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  • Nov 20 2018 10:11AM

पर्यटन क्षेत्र बनाने से तिरू फॉल की बदलेगी सूरत

पर्यटन क्षेत्र बनाने से तिरू फॉल की बदलेगी सूरत

पंचायतनामा डेस्क

पंचायतनामा डेस्क
प्रखंड: बुढ़मू
जिला: रांची

राजधानी रांची से 45 किलोमीटर दूर ठाकुरगांव-खलारी सड़क के किनारे स्थित है तिरू फॉल. प्रकृति ने तिरू को झोली भरकर खूबसूरती प्रदान की है. यह पूरा क्षेत्र घने जंगलों और पहाड़ों से घिरा हुआ है. बुढ़मू प्रखंड मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर तिरू फॉल चार पंचायतों के अंतर्गत आता है. सारले, मक्का, बहम्ने और मुरूपीरी पंचायत की सीमा इसी जगह से शुरू होती है. रांची के दूसरे जलप्रपातों की तरह अभी यह विकसित नहीं है. इसलिए यहां पर कम ही पर्यटक घूमने जाते हैं, पर अब यहां के आस-पास के गांवों के ग्रामीण और जनप्रतिनिधि इसे विकसित करने की मांग कर रहे हैं. इसे लेकर तिरू फॉल विकास समिति की एक बैठक आयोजित हुई. इस बैठक में ग्रामीणों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया. बैठक में सारले पंचायत के मुखिया गोपी मुंडा, बहम्ने पंचायत की मुखिया बसंती देवी, मक्का पंचायत की मुखिया सीतामनी देवी समेत कई ग्रामीण शामिल हुए. सभी ने तिरू फॉल को विकसित करने के लिए विचार विमर्श किया.

10-12 गांव के ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार
तिरू फॉल के आस-पास 10 से 12 गांव हैं. इलाके के लोगों का मुख्य पेशा कृषि है, लेकिन पर्याप्त सिंचाई के साधन नहीं होने के कारण कई समस्याएं आज भी विद्यमान हैं. इसके अलावा गांव में रोजगार के अन्य कोई साधन नहीं होने के कारण यहां के ग्रामीण मजदूरी के लिए पलायन करने को विवश हैं. ग्रामीण बताते हैं कि अगर तिरू फॉल को विकसित किया जायेगा, तो आस-पास के गांवों के ग्रामीणों के लिए रोजगार के बड़े अवसर प्राप्त होंगे. साथ ही प्रकृति की अनमोल धरोहर भी संरक्षित रहेगी.

मकर संक्रांति के मौके पर लगता है यहां मेला
हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी को तिरू फॉल में मेले का आयोजन होता है. इस दौरान यहां काफी भीड़ उमड़ती है. तिरू फॉल विकास समिति के सदस्य बताते हैं कि तिरू फॉल और आस-पास पहाड़ को मिलाकर लगभग 300 एकड़ में यह क्षेत्र फैला हुआ है. 200 मीटर की ऊंचाई से यहां पानी गिरता है. फॉल के ऊपर एक कुआंनुमा गड्डा बना हुआ है, जिसे तिरू कांड़ी कहा जाता है, जो काफी गहरा है. बारिश के मौसम में तिरू फॉल से गिरता हुआ पानी खलारी से भी दिखाई पड़ता है, जो वहां से लगभग नौ किलोमीटर दूर है.

पहाड़ पर स्थित है पौराणिक मंदिर
तिरू फॉल में सबसे ऊंचाई पर एक प्राचीन शिवलिंग है, जहां फिलहाल एक कमरा बनाकर उसे मंदिर का रूप दिया गया है. इस मंदिर से कई प्राचीन किंवदंतियां जुड़ी हुई हैं. ग्रामीण बताते हैं कि पहले दोनों पहाड़ों के बीच एक मोटा तना था, जिससे पार होकर गोपियां मंदिर में पूजा करने जाती थीं. तना से जुड़ा पौधा आज भी वहां स्थित है. फिलहाल मंदिर तक पहुंचने के लिए नदीं पार करना पड़ता है.

फॉल को विकसित करने से होगा फायदा : गोपी मुंडा
सारले पंचायत के मुखिया गोपी मुंडा मानते हैं कि तिरू फॉल के विकसित करने से स्थानीय लोगों को काफी लाभ होगा और इस इलाके का विकास भी होगा. स्थानीय लोगों को काम करने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा. उन्हें अपने गांव में ही रोजगार मिल जायेगा. तिरू फॉल के विकसित होने से आस-पास के 10-12 गांवों को फायदा मिलेगा.

नये लोग आयेंगे, नयी चीजें सीखने को मिलेंगी : सीतामनी देवी
मक्का पंचायत की मुखिया सीतामनी देवी बताती हैं कि विकास के दृष्टिकोण से यह इलाका काफी पिछड़ा हुआ है. जब तिरू फॉल पूरी तरह से पर्यटन के लिए विकसित हो जायेगा, तो हर रोज नये लोग आयेंगे, जिनसे यहां के लोगों को काफी कुछ सीखने के लिए मिलेगा. लोगों की सोच में बदलाव आयेगा और समाज व गांवों का विकास होगा.