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  • Nov 28 2019 5:34PM

बदलाव की कहानी लिख रही टांगरबसली पंचायत

बदलाव की कहानी लिख रही टांगरबसली पंचायत

पवन कुमार
प्रखंड: मांडर
जिला: रांची 

रांची जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर मांडर प्रखंड की टांगरबसली पंचायत बदलाव की कहानी लिख रही है. 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की आबादी आठ हजार है. तीन राजस्व गांव हैं. टांगरबसली, प्रयागो और नारो. इन तीनों गांवों को मिला कर 16 वार्ड और 21 टोले हैं. यह मांडर प्रखंड की सीमावर्ती पंचायत है. इसके बाद बेड़ो की सीमा शुरू होती है. आदिवासी बहुल इस पंचायत की 90 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है. ग्रामीण इलाका होने के कारण यह पंचायत विकास के मामले में थोड़ा पिछड़ा हुआ था, लेकिन अब पंचायत क्षेत्र में बदलाव दिख रहा है. ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है. किसान भी सरकारी योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं. बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल रहा है. गांव में पीसीसी सड़कों का निर्माण हुआ है. स्वच्छता को लेकर भी लोगों में जागरूकता आयी है

पंचायत भवन के जीर्णोद्धार से शुरू हुआ सफर
जब चुनाव जीत कर आये थे, तब पंचायत भवन में भवन के नाम पर सिर्फ दीवारें थीं. खिड़की दरवाजे नहीं थे. बैठक करने तक के लिए जगह नहीं थी. पंचायत भवन के अंदर काफी गंदगी थी. टांगरबसली पंचायत के मुखिया तुलसी उरांव ने कहा कि मुखिया चयनित होने के बाद सबसे पहले उन्होंने पंचायत भवन का जीर्णोद्धार कराया. तब जाकर पंचायत भवन बैठक करने लायक बना. अब तो पंचायत भवन में प्रज्ञा केंद्र संचालित होता है. पंचायत भवन पूरी तरह सक्रिय है. पंचायत के लिए विकास की कई योजनाएं चलायी जा रही हैं.

15 नवंबर 2018 को ओडीएफ हुई पंचायत
मुखिया तुलसी उरांव ने सबसे पहले पूछा कि अभी आप जिस सड़क से आये, क्या उस सड़क में आपको गंदगी दिखायी पड़ी? क्या आपको नाक पर रूमाल रखना पड़ा? नहीं ना. यह बदलाव पिछले कुछ महीनों में पंचायत के गांवों में हुआ है. पहले बारिश के मौसम में गांव की सड़कों पर चलना मुश्किल होता था. इसके बाद गांव में शौचालय निर्माण शुरू हुआ. शौचालय बनाने के लिए पंचायत जनप्रतिनिधियों ने भी काफी मेहनत की. मैं खुद शौचालय निर्माण कार्य का निरीक्षण करता था. इसके बाद ग्रामीणों को शौचालय के इस्तेमाल के लिए जागरूक करना एक बड़ी समस्या थी. अधिकतर लोग पुराने विचार के थे. इस कारण वो शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए तैयार नहीं थे. ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए ग्रामसभा में ग्रामीणों को जागरूक किया गया. स्कूली बच्चों ने प्रभातफेरी निकाली. तब जाकर धीरे-धीरे ग्रामीणों ने शौचालय का इस्तेमाल करना शुरू किया. अब बदलाव दिख रहा है. अब बारिश के मौसम में गांव में डायरिया या किसी अन्य बीमारी का प्रकोप नहीं होता है.

90 घरों में नहीं बना शौचालय, पेयजल की है समस्या
टांगरबसली गांव के 90 घरों में अब भी शौचालय का निर्माण नहीं हो पाया है. इतना ही नहीं इन घरों में पेयजल की भी समस्या है. इसके पीछे एकमात्र वजह यह है कि सभी 90 घर चट्टान के ऊपर बने हुए हैं. इसके कारण वहां शौचालय निर्माण के लिए पीट बनाना मुश्किल है. इसके अलावा अगर गड्ढा किसी तरह बना भी दिया जाये, तो वह भर जायेगा. यहां के निवासियों के इसके लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इन घरों में पेयजल की भी समस्या है. पंचायत में आठ सौर ऊर्जा संचालित पंप लगाये गये हैं. कुछ चापाकल को छोड़कर सभी दुरुस्त हैं. एक जलमीनार भी है, जिसके जरिये इसे चालू किया जा रहा है.

जीरो ड्रॉप आउट है पंचायत
सीमावर्ती और सुदूर पंचायत होने के बावजूद टांगरबसली पंचायत को जीरो ड्रॉप आउट पंचायत घोषित करने में सफलता मिली है. पंचायत के तीनों गांवों में प्राथमिक विद्यालय है. इसके अलावा टांगरबसली में प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय है. इससे पंचायत और आस-पास के गांवों में बालिकाओं की शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है. लोग बेटियों की शिक्षा पर भी ध्यान देते हैं. इसके साथ ही पास में संत जोंस हाइस्कूल है. इसका फायदा हुआ है कि अब दसवीं तक की शिक्षा के लिए ग्रामीणों को अपने बच्चों के लिए सोचना नहीं पड़ता है. मुखिया अपने स्तर से समय-समय पर जाकर स्कूलों में जांच करते हैं और अभिभावक व शिक्षकों को सुझाव भी देते हैं.

आंगनबाड़ी का प्रदर्शन बेहतर
मुखिया तुलसी उरांव के मुताबिक, पंचायत में एक भी बच्चा कुपोषित नहीं है. आंगनबाड़ी सराहनीय कार्य कर रहा है. सभी बच्चों और माताओं को समय पर पोषाहार और सही जानकारी दी जाती है. इसके अलावा आंगनबाड़ी सेविका भी काफी सक्रिय रहती हैं. समय-समय पर मुखिया द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र का जायजा लिया जाता है. स्वास्थ्य उपकेंद्र की स्थिति सही नहीं है. इसमें सुधार करने की जरूरत है.

30 डोभा का हुआ निर्माण
टांगरबसली पंचायत में 90 फीसदी आबादी कृषि पर आश्रित है. ऐसे में सिंचाई की सुविधा होना किसानों के लिए बेहद जरूरी है. पंचायत की सीमावर्ती क्षेत्र से ही बीरगोड़ा नदी गुजरती है, जहां पर चेकडैम बना कर किसानों के लिए पाइप के जरिये खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए मोटर और पाइप लगाये गये थे, पर सब चोरी हो गये हैं. इसके कारण थोड़ी परेशानी है. डोभा निर्माण हो जाने से जलस्तर में काफी सुधार हुआ है. इसके साथ ही पंचायत का 15 फीसदी क्षेत्रफल वनभूमि है, जिससे भी जलस्तर सही रहता है. साथ ही वनों को बचाने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं.

पंचायत क्षेत्र में टीओपी की जरूरत : तुलसी उरांव
टांगरबसली पंचायत के मुखिया तुलसी उरांव ने कहा कि मांडर थाना यहां से थोड़ी दूरी पर है. इस कारण सुरक्षा को लेकर यहां अक्सर चिंता बनी रहती है. छोटी-छोटी घटनाएं भी घटती हैं. बाजार भी लगता है. इसके लिए सुरक्षा की आवश्यकता है. इसलिए यहां पर एक टीओपी होना चाहिए. मुखिया ने कहा कि ग्रामीणों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए वो प्रयासरत हैं. खासकर महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

पेयजल व्यवस्था को और बेहतर करने का प्रयास : बिरसा टोप्पो
उपमुखिया बिरसा टोप्पो बताते हैं कि अभी जो भी कार्य पंचायत क्षेत्र में दिखा है, वो इस कार्यकाल में हुआ है. पंचायत भवन का जीर्णोद्धार हुआ. पेयजलापूर्ति को लेकर पंचायत में बेहतर कार्य हुए. एक जलमीनार बना है. इसे चालू कर जलापूर्ति का प्रयास किया जा रहा है. जिन 90 घरों में शौचालय नहीं है और पानी की समस्या है, उन घरों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने पर विचार किया जा रहा है.

महिलाओं को मिल रहा है लाभ : सुषमा देवी
ज्योति आजीविका सखी मंडल की सुषमा देवी कहती हैं कि पंचायत में शौचालय बन जाने से महिलाओं को काफी फायदा हुआ है. सखी मंडल से जुड़कर महिलाएं आगे बढ़ रही हैं. ग्रामसभा को लेकर ग्रामीण जागरूक हुए हैं. अब ग्रामीण ग्रामसभा में अपनी राय भी रखते हैं.