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  • Jun 13 2019 3:53PM

चूल्हा चौका संभालने वाली ग्रामीण महिलाएं कर रहीं मसाले का कारोबार

चूल्हा चौका संभालने वाली ग्रामीण महिलाएं कर रहीं मसाले का कारोबार

गुरुस्वरूप मिश्रा

घर की चौखट के भीतर चूल्हा-चौका संभालने वाली गांव-गिरांव की महिलाएं मसाले का कारोबार कर रही हैं. ग्रामीण महिलाएं और कारोबार? सुनकर यकीन नहीं होता, लेकिन अपने हौसले से रांची जिले के कांके प्रखंड के गारू की पांच महिलाओं ने खुद को साबित कर दिखाया है. कुछ अलग करने की जिद हो और कुशल मार्गदर्शन मिले, तो गांव की महिलाएं हर मिथक तोड़ सकती हैं.

पति से मदद लिए बिना कारोबार
गांव की इन महिलाओं का जज्बा देख दंग रह जायेंगे. आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि इस कारोबार में इन महिलाओं ने अपने पति से आर्थिक सहयोग नहीं लिया है. ये अपना मसाला कारोबार खुद संभाल रही हैं. मसाला के लिए बाजार से कच्चे माल की खरीदारी से लेकर पाउडर बनाने और पैकिंग से लेकर बाजारों में बिक्री भी खुद करती हैं. इस सभी के पति खेती-बारी और मजदूरी करते हैं. बिल्कुल सामान्य घरों की ये महिलाएं प्रेरणा हैं.

कृषि उत्पाद प्रसंस्करण केंद्र में तैयार हो रहे मसाले
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), कांके के खाद्य प्रसंस्करण विभाग के डॉ एसके पांडेय द्वारा प्रशिक्षण (तकनीकी सहयोग) और बीपीडी के सीइओ सिद्धार्थ जायसवाल द्वारा इन्हें बाजार की तकनीकी जानकारी दी गयी. बीएयू की मशीन से ही मई 2018 से महिलाएं मसाला तैयार कर खुद से उसकी बिक्री करने लगीं. इसके बाद इनकी लगन को देखते हुए इनके गांव गारू में 20 जनवरी 2019 को बीएयू द्वारा कृषि उत्पाद प्रसंस्करण केंद्र का विधिवत उद्घाटन किया गया. अब ये अपने गांव में ही मसाला तैयार कर उसकी बिक्री कर रही हैं.

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बाजारों में घूम-घूम कर कीं सर्वे
मसालों की गुणवत्ता और दर निर्धारण का काम आसान नहीं था. इसके लिए इन्हें कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. ये महिलाएं बाजारों में दुकानों में घूम-घूम कर सर्वे कीं. पंडरा, अपर बाजार, रातू रोड, कांके एवं सुकुरहुट्टू बाजार में जाकर जानकारी लीं.

शुरुआत खुद के पैसे से
प्रशिक्षण के बाद कारोबार की बात आयी. पैसे की समस्या थी. इतनी बड़ी रकम कहां से मिलेगी. इन्होंने हिम्मत किया और पांचों सखियों ने एक-एक हजार रुपये लगाकर यानी पांच हजार रुपये से कारोबार शुरू करने का निर्णय लिया.

मशीन के लिए लिया लोन
सखी मंडल की इन महिलाओं ने हेमर मिल (मसाला पीसने) खरीदने के लिए 50 हजार रुपये का लोन लिया. इसी से मसाला पीसती हैं. अब हर महीने दो हजार रुपये लोन का किस्त चुका रही हैं.

पूंजी 5 हजार से हो गयी 50 हजार
एक वर्ष पूर्व इन्होंने पांच हजार रुपये से कारोबार की शुरुआत की थी. इनकी लगन-मेहनत का असर हुआ. आज इनकी पूंजी 50 हजार रुपये हो गयी है. एक वर्ष में करीब 10 गुना. ये इनकी जिद और मेहनत का कमाल है.

बिक्री से बढ़ा है उत्साह
शुरुआत में बाजारों में 50-60 रुपये की बिक्री होती थी. लोगों को इनके मसाले पसंद आये और आज 700-800 रुपये की बिक्री हो जाती है. इससे इनका उत्साह बढ़ा है.

उच्च गुणवत्ता वाले मसाले खाइए
धनिया (राजस्थानी), जीरा (गुजरात कुंज, राजस्थानी), गोलकी (12 नंबर, कर्नाटक), हल्दी (सेलम, तमिलनाडु) और मिर्च (राजस्थानी). ये उच्च गुणवत्ता वाले मसाले हैं, जिसे तैयार कर महिलाएं बाजारों में बेच रही हैं.

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सस्ती दर पर अच्छी क्वालिटी
इनके मसाले न सिर्फ बाजार से सस्ते हैं, बल्कि क्वालिटी भी अच्छी है. आप इनसे मोबाइल नंबर 9162205321, 9661396007 एवं 7070349278 पर संपर्क कर सकते हैं.

मसाला                बाजार (रुपये प्रति किलो)             सखी मंडल (रुपये प्रति किलो)
जीरा                                380                                               350
धनिया                           220-230                                           200
गोलकी                         900-1300                                          800
हल्दी                                280                                                250
मिर्च                                  350                                               300

यहां बेचती हैं मसाले
कांके में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय परिसर, वेटनरी बाजार, गांधीनगर, सीएमपीडीआई, मोरहाबादी में ऑक्सीजन पार्क और अशोक नगर में सुबह छह बजे से आठ बजे तक महिलाएं मसाला बेचती हैं.

प्रगति सखी मंडल की महिलाओं को जानिए
पांच महिलाएं प्रगति सखी मंडल की आधार हैं. मूलो देवी अध्यक्ष हैं. इंटरमीडिएट पढ़ी हैं. रूबी देवी सचिव हैं. मैट्रिक पास हैं. बैजंती देवी कोषाध्यक्ष हैं. इंटरमीडिएट तक पढ़ी हैं. सविता देवी सदस्य हैं. अर्थशास्त्र से एमए की हैं. वह कहने को सदस्य हैं, लेकिन व्यवसाय में उनकी अहम भूमिका है. एक अन्य सदस्य सरिता देवी (इंटरमीडिएट) हैं. ये सभी गृहिणी हैं. पारिवारिक जिम्मेदारियों से इतर ये मसाला कारोबार में भी बेहतर कर रही हैं.

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घर संभालना और कारोबार नहीं था आसान : सविता देवी
प्रगति सखी मंडल की सदस्य सविता देवी कहती हैं कि परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए कारोबार करना आसान नहीं था. स्वावलंबी बनने की जिद थी. बीएयू का सहयोग और मार्गदर्शन मिला,तो पांचों सखियों की एकता रंग लायी. महज पांच हजार रुपये से शुरुआत कर इस मुकाम तक पहुंचने की खुशी है. गांव से ही उनके मसाले की बिक्री हो जाती, तो उनका उत्साह और बढ़ जाता.

प्रेरणा हैं ये ग्रामीण महिला उद्यमी : सिद्धार्थ जायसवाल
बीएयू के बीपीडी विभाग के सीइओ सिद्धार्थ जायसवाल कहते हैं कि ये पांचों ग्रामीण महिलाएं प्रेरणा हैं. इनके पास न बिजनेस की डिग्री है और न मोटी पूंजी. इनके पास है सिर्फ जिद और कड़ी मेहनत की ताकत. इसी का कमाल है कि वह मसाले के कारोबार में लगातार आगे बढ़ रही हैं. घर परिवार को संभालते हुए व्यापार करना आसान नहीं है, लेकिन इन्होंने खुद को साबित कर दिखाया है.