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  • Jan 22 2018 4:32PM

चेटर झारखंड का ऐसा गांव, जहां आजादी से अब तक थाना नहीं पहुंचा कोई मामला

चेटर झारखंड का ऐसा गांव, जहां आजादी से अब तक थाना नहीं पहुंचा कोई मामला

 गुरुस्वरूप मिश्रा
आज मामूली बात पर थाने में एफआइआर दर्ज करा दी जाती है. जमीन विवाद में कई पीढ़ियां कोर्ट-कचहरी में चक्कर काटती रह जाती हैं. ऐसे में झारखंड के रामगढ़ जिले का चेटर गांव नजीर पेश करता है. आजादी से लेकर अब तक इस गांव के किसी विवाद में थाने में एफआइआर दर्ज नहीं हुई है. गांव की एकता की दाद देनी होगी कि वह आज भी अपने विवाद को खुद सुलझा लेता है. वक्त बदला, लेकिन इस गांव की रवायत नहीं बदली. साधारण सा दिखनेवाला यह गांव कई मायनों में झारखंड के साढ़े 32 हजार गांवों के लिए सीख है. बात साक्षरता की हो, तकनीकी शिक्षा की, आपसी सहयोग की, बुजुर्गों के सम्मान की, मृतकों को श्रद्धांजलि देने की या सरकारी नौकरी करनेवालों की. इस गांव का कोई सानी नहीं है.
देखने में बिल्कुल सामान्य है चेटर गांव : रामगढ़ जिले का चेटर गांव. रांची-रामगढ़ मुख्य सड़क पर बूढ़ाखुखड़ा के पास ऊंचे पहाड़ पर महामाया मंदिर आपका स्वागत करता है. बूढ़ाखुखड़ा के बाद चेटर है. 150 घर और करीब डेढ़ हजार की आबादी है. बाहर से देखने में यह गांव बिल्कुल सामान्य है. खेतों में पीले सरसों, खलिहान में पुआल, खेतों में काम करते किसान एवं गाय-बकरी चरा रहे ग्रामीण, पेयजलापूर्ति के लिए बना जलमीनार, दो आंगनबाड़ी केंद्र, राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय और पूजा के लिए मंदिर. यही है गांव की तस्वीर.
सादा जीवन उच्च विचार : वेशभूषे से यहां के ग्रामीण सामान्य दिखेंगे, लेकिन जब आप उनसे बात करेंगे, तो उनके सादा जीवन उच्च विचार जानकर चौंक जायेंगे. युवा हो, बुजुर्ग हो या सामान्य सी दिखनेवाली बहू. सबका आत्मविश्वास प्रेरित करता है.
सड़कों पर बहता है पानी : गांव में काफी बदलाव हुआ है. अब जलमीनार से गांव में पेयजलापूर्ति की जाती है. अधिकतर घरों में शौचालय है. गांव में नालियों का अभाव है. इसके कारण घर का पानी सड़कों पर बहता दिखता है. राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है. चारों तरफ से खुला होने के कारण साफ-सफाई का अभाव दिखता है.
ग्रामीण आपस में सुलझाते हैं मामला
गांव के सबसे बुजुर्ग 82 वर्षीय तुलाराम महतो अपनी तीनों बकरियों को दिनभर चरा कर शाम को घर लौटते हैं. वह कहते हैं कि कई मायनों में यह गांव सबसे अलग है. आजादी से लेकर आज तक इस गांव के किसी विवाद में थाने में एफआइआर दर्ज नहीं हुई है. गांव के लोग खुद मिल-बैठ कर इसे सुलझा लेते हैं. वे कहते हैं कि आजादी के समय का दौर ही अलग था. देश प्रेम का गजब जज्बा था. हमने अंग्रेजों के खिलाफ नारे भी लगाये थे.
बुजुर्ग होते सम्मानित
राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, चेटर भी अन्य स्कूलों से अलग है. आठवीं कक्षा तक के इस स्कूल में 189 विद्यार्थी हैं. पांच पारा शिक्षक समेत प्रधानाचार्य हैं. पारा शिक्षिका सुनीला देवी कहती हैं कि स्कूल में हर गणतंत्र दिवस को गांव की सबसे बुजुर्ग महिला, जबकि स्वतंत्रता दिवस को सबसे बुजुर्ग व्यक्ति बतौर मुख्य अतिथि झंडोत्तोलन करते हैं. इस दौरान उन्हें सम्मानित भी किया जाता है.
रिटायर लोगों को गांव की सेवा के िलए दिलायी जाती है शपथ
रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ बीएन ओहदार कहते हैं कि सेवानिवृत्त हो चुके लोगों को सम्मानित करते हुए उन्हें अब अपने गांव की सेवा करने की शपथ भी दिलायी जाती है. गांव के विकास के लिए किसान सभा का गठन किया गया है. इसके जरिये निराश किसानों को संबल देते हुए फंड जमा करने की कोशिश की जा रही है. इस बार हर घर से दो-दो सूप धान जमा हुआ है. यह किसान सभा के अकाउंट में जमा रहेगी.
हर घर में टेक्निकल एजुकेशन
गांव की बहू शीला कुमारी आवासीय विकलांगता विद्यालय, लारी में शिक्षिका हैं. वे कहती हैं कि शिक्षा सभी समस्याओं का समाधान है. यहां पढ़ाई पर काफी जोर है. हर घर में टेक्निकल एजुकेशन (बीएड, डीएड, आइटीआइ, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग आदि) है. अभी 70 लोग ट्रेनिंग पीरियड में हैं. साक्षरता के कारण विवाद नहीं के बराबर होता है.
80 वर्ष हो गया है, आज तक पेंशन नहीं मिली है
शाम के पांच बजे का वक्त है. हाथ में लाठी लेकर कंबल ओढ़े 80 वर्षीय पूरन करमाली पास आकर यकायक कह उठते हैं. बाबू 80 वर्ष हो गया है. आज तक पेंशन की राशि नहीं मिली है. मुखिया समेत कई लोगों को आवेदन देकर गुहार लगा चुके हैं. कहते हैं पत्नी को भी पेंशन नहीं मिलती है. पेंशन दिलवा दीजिए बाबू.
मिसाल बना गांव, एक भी मामला नहीं

चेटर गांव की छवि काफी साफ-सुथरी है. यहां अमन पसंद लोग हैं. इस गांव का एक भी मामला थाने में दर्ज नहीं है. कभी मामूली विवाद हुआ भी, तो गांव वाले खुद ही सुलझा लेते हैं. अगर कोई थाना पहुंच भी गया, तो थाना और गांव के बुद्धिजीवियों की मध्यस्थता से विवाद का निबटारा कर दिया जाता है. एफआइआर दर्ज करने की नौबत ही नहीं आती है. यह गांव एक मिसाल है----राजेश कुमार, थाना प्रभारी, रामगढ़
गांव की बात गांव में ही, मिल-बैठ कर करते हैं फैसला
72 वर्षीय सेवानिवृत पंचायत सेवक मुटुकराम करमाली कहते हैं कि मारपीट हो या जमीन विवाद. थाना या कोर्ट-कचहरी कोई नहीं जाता. गांव की बात गांव में ही रहे, इसके लिए गांववाले बैठते हैं और मिल-जुल कर उसे सुलझा लेते हैं. दोषी व्यक्ति से जो जुर्माना लिया जाता है, उसे सार्वजनिक कार्यों या गरीब की मदद में खर्च किया जाता है.
घर बने न बने, बच्चा जरूर पढ़ना चाहिए
तमिलनाडु के अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से बीटेक कर चुके अनिकेत ओहदार कहते हैं कि यहां शिक्षा पर जोर है. पहले घर बनाने की बजाय लोग बच्चों को पढ़ाना जरूरी समझते हैं. यही कारण है कि इसी गांव का वैभव ओहदार यूरोप के अर्मेनिया से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है. हर घर में ग्रेजुएट है. गांव काफी सजग है. कोई व्यक्ति यहां शराब पीकर हंगामा करता नहीं दिखेगा.
ये है गुरुजी का गांव
आइटीआइ पास कर चुके दीपक कुमार महतो बताते हैं कि ये गुरुजी का गांव है. यहां हर घर में गुरुजी यानी मास्टर साहब मिल जायेंगे. गांव में 40 सरकारी शिक्षक हैं. 20 प्राइवेट शिक्षक हैं. 10 छात्र इंजीनियरिंग कर रहे हैं. पांच लोगों को खेल कोटे से रेलवे में नौकरी है. कई युवा फोर्स (बीएसएफ, सीआरपीएफ) में भी हैं. थाना क्षेत्र में इस गांव की काफी इज्जत है.