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  • Jan 17 2020 4:29PM

मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों की बोलती दीवारों से पढ़ते हैं गांव के बच्चे, ग्रामीण प्ले स्कूल, जहां दीवारें ही हैं किताब

मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों की बोलती दीवारों से पढ़ते हैं गांव के बच्चे, ग्रामीण प्ले स्कूल, जहां दीवारें ही हैं किताब
अनगड़ा के नारायण सोसो गांव का मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र

गुरुस्वरूप मिश्रा
जिला : रांची 

आंगनबाड़ी केंद्र. नाम सुनते ही आंखों के सामने गांव के धूलधुसरित ऐसे भवन की छवि उभरती है, जिसके गेट हमेशा खुले रहते हैं और आस-पास गंदगी पसरी रहती है. अगर अब भी आपके जेहन में ऐसी ही तस्वीरें तैर रही हैं, तो आकर्षक मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों की खूबसूरती देख आप दंग रह जायेंगे. आपको सहसा यकीन ही नहीं होगा. खेत-खलिहान और हरे-भरे पेड़ों के बीच ग्रामीण परिवेश में शहरी प्ले स्कूल की तरह बोलती दीवारें देख आप ठिठक जायेंगे. ये सिर्फ दीवारें नहीं हैं, बल्कि गांव के मासूम बच्चों के लिए किताबें हैं, जो इनका ज्ञान बढ़ाती हैं.

प्ले स्कूल यानी खेल-खेल में पढ़ाई. शहरों में आपने प्ले स्कूल देखे होंगे. स्कूलिंग से पहले नर्सरी स्कूल में जाते छोटे-छोटे बच्चे देखे होंगे, लेकिन झारखंड के गांवों में ढूंढने पर भी प्ले स्कूल नजर नहीं आयेंगे. गांव के बच्चे भी प्ले स्कूल में पढ़ सकें, इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को विकसित कर मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र बनाया जा रहा है, ताकि वे भी शहरी बच्चों की तरह खेल-खेल में पढ़ाई कर सकें. ग्रामीण परिवेश में आकर्षक भवन देखकर आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन ये मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जहां गांव के बच्चे बैग और कॉपी-किताब लेकर नहीं आते हैं, बल्कि दीवारें ही इनका ज्ञान बढ़ाती हैं.

शिक्षा के साथ मनोरंजन

दीवारें महज जमीनों का बंटवारा ही नहीं करतीं, बल्कि आपका ज्ञान भी बढ़ाती हैं. ये किताबों से कम नहीं हैं. आपको भरोसा नहीं हो तो रांची जिले के अनगड़ा प्रखंड के अनगड़ा, महेशपुर, सोसो नवागढ़, नवागढ़ एवं बड़की गोड़ांग समेत अन्य मॉडल आंगनबाड़ियों केंद्रों को देख आइए. ये आपका नजरिया बदल देंगे. आकर्षक चित्रकारी से पटी दीवारें न सिर्फ शिक्षा देती हैं, बल्कि मनोरंजन भी करती हैं.

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खेलकूद के साथ पढ़ाई

खूबसूरत तस्वीरों के साथ हिंदी व अंग्रेजी वर्णमाला, विभिन्न रंगों और शरीर के अंगों के नाम, दिन-महीने व ऋतुओं के नाम, जानवरों व पक्षियों की तस्वीरें, तारामंडल एवं कार्टून के जरिए अंकों की जानकारी देती दीवारें बरबस बच्चों को मोह लेती हैं. प्लास्टिक की छोटी-छोटी कुर्सियां, टेबल व ब्लैकबोर्ड भी आकर्षक हैं. खेलकूद के सामान भी इनका मन बहलाते हैं. सच कहें, तो यहां आते ही बच्चे अलग दुनिया में खो जाते हैं. इस कारण बच्चे आने के बाद घर जाने का नाम नहीं लेते.

लुक देख ठहर जायेंगे

तारीख-आठ जनवरी. समय-दोपहर 12 बजे. रांची के अनगड़ा प्रखंड के मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र, नारायणसोसो का लुक देख ठहर गया. बाहर बच्चों की मांएं खड़ी हैं. अंदर बच्चे खेलकूद कर रहे हैं. प्लास्टिक की रंग-बिरंगी छोटी-छोटी कुर्सियों पर बैठे बच्चे दीवारों को निहार रहे हैं, जहां न सिर्फ हिंदी बल्कि अंग्रेजी वर्णमाला के साथ-साथ अन्य कई जानकारियां रोचक तस्वीरों के जरिये दी गयी हैं. यहां 24 बच्चे नामांकित हैं, जबकि 22 बच्चे मौजूद थे. इन बच्चों को भोजन कराया गया. इससे पहले इन्हें नाश्ता (दलिया/सत्तू) दिया गया था. सेविका मीना देवी व सहायिका फुतिया देवी हैं.

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सुविधाएं मिलें, तो बनेगा मॉडल सेंटर

सेविका मीना बताती हैं कि बच्चे सबसे पहले प्रार्थना करते हैं. इसके बाद कसरत करते हैं फिर अक्षर ज्ञान कराया जाता है. दिन के हिसाब से इन्हें अपना परिचय, आकार का ज्ञान, रंगों का ज्ञान, कविता, कहानी व गीत समेत अन्य बातें बतायी जाती हैं. बच्चे काफी खुश रहते हैं. हर माह दूसरे गुरुवार को चार श्रेणी के करीब 100 लाभुकों (गर्भवती महिलाएं-18, धातृ महिलाएं-15 और बच्चे-63) को टीएचआर (टेक होम राशन) के तहत पोषाहार (चावल, दाल, गुड़, आलू, बादाम) दिया जाता है. पहले रेडी टू इट दिया जाता था. अब महिला समूह की दीदियां पैकिंग कर आंगनबाड़ी में पोषाहार पहुंचा रही हैं. इस केंद्र पर मिट्टी के चुल्हे पर लकड़ी से भोजन पकता है. गैस सिलेंडर के साथ अन्य जरूरी सुविधाएं मिल जाएं, तो ये गांव का मॉडल सेंटर होगा.

बेस्ट सेविका का नेशनल अवार्ड

सिरका पंचायत के मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र, महेशपुर को देखेंगे, तो नजरें ठहर जायेंगी. बिल्कुल मॉडल स्कूल के माफिक लुक है. सेविका इसरत जहां कहती हैं कि बच्चे पहले से ज्यादा उत्साहित हैं. यहां 29 बच्चे नामांकित हैं. वर्ष 2001 में इन्हें टीकाकरण, कुपोषण प्रबंधन समेत अन्य सेवाओं के लिए बेस्ट सेविका का नेशनल अवार्ड मिल चुका है.

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गांव का प्ले स्कूल देखिए

बड़की गोड़ांग, सोसो नवागढ़ और नवागढ़ मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र को देखेंगे, तो मन प्रसन्न हो जायेगा. गांव के बच्चों की खुशियों का क्या कहना. यहां आते ही वे मंत्रमुग्ध हो दीवारों को निहारते रह जाते हैं. खेलते भी हैं और पढ़ते भी हैं. बड़की गोड़ांग का सेंटर देखेंगे, तो सुविधाएं देख चकित रह जायेंगे. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के तत्कालीन प्रधान सचिव डॉ सुनील वर्णवाल ने नवागढ़ को गोद लिया था. उन्होंने इन आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाई. लगातार मॉनिटरिंग की. इनके प्रयास का असर दिखा. यहां के बच्चों को ड्रेस और जूता-मौजा भी दिया गया था. कुछ केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं, तो इसकी खूबसूरती और बढ़ जायेगी.

बच्चों के साथ-साथ मांओं में भी उत्साह

अनगड़ा प्रखंड की सीडीपीओ उमा सिन्हा बताती हैं कि प्रखंड में 155 आंगनबाड़ी केंद्र हैं. इनमें 27 मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जबकि 20 केंद्रों पर कार्य प्रगति पर है. खुशनुमा माहौल से बच्चों के साथ-साथ मांएं भी उत्साहित हैं. वर्ष 2018-19 में पोषण अभियान में बेहतर प्रदर्शन के लिए लीडरशिप एंड कन्वर्जेंस की श्रेणी में झारखंड में अनगड़ा प्रखंड का चयन हुआ और उन्हें पुस्कार मिला है.

मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों का दिखने लगा असर : सुमन सिंह

रांची की जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुमन सिंह बताती हैं कि मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों में बेंच, डेस्क व खेल के सामान समेत अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से प्रयास किये जा रहे हैं. जिले के 2,832 आंगनबाड़ी केंद्रों में 658 केंद्रों को मॉडल सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है. बच्चों समेत अन्य लाभुकों में इसका असर दिखने लगा है.