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  • Sep 20 2017 1:06PM

सब्जियों की खेती ने बदल दी एंजेला की जिंदगी

सब्जियों की खेती ने बदल दी एंजेला की जिंदगी
पंचायतनामा डेस्क
राजधानी रांची से 30 किलोमीटर दूर नामकुम प्रखंड के सोदाग पंचायत अंतर्गत एक गांव है हेठडहू. इस गांव की महिला किसान एंजेला मिंज आत्मनिर्भर बन गयी है. एंजेला मिंज को आत्मनिर्भर बनाया है उसकी खेती-बारी ने. खेती-बारी के दम पर एंजेला आज खुशहाली से अपने परिवार के साथ गुजर बसर कर रही है. हैरत की बात यह है कि एंजेला मिंज जिस घर में रहती है, उस घर तक जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है. पतली पगडंडियों और झाड़ियों के बीच से एंजेला के घर जाने का रास्ता निकलता है. हालांकि, गांव में ही एंजेला के पति का पैतृक आवास है, पर खेती करने के कारण उन्हें दूसरे घर में रहना पड़ता है, जो खेतों के नजदीक है.

कैसे हुई शुरुआत 
एंजेला बताती है कि पहले पास में पैसे भी नहीं होते थे और कोई काम भी नहीं था. खेती-बारी करने से भी लाभ नहीं के बराबर होता था. परिवार का भरण-पोषण करने में काफी दिक्कतें आ रही थी. इसी बीच महिला समूह के द्वारा उन्नत खेती की जानकारी मिली. नामकुम और केजीवीके, रूक्का में आधुनिक खेती कैसे की जाती है, इसका प्रशिक्षण किया गया. 

खेती करने के लिए पैसे नहीं थे, तो महिला समूह से लोन लेकर खेती-बारी की शुरुआत की. लगभग एक एकड़ जमीन में एंजेल ने फूलगोभी और टमाटर लगा कर खेती की शुरुआत की. फूलगोभी और टमाटर की पैदावार अच्छी हुई और एंजेला ने अच्छे पैसे भी कमाये. इससे एंजेला का आत्मविश्वास बढ़ा. आज एंजेला अपने सब्जियों को पास के सतरंजी और 10 माइल बाजार में जाकर बेचती है और अच्छे पैसों की आमदनी हो जाती है. खेती करने के लिए एंजेला अन्नपूर्णा मॉडल का उपयोग करती है. अपनी मेहनत और जागरूकता के बल पर आज एंजेला एक सफल कृषक मित्र भी है. अब एंजेला सभी किसानों को उन्नत खेती के बारे में जागरूक भी कर रही है.
 
जैविक खाद का उपयोग बढ़ाएं
कृषि योग्य भूमि की घटती उपज मौजूदा दौर में एक बड़ी समस्या है. रसायनिक खाद का अधिक उपयोग होने के कारण भूमि की उर्वरक क्षमता घटती जा रही है. अधिक उपज पाने के लिए किसान खेतों में बेतहाशा जहर रूपी रसायनिक खाद डाल रहे हैं. इसका दुष्परिणाम भी आना शुरू हो गया है. एंजेला इस बात से बड़ी आहत है. उनका कहना है कि जैविक खाद का ज्यादा-से-ज्यादा इस्तेमाल होना चाहिए और हमें प्रशिक्षण के दौरान यही सिखाया भी जाता है. एंजेला कहती हैं कि जब से उसने जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया, उपज भी बढ़ी और सब्जियों तथा चावल का स्वाद भी बढ़ा है. जैविक खाद बनाने में भी आसानी होती है. आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है और खेतों को नुकसान भी नहीं पहुंचता है. एंजेला अपने खेतों में धनजीवा अमृत डालती है, जो यूरिया का काम करता है. गोबर के उपले बना कर खेतों में डालती है, जो डीएपी का काम करता है. साथ ही पौधों में कीड़े भी नहीं लगते हैं. एंजेला राज्य के किसानों से अधिक-से-अधिक जैविक खाद का ही इस्तेमाल करने की अपील करती है. 
 
एंजेला को है सुविधाएं नहीं मिलने का मलाल
कृषक मित्र एंजेला कहती हैं कि सब्जियों का जितना दाम मिलना चाहिए, उतना नहीं मिल पाता है. कई बार नुकसान का भी सामना करना पड़ता है. आसपास बाजार तो है, लेकिन सब्जियों के उचित दाम नहीं मिल पाने के कारण खेतों में ही सब्जियां खराब हो जाती है. सरकार की ओर से जो सुविधाएं या सहायता किसानों को मिलनी चाहिए, वो नहीं मिल पाती है. फिर भी एंजेला अपनी मेहनत से सब कुछ हासिल कर रही है. 

खेती करने के लिए जमीन है, ट्रैक्टर है और अत्याधुनिक कृषि यंत्र भी है. अब एंजेला अपनी खेतों में ड्रीप एरिगेशन के माध्यम से खेती करने पर जोर दे रही है और इसके लिए काम भी शुरू कर दिया गया है. एंजेला के खेतों में धान और भिंडी की सब्जी लगी हुई है. भिंडी बेच कर एंजेला इस बार दस हजार रुपये कमा चुकी है. आज खेती बारी करके बहुत खुश हैं. बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं. एंजेला के काम में उनके पति पूरा सहयोग करते हैं. बच्चे भी स्कूल से आने के बाद सहयोग करते हैं. एंजेला अपने खेतों में मजदूरों से काम नहीं लेती है. अथक परिश्रम और मेहनत से एंजेला आज अपने क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुकी है. 

प्रकृति के बीच रहना अच्छा लगता है : एंजेला
महिला किसान एंजेला मिंज कहती हैं कि प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है. अभी भी हम प्रकृति के बीच ही रहते हैं. इसलिए हमें प्रकृति से प्रेम करना सीखना होगा. एंजेला के घर और खेतों के आसपास घने पेड़ लगे हैं. इसके कारण वहां रहना उन्हें अच्छा लगता है. अब तो यहां रहकर ही काफी पैसों की आमदनी हो जा रही है, लेकिन पहले जब खेती नहीं करती थी, खेती करने की पूरी जानकारी नहीं थी, तब आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था. हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था. अब हालात बदल गये हैं. कहती हैं कि अब अपने दम पर परिवार चला सकती हूं और आत्मनिर्भर भी बन गयी हूं.