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  • May 20 2019 4:23PM

इज्जत घर के नाम से मशहूर हो रहा गांव का शौचालय

इज्जत घर के नाम से मशहूर हो रहा गांव का शौचालय

नवीन कुमार
साहिबगंज

साहिबगंज जिले को स्वच्छ व सुंदर बनाने में शौचालय ने अहम भूमिका निभायी है. पहले महिलाएं और पुरुष खुले में शौच जाया करते थे. बेटियों व बहुएं अंधेरे होने का इंतजार किया करती थीं, लेकिन अब बहू-बेटियों व पुरुषों को शौचालय ने सम्मान दिलाया है.

जिले में अब तक बने 1.33 लाख शौचालय
साहिबगंज जिले में लगभग एक लाख 33 हजार 764 शौचालय बनाये गये हैं. महिलाओं ने शौचालय को शौचालय नहीं इज्जत घर नाम दिया है, क्योंकि जब महिलाएं खुले में शौच जाती थीं, तब गांव-मोहल्ले के लोग सिटी बजाते थे और कमेंट करते थे. इससे महिलाओं के मान-सम्मान को ठेस पहुंचता था. गांव की पढ़ी-लिखी बेटियां अब घर की महिलाओं को शौचालय के उपयोग के बारे में बता रही हैं.

शौचालय ने ग्रामीणों को गांव से जोड़ा
शंकर यादव, भोला मंडल, जिच्चु कुमार, शकुंतला देवी, कल्याणी देवी, सावित्री देवी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पहले गांव के लोग जो शहर में बसे हैं, अपने परिवार के साथ गांव आने से कतराते थे. व्यापारी वर्ग भी गांव आने में हिचकिचाते थे. कारण लोगों को गांव जाने पर गंदगी मिलती थी. शौचालय से गांव की गंदगी तो दूर हुई ही साथ ही गांव, टोले व मोहल्ले की महिलाओं, बेटियों-बहुओं को इज्जत मिली. गांव के लोगों को फिर से शौचालय ने गांव से जोड़ा है.

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शौचालय नहीं रहने से कई बेटों की शादी में हुई देरी
जिले के कुछ गांवों की नवदंपत्ती धर्मराज कुमार व सावित्री देवी, गोकुल रंजन व कल्याणी कुमारी, पायल कुमारी व सोनू मंडल, जयचंद्र यादव व फूलमती देवी सहित अन्य ने बताया कि उनकी शादी वर्ष 2017 तक हो जानी थी, लेकिन शौचालय नहीं रहने की वजह से उन्होंने पहले घर में शौचालय बनाने का निर्णय लिया. इसके लिए प्रखंड कार्यालय में दौड़ लगायी और राशि मिलते ही खुद की भी राशि लगाकर पहले शौचालय बनाया और शौचालय बनाकर सोशल मीडिया के जरिये दिखाया, तब जाकर रिश्ता पक्का हुआ और 2018-19 में वो शादी के बंधन में बंधे. सावित्री देवी, कल्याणी कुमारी, पायल, नेहा सहित अन्य गंगा किनारे रहनेवाली महिलाएं व बेटियों ने बताया कि शौचालय हो जाने से उनके लिए मानो नया घर मिल गया हो. ये उनका इज्जत घर है. तमाम आधुनिकता के बावजूद गांव की महिलाएं आज भी खुलकर नहीं बोल पाती हैं. घूंघट लिये वह सारी बातें बताती हैं.

शहर से लेकर गांव तक बने शौचालय
शहर की बात करें, तो नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले 28 वार्डों में कुल 5,431 शौचालय बनवाये गये हैं. सीटी-पीटी सामुदायिक शौचालय शहर में 10 जगहों पर बनवाये गये हैं. शहर के मुख्य चौक-चौराहों में राहगीरों के लिए सात मॉडल शौचालय बने हैं. नमामि गंगे योजना के तहत शहरभर में पांच शौचालय बनाये गये हैं. शहर में स्किल डेवलपमेंट सह सामुदायिक शौचालय बने हैं. शहर के छह शौचालयों को नमामि गंगे के तहत रिनोवेट किया गया है. स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जिलेभर के सभी नौ प्रखंडों सहित गंगा किनारे के सभी पंचायतों में कुल 01 लाख 28 हजार 304 शौचालय बनाए गये हैं, जिससे गांव, घर, टोला व मोहल्ला तो स्वच्छ हुआ ही है, गंगा भी स्वच्छ हुई है.

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शौचालय को लेकर ग्रामीण महिलाओं की राय
शौचालय से महिलाओं को आत्मसम्मान मिला है. उक्त बातें सिर्फ 67 वर्षीया रेखिया देवी ही नहीं कहतीं, बल्कि चानन गांव की दर्जनों महिलाएं सावित्री देवी, शोभा देवी, किरणिया मसोमात, लक्खी देवी, जयमुनि देवी एक स्वर में कहती हैं कि उनके घर में पहले शौचालय नहीं था. जब ब्याह कर आयीं, तो खेत या जंगल में शौच के लिए जाना पड़ता था, वो भी अंधेरा होने पर. पहले भी अपने घर में खेत या जंगलों या रेलवे लाइन किनारे जाते थे. ससुराल आये तो वही कहानी थी. कामती देवी कहती हैं कि 40 साल पहले जब इस गांव में आयीं, तो एक-दो घरों के बाहर में शौचालय होता था. सभी खेत या रेलवे लाइन के समीप जंगल-झाड़ी या गंगा किनारे शौच जाने को मजबूर होते थे. अब स्थिति सुधर गयी है. सभी को शौचालय मिला है. अब उनके गांव की महिलाएं, बेटियां, बहुएं व पुरुष सभी शौचालय का उपयोग करते हैं.

ग्रामीणों का जीवन खुशियों से भरा
जब से घर में शौचालय बना, जीवन खुशियों से भर गया है. अब लोटा लेकर घर से बाहर नहीं जाते हैं. गांव के अधिकतर घरों में शौचालय है. अब जो भी बहुएं गांव में आती हैं, तो उनके परिजन नहीं पूछते हैं कि घर में शौचालय है या नहीं. गांव के पिंटू यादव, श्याम कुमार, सूरज कुमार, गणेश मंडल, श्यामा कुमारी, कुमकुम कुमारी, शीला हेम्ब्रम, फूल कुमारी सहित अन्य ने बताया कि उनके घरों में शौचालय नहीं था. वे खेत, जंगल या तालाब किनारे शौच करने को मजबूर थे. ये अच्छा नहीं लगता था. स्कूल में शौचालय में जाते थे और घर में जंगलों व खेतों में. वो सोचते थे कि कब उनके घर में शौचालय होगा. अब वो सपना पूरा हो गया. गांव में अब साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है.