प्रतिभा इस खेल में तेजी से उभरी. हजारीबाग जिला हॉकी टीम से सफर शुरू कर झारखंड हॉकी, जूनियर इंडिया और फिर सीनियर टीम तक जगह बनाने में वह कामयाब हुआ.

आठवें जोहोर कप टूर्नामेेंट में हुआ चयन
मलेशिया में 06 से 13 अक्तूबर, 2018 तक आठवें सुल्तान ऑफ जोहोर कप टूर्नामेंट आयोजन होगा. इस टूर्नामेंट में भारत जूनियर पुरुष टीम में पकंज रजक का गोलकीपर के रूप में चयन हुआ है. इसमें मेजबान टीम मलेशिया के अलावा न्यूजीलैंड, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के खिलाफ भारतीय टीम पांच राउंड रोबिन मैच खेलेगी.

दुनिया कर लो मुट्ठी में
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जुलाई, 2015 को पंकज का चयन भारतीय जूनियर हॉकी टीम में हुआ, जहां से उन्हें भारतीय जूनियर टीम के साथ हॉलैंड में गोलगे नेशनल अंडर 21 में खेलने का मौका मिला. इसके अलावा अर्जेंटीना, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, इंग्लैंड और हॉलैंड में आयोजित नेशनल वाल्वो कप में भी मैच खेलने का मौका मिला. बेहतर प्रदर्शन के कारण पंकज 2016 में भारतीय हॉकी टीम में शामिल होकर टीम का गोलकीपर बना.

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दक्षिण एशियाई खेल 2016 में सबसे पहले भारतीय टीम में खेला. 2015 में मैसूर में आयोजित पांचवें नेशनल हॉकी टूनामेंट में बेस्ट गोलकीपर का अवार्ड पंकज को मिला. वहीं 2016 में बांग्लादेश के ढाका में आयोजित सब जूनियर एशिया कप में पंकज ने फिर से बेस्ट गोलकीपर का अवार्ड पाया. 2017 में मलेशिया में आयोजित सातवें सुल्तान जोहोर बरहू कप में देश का प्रतिनिधित्व किया.

मुफलिसी में गुजर रही है पंकज के परिवार की जिंदगी
भले ही पंकज आज हॉकी का एक चमकता सितारा बन चुका है, लेकिन उसके परिवार की जिंदगी अब भी मुफलिसी में ही गुजर रही है. पंकज का परिवार आज भी पतरातू गांव में किराये के खपरैल मकान में रहता है. उसके पिता ददन प्रसाद रजक आज भी पुश्तैनी धंधे से ही किसी प्रकार अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं. वहीं, मां अंजू देवी एक गृहिणी हैं, जो घर के कामों से बचे समय में अपने पति की मदद करती हैं. पंकज पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा है. ददन रजक बताते हैं कि बचपन से ही पंकज का रुझान पढ़ाई से ज्यादा खेलों की ओर था. घर में आर्थिक तंगी के बावजूद हमने पंकज को हमेशा प्रोत्साहित किया.

इस सपने पर हर कोई होगा फिदा
पंकज अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को देता है. खासकर मां को अधिक देता है. मां ने काफी कठिन परिस्थितियों के बावजूद हमेशा पंकज की मदद की और हौसला बढ़ाया. पंकज का लक्ष्य 2020 का जूनियर व‌र्ल्ड कप खेलने के साथ ही 2024 ओलंपिक में देश को हॉकी में स्वर्ण दिला फिर से हॉकी का सिरमौर बनाना है.