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  • May 4 2019 1:58PM

पक्का मकान मिलने से खुश हैं सुकुरहुट्टू के ग्रामीण

पक्का मकान मिलने से खुश हैं सुकुरहुट्टू के ग्रामीण

पंचायतनामा टीम
प्रखंड: कांके
जिला: रांची

राजधानी रांची के कांके प्रखंड का सुकुरहुट्टू गांव क्षेत्रफल और जनसंख्या के लिहाज से काफी बड़ा गांव है. इसलिए इस गांव को दो भागों में बांटकर दो पंचायत बनायी गयी है. सुकुरहुट्टू दक्षिणी पंचायत और सुकुरहुट्टू उत्तरी पंचायत. शहर के नजदीक होने के कारण गांव में शहरी परिवेश झलकता है. अधिकांश आबादी कृषि और दुग्ध व्यवसाय से जुड़ी हुई है. काफी संख्या में लोग मजदूरी करते हैं. ऐसे में आवास योजना के तहत आवास मिलना ग्रामीणों के लिए वरदान की तरह है, क्योंकि जब लोग मिट्टी के घर की मरम्मत करा पाने में सक्षम नहीं हैं, तो पक्का मकान कहां बनायेंगे. सुकुरहुट्टू की दोनों पंचायतों को मिलाकर वर्ष 2016-17 में 35 मकान आवंटित किये गये थे, जिनका निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. वर्ष 2018-19 में 11 मकान आवंटित किये गये हैं, जिनका निर्माण कार्य चल रहा है.

लाभुकों के चेहरे पर फैली मुस्कान

1. अब बरसात में चिंता नहीं होती है : फुदगी देवी
सुकुरहुट्टू दक्षिणी पंचायत की फुदगी देवी सब्जी बेच कर किसी तरह घर चलाती हैं. मिट्टी के घर को वह ठीक से मरम्मत नहीं करा पा रही थीं, तो पक्का मकान कहां से बना पातीं. फुदगी देवी पक्का मकान में रहना चाहती थीं, लेकिन गरीबी के कारण पक्का मकान नहीं बना पा रही थीं. जमीन के नाम पर घर के अलावा कुछ नहीं है, जिसके कारण खेती-बारी भी नहीं कर सकती थीं. इसी कारण सब्जी बेच कर अपना जीवन यापन कर रही हैं. इतनी कमाई नहीं थी कि परिवार चला सकें और पक्का मकान बना सकें. मिट्टी के घर में हर साल बरसात के पहले छत की मरम्मत करनी पड़ती थी, जिसमें पैसे भी खर्च होते थे और परेशानी भी होती थी. इसके बावजूद बरसात होने पर घर में पानी रिसता था. रात में बारिश होने पर ठीक से सो भी नहीं पाती थीं. अब परेशानी दूर हो गयी है. खुद का पक्का मकान बन गया है, जो फुदगी के लिए एक सपने जैसा है.

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2. विधवा महिला को मिली अपनी छत : नरेश कुमार साहु
सुकुरहुट्टू उत्तरी पंचायत के नरेश कुमार साहु ने बताया कि उनकी बहन के नाम से आवास मिला है. बहन पहले मिट्टी के घर में रहती थी, जहां उसे काफी परेशानी होती थी. खास कर बारिश के दिन में परेशानी बढ़ जाती थी. घर कई जगह से रिसता था. इसके कारण वो ठीक से रात में सो भी नहीं पाती थी. खाना बनाने में भी परेशानी होती थी. अब उसे आवास मिल गया है, जो उसके लिए वरदान साबित हुआ है. एक विधवा के लिए बेटियों की शादी करना और घर बनाना असंभव था. किसी तरह बेटियों की शादी तो हो गयी, पर घर नहीं बना पायी. अब उसका खुद का पक्का मकान बन गया है. नरेश बताते हैं कि पीएम आवास योजना का लाभ पाकर उनकी बहन काफी खुश है.

3. अब बरसात आने पर नहीं लगेगा डर : पारसनाथ महतो
सुकुहुट्टू उत्तरी पंचायत के पारसनाथ महतो पेशे से शिक्षक हैं. एक निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं. तनख्वाह इतनी है कि सिर्फ घर का खर्च ही चला सकते हैं. जर्जर हो चुके पुश्तैनी मकान को इतनी आसानी से गिरने के लिए छोड़ भी नहीं सकते. घर के अलावा थोड़ी-बहुत जमीन है, जहां वो सब्जी की खेती करते हैं, जिससे खाने-पीने के लिए थोड़ा निकल जाता है. पारसनाथ को वर्ष 2018-19 में आवास मिला है, जिसका निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है. अपने पुराने घर की तरफ इशारा करते हुए पारसनाथ बताते हैं कि देखिए मेरे पुराने घर की दीवार की हालत कैसी है. इसके कारण बरसात का मौसम आने पर घर में डर लगता था. छत से भी पानी टपकता था और गिरने की कगार पर था. नया घर बनाने के लिए पैसे नहीं थे. अब वो बड़े गर्व से कहते हैं कि उनका भी एक पक्का मकान है.

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4. आवास योजना से मिला सुकून : संजीत महतो
आवास योजना के लाभुक सुरेश महतो के बेटे संजीत ने कहा पुराना घर बहुत जर्जर हो चुका था. उसे तोड़ कर नया मकान बनाने के लिए पैसे नहीं थे. पिताजी की कमाई भी इतनी अच्छी नहीं है कि नया घर बना सकें. इसे तोड़ कर बनाने में भी दिक्कत थी, क्योंकि टूटने के बाद कहां रहते. मिट्टी के मकान को तोड़ कर मिट्टी का मकान बनाना सही नहीं लग रहा था. परिवार में पांच लोग हैं. आवास मिलने से उम्मीद जगी. नया मकान बनने तक फिलहाल परिवार के सभी सदस्य गांव में स्थित एक सरकारी भवन में रह रहे हैं. आवास योजना के तहत नया मकान बन गया है, अब सिर्फ गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहुर्त का इंतजार है.

5. पक्का मकान में रहने का आनंद ही अलग है : कामेश्वर महतो
सुकुरहुट्टू उत्तरी पंचायत में जब आवास योजना के तहत गृह प्रवेश हुआ, तब कामेश्वर महतो को आवास में गृह प्रवेश कराने के लिए रांची लोकसभा क्षेत्र के सांसद रामटहल चौधरी, कांके विधायक जीतू चरण राम, बीस सूत्री अध्यक्ष, कांके प्रखंड विकास पदाधिकारी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे. कामेश्वर कहते हैं कि आवास के बहाने ही सही, लेकिन इतने बड़े नेता, मंत्री और अधिकारी मेरे घर आये. इससे बड़ी खुशी क्या होगी. कामेश्वर ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके घर में सांसद और विधायक आयेंगे. कृषि और पशुपालन कर वह अपनी आजीविका चलाते हैं. मिट्टी का घर पुराना हो चुका था. कुछ पैसे थे, पर इससे पक्का मकान बनाना मुश्किल था. अब पक्का मकान में परिवार के साथ खुश हैं.

6. दूर हो गयी पक्का मकान की चिंता : डब्बू महतो
डब्बू महतो का पक्का मकान बन गया है. इस बात को लेकर वो काफी खुश हैं. पहले कच्चा मकान में रहते थे. इसमें काफी परेशानी होती थी. हमेशा फर्श खराब हो जाता था, जिसके कारण रख-रखाव में परेशानी होती थी. हर साल छप्पर को बनाने के लिए बांस और लकड़ी का इंतजाम करना पड़ता था, जो काफी खर्चीला होता था. साथ ही छप्पर बनवाने के लिए मजदूरी देनी पड़ती थी. खुद मजदूरी करके किसी तरह जीवन-यापन कर रहे हैं. इसलिए इतना खर्च उठा पाना संभव नहीं था. बारिश के दिनों में भी परेशानी होती थी. जमीन और दीवारों में सीलन हो जाती थी. सोने-बैठने के लिए जगह नहीं मिल पाती थी. अब पक्का मकान बन गया है. घर बनाने की चिंता से छुटकारा मिल गया है.