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  • Oct 3 2019 4:53PM

अगरबत्ती की खुशबू बिखेरतीं महिलाएं

अगरबत्ती की खुशबू बिखेरतीं महिलाएं

दुर्जय पासवान
गुमला

गुमला जिला अंतर्गत पालकोट प्रखंड का कोलेंग गांव. कभी यह गांव नक्सलियों के साये में था, लेकिन वक्त बदलता और बदल गयी लोगों की जिंदगी. कोलेंग गांव की महिलाओं ने अपने हुनर व मेहनत के बूते इस गांव में अपनी अलग पहचान बनायी. 12 महिलाएं अगरबत्ती बनाकर न सिर्फ खुद स्वावलंबी बन रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी इस व्यवसाय से जोड़ कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में जुटी हैं. आज इस गांव की महिलाएं अपनी लगन व मेहनत से अगरबत्ती की खुशबू पूरे राज्य में बिखेर रही हैं.

अगरबत्ती के अलावा कई अन्य कार्यों में भी अाजमा रहीं हाथ
जेएसएलपीएस के तहत महिला विकास मंडल, बघिमा द्वारा संचालित चांदनी महिला मंडल की महिलाओं द्वारा निर्मित पम्पा भवानी डायमंड अगरबत्ती की सप्लाई आज राज्य के विभिन्न इलाकों में की जा रही है. स्काई जोन मार्केटिंग प्रशिक्षण केंद्र द्वारा प्रशिक्षण हासिल कर कोलेंग पंचायत की महिलाएं अगरबत्ती निर्माण के अलावा एलइडी बल्ब का निर्माण, फार्मिंग, मशरूम एवं मोमबत्ती का प्रशिक्षण ले रही हैं. कोलेंग पंचायत की प्रिसिला केरकेट्टा ने बताया कि ग्राम संगठन, बैंक लोन एवं सीसी लिंकेज के पैसे का इस्तेमाल कर कोलेंग पंचायत की 12 महिलाओं का समूह अगरबत्ती उत्पादन का काम कर रहा है. इस कार्य में उनके साथ कोलेंग पंचायत की ग्लोरिया डुंगडुंग, करुणा कांति, ज्योति केरकेट्टा, फ्रिस्का केरकेट्टा एवं प्रियंका कुल्लू जुड़ी हैं.

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महिलाएं बन रही हैं स्वावलंबी
ये महिलाएं अब तक करीब 19 हजार अगरबत्ती पैकेट का निर्माण कर चुकी हैं. इनकी अगरबत्ती को बालूमाथ, पलामू, लोहरदगा जिले में सप्लाई किया जाता है. इन अगरबत्तियों को जिले के विभिन्न धार्मिक स्थलों जैसे- आंजनधाम, टांगीनाथ मंदिर, हीरादह सहित अन्य धार्मिक स्थलों में भी सप्लाई किया जाता है. धीरे-धीरे इस व्यवसाय से कोलेंग पंचायत की कई महिलाएं स्वावलंबी बन रही हैं. अगरबत्ती बनाने में कच्चा माल मंगवाने से लेकर उसकी पैकेजिंग तक का कार्य इन महिलाओं के द्वारा किया जाता है. कच्चा माल (सहायक पाउडर, केमिकल एवं स्टिक) कोलकाता से मंगवाया जाता है.

जैविक अगरबत्ती है खास
इन अगरबत्तियों में सबसे खास है ऑर्गेनिक लेमनग्रास मस्कीटो रिपेलेंट अगरबत्ती. कोलेंग पंचायत की महिलाओं द्वारा निर्मित इस अगरबत्ती की सुगंध की वजह से मच्छर इसके आसपास भी नहीं फटकते हैं. यह पूरी तरह जैविक है, वहीं लेमनग्रास के भी कई फायदे हैं.

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एलइडी बल्ब भी हो रहा तैयार
कोलेंग की महिलाएं एलइडी बल्ब का निर्माण कर लोगों के घरों में रोशनी फैला रही हैं. बल्ब बनाने के लिए उपयोग में आनेवाली सारी सामग्रियां कोलकाता से मंगायी जाती हैं. बल्ब की फिटिंग करने के लिए इन महिलाओं के पास लकड़ी की बल्ब फिटिंग उपकरण मौजूद है. यह उपकरण अहमदाबाद से मंगवाया गया है. प्रिसिला ने बताया कि बल्ब बनाने के सारे पुर्जे एकत्रित कर ये महिलाएं इन पुर्जों को जोड़ कर एवं बल्ब फिटिंग उपकरण की सहायता से इन एलइडी बल्बों को तैयार करती हैं. इन तैयार बल्बों को फिर पैकेजिंग कर दुकानों में सप्लाई की जाती है.

रुका पलायन
कोलेंग गांव की महिलाओं ने कहा कि पहले पलायन मजबूरी थी, क्योंकि पेट के लिए कमाना जरूरी था. इसके लिए वे दूसरे राज्य जाते थे, लेकिन गांव में स्वरोजगार का साधन मिलने के कारण पलायन रुक गया है.