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  • Apr 27 2019 5:31PM

लोकगायिका जानकी देवी के नागपुरी गीतों पर आप झूम उठेंगे

लोकगायिका जानकी देवी के नागपुरी गीतों पर आप झूम उठेंगे

पंचायतनामा डेस्क
रांच

जानकी देवी. प्रसिद्ध नागपुरी लोकगायिका. झारखंड की स्वर कोकिला कहिए. जब ये नागपुरी लोकगीतों की तान छेड़ती हैं, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. झूमने-थिरकने पर बाध्य हो जाते हैं. सच कहिए तो दर्शकों का यही प्यार इनकी ताकत है. छोटी उम्र में करमा-जितिया-सरहुल पर नाचते-गाते गायिकी इनके रग-रग में बस गयी. रांची के बेड़ो स्थित कादोजोरा गांव की जानकी देवी कड़ी मेहनत, संघर्ष और गायिकी के जुनून के कारण झारखंड की प्रसिद्ध नागपुरी लोकगायिका बन गयी हैं. झारखंड कला मंदिर, खेलगांव (रांची) में वर्ष 2008 से वह नागपुरी लोकगायिकी का प्रशिक्षण दे रही हैं.

छोटी उम्र से ही गा रही हैं गीत
तन देना, मन देना, सोना देना, चांदी देना, देई दे रे सोना...धीरज धरेक लागिन, अंचरा कर कोना मोके, देई दे रे सोना. झारखंड के प्रसिद्ध लोकगायक-गीतकार मधु मंसूरी हंसमुख लिखित इस गीत को गाते हुए वह झूम उठती हैं. कहती हैं कि ये उनका काफी पसंदीदा गीत है. बचपन से ही इस गीत को वह सुन रही हैं. आठ वर्ष की उम्र से ही वह गाने लगी थीं. गांव-घर में पर्व-त्योहार के मौके पर उन्हें बुलाया जाने लगा था. इसके साथ ही उनका सफर धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा था. झारखंड के रांची, गुमला समेत विभिन्न जिलों में वह कार्यक्रम प्रस्तुत करने लगीं. दर्शकों का प्रेम उन्हें मिलने लगा.

आकाशवाणी-दूरदर्शन में दे चुकी हैं प्रस्तुति
जानकी देवी कहती हैं कि वह गरीब परिवार से हैं. उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. इसके बावजूद गायिकी के बलबूते आगे बढ़ती रहीं. गांव-घर एवं जंगलों-पहाड़ों में गाते-गाते आकाशवाणी-दूरदर्शन तक में वह कार्यक्रम प्रस्तुत करने लगीं. देश के कई राज्यों में अपनी गायिकी का जलवा बिखेर चुकी हैं. सम्मानित भी हुई हैं. कोलकाता में आकाशवाणी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित भी किया गया था.

महिलाओं को मिल रही प्रेरणा
झारखंड में नागपुरी लोकगायिकी में महिलाएं अब आगे आने लगी हैं. आधुनिकता के बावजूद युवा पीढ़ी ठेठ नागपुरी गायिकी में आगे आ रही है. महिलाएं भी गाने लगी हैं. यह अच्छा संकेत है. एक वक्त था, जब महिला गायिका खोजे नहीं मिलती थी. अब महिलाएं प्रेरित हो रही हैं. अपनी लोकसंस्कृति से उनका जुड़ाव सुखद है.

नागपुरी गायिकी को दे रही हैं बढ़ावा
वर्ष 2008 से वह डॉ रामदयाल मुंडा राजकीय कला भवन (झारखंड कला मंदिर), खेलगांव(रांची) में नागपुरी लोकगायिकी का प्रशिक्षण दे रही हैं. यहां नयी पीढ़ी तैयार हो रही है. जानकी देवी कहती हैं कि लोकगायिकी में उनका लंबा संघर्ष रहा है. इसके बावजूद वह कभी पीछे नहीं हटीं. हर चुनौतियां का सामना करते हुए आगे बढ़ती रहीं. नागपुरी को बढ़ावा देने को लेकर आज भी प्रयासरत हैं. झारखंडी लोककला और लोककलाकारों को संरक्षण देकर यहां की समृद्ध लोकसंस्कृति जिंदा रखी जा सकती है. यही समय की मांग भी है.