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  • Jun 10 2019 11:37AM

लीजेंड बनने के लिए जरूरी है प्रतिभा व बेहतरी की जिद

लीजेंड बनने के लिए जरूरी है प्रतिभा व बेहतरी की जिद

विजय बहादुर
vijay@prabhatkhabar.in

फ्रेंच ओपन में बीते शुक्रवार को एक नया इतिहास रचा गया. स्विटजरलैंड के स्टार टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर के लिए दिन काफी खास था. ऐसा इसलिए कि फ्रेंच ओपन टूर्नामेंट के तीसरे राउंड में रोजर फेडरर का मुकाबला नार्वे के कैस्पर रूड से था. कैस्पर रूड के पिता के खिलाफ फेडरर ने 1999 में डेब्यू किया था. उस वक्त फेडरर और कैस्पर रूड के पिता क्रिश्चियन रूड के बीच फ्रेंच ओपन का ही मुकाबला खेला गया था. उस समय फेडरर की उम्र महज 17 साल थी और अब 37 साल की उम्र में फेडरर बीते शुक्रवार को क्रिश्चियन रूड के बेटे कैस्पर के खिलाफ कोर्ट पर नजर आये. फेडरर तीन सेट से जीत दर्ज करने में कामयाब हुए

1999 फ्रेंच ओपन के जिस मुकाबले में रोजर फेडरर और क्रिश्चियन रुड आमने-सामने थे, उसमें फेडरर की हार हुई थी. फेडरर अपने पहले ही मैच और पहले ही राउंड में बाहर हो गये थे. क्रिश्चियन ने साल के तीसरे ग्रैंड स्लैम के तीसरे दौर में प्रवेश किया था. अब फ्रेंच ओपन के चौथे दौर में 20 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता फेडरर का सामना अर्जेंटिना के लियोनार्डो मेयर से होगा. अगर फेडरर जीते, तो सबसे उम्रदराज ग्रैंड स्लैम चैंपियन बनेंगे.

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फेडरर की तरह बहुत सारे सुपरस्टार्स ने अपने-अपने क्षेत्र में लंबे समय तक शीर्ष में रहकर बेहतरीन प्रदर्शन किया. क्रिकेटिंग सुपरस्टार सचिन तेंदुलकर ने 24 वर्ष तक अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया. सुनील गावस्कर, कपिल देव ने लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट को लीड किया. बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन 75 वर्ष की उम्र में भी बेहतरीन अदाकारी कर रहे हैं. लता मंगेशकर और आशा भोंसले का लंबे समय तक गायिकी करना किसी मिसाल से कम नहीं है. शाहरूख खान, आमिर खान, सलमान खान, अक्षय कुमार, अजय देवगन जैसे 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के कलाकारों का जलवा आज भी कायम है.

इस तरह अगर किसी भी लीजेंड के करियर ग्राफ का आंकलन करेंगे, तो यह साफ नजर आता है कि लंबे समय तक शीर्ष में रहने के कारण सिर्फ उनकी प्रतिभा नहीं रही है, बल्कि उन्होंने अपने करियर को बहुत ही करीने से लंबे समय तक संजोकर रखा.

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जो लोग क्रिकेट को जानते हैं उन्हें विनोद कांबली, इरफान पठान का नाम जरूर याद होगा. विनोद कांबली, जो सचिन तेंदुलकर के स्कूली मित्र थे, उन्हें कुछ लोग सचिन से भी ज्यादा प्रतिभाशाली मानते थे. शुरुआती दौर में विनोद ने अपनी प्रतिभा की झलक भी दिखलायी, लेकिन बाद में उनका करियर असमय खत्म हो गया. इरफान पठान में भी क्रिकेटिंग पंडितों को दूसरा कपिल देव नजर आता था, लेकिन उनका करियर भी असमय खत्म हो गया और उनका रिकॉर्ड किसी भी तरीके से कपिल देव के आसपास भी नजर नहीं आता है. विनोद कांबली और इरफान पठान दोनों का फोकस बाद के दिनों में क्रिकेट से ज्यादा ग्लैमर और चकाचौंध रहा, जिसके कारण वो लीजेंड नहीं बन सके.
कहने का आशय है कि आप अपनी प्रतिभा के बल पर कुछ समय तक तो इम्पैक्ट बना सकते हैं, लेकिन लीजेंड बनने के लिए समर्पण, मेहनत, त्याग, परफेक्शन और एकाग्रता बहुत महत्वपूर्ण है.