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  • Apr 3 2018 12:31PM

झारखंड के 19 हजार दुग्ध उत्पादकों से मेधा रोजाना ले रहा 1.30 लाख लीटर दूध

झारखंड के 19 हजार दुग्ध उत्पादकों से मेधा रोजाना ले रहा 1.30 लाख लीटर दूध

पंचायतनामा डेस्क

दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में झारखंड मिल्क फेडरेशन तेजी से प्रगति कर रहा है. छोटे-छोटे किसानों को दूध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके लिए उन्हें कई तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं. गांव में ही उनसे दूध लेकर उन्हें उचित राशि का भुगतान किया जा रहा है. इससे न सिर्फ दुग्ध उत्पादकों का उत्साह बढ़ा है, बल्कि दूध उत्पादन में भी वृद्धि हुई है. 15 जिलों के 19 हजार किसान रोजाना 1.30 लाख लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं. ये मेधा के रूप में बाजार में बिक रहा है.

पारदर्शिता से दुग्ध उत्पादकों में बढ़ा भरोसा
झारखंड मिल्क फेडरेशन के जीएम (महाप्रबंधक) नरेंद्र शर्मा बताते हैं कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड व राज्य सरकार के बीच एमओयू के बाद वर्ष 2014 में राजधानी रांची के होटवार में झारखंड मिल्क फेडरेशन (मेधा) की स्थापना हुई. इसके जरिये छोटे-छोटे दुग्ध उत्पादकों से घर बैठे दूध लेकर उन्हें उचित मूल्य देते हुए समृद्ध करना था. छोटे दुग्ध उत्पादकों को दूध बेचने की समस्या से छुटकारा दिलाना था. किसान खुद अपनी तकदीर लिख सकें. इसमें उन्हें सहयोग करना था. इसके लिए गांवों में ही डाटा प्रोसेसर मिल्क कलेक्शन (डीपीएमसी) टेस्टिंग मशीन लगायी गयी. इससे दुग्ध उत्पादकों को भरोसा दिलाते हुए पारदर्शी तरीके से दूध लिया जाने लगा. इस मशीन से ही दूध की कीमत तय होती है. पारदर्शिता का ही कमाल है कि आज दुग्ध उत्पादकों का भरोसा बढ़ा है.

1.30
लाख लीटर दूध की खरीदारी, 80 हजार लीटर की बिक्री
नरेंद्र शर्मा के मुताबिक, वर्ष 2014 के शुरुआती दिनों में 12 हजार लीटर दूध की खरीदारी होती थी. धीरे-धीरे किसानों में जागरूकता आयी. उन्हें भरोसा हुआ कि अब दूध बेचने की समस्या नहीं है. उनका दूध घर बैठे बिक जायेगा, तो उन्होंने गौपालन पर जोर दिया. श्वेत क्रांति की दिशा में ग्रामीण क्षेत्र के दुग्ध उत्पादकों ने कदम बढ़ाना शुरु किया. महज चार साल में ही बदलाव दिखने लगा. इन दिनों राज्य के 15 जिलों से रोजाना 1.30 लाख लीटर दूध की खरीदारी की जा रही है. इनमें 90 फीसदी दूध गाय के होते हैं. 80 हजार लीटर की दूध की रोजाना बिक्री होती है. शेष दूध की अन्य सामग्रियां जैसे घी, दही, पनीर व लस्सी बनाकर बेची जाती हैं.

19
हजार दुग्ध उत्पादकों को मिल रही आर्थिक मजबूती
फिलहाल राज्य के 15 जिलों के 19 हजार दुग्ध उत्पादक किसानों से मेधा दूध खरीद रहा है. इनमें रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, लोहरदगा, लातेहार, गढ़वा, पलामू, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, देवघर, दुमका और गोड्डा जिले के दुग्ध उत्पादक शामिल हैं.

झारखंड में हैं चार डेयरी प्लांट
झारखंड में चार डेयरी प्लांट हैं. रांची के होटवार में 1.25 लाख लीटर दूध संग्रह करने की क्षमता वाला मिल्क प्रोसेसिंग डेयरी प्लांट है. इसके अलावा होटवार में पशु आहार कारखाना व मिनरल मिक्सचर प्लांट भी स्थापित है.
जिलावार डेयरी प्लांट व उसकी क्षमता
जिला क्षमता
रांची 1.25 लाख लीटर
कोडरमा 10 हजार लीटर
देवघर 10 हजार लीटर
लातेहार 10 हजार लीटर

मेधा के नाम से बिकता है 1800 गांवों का दूध
झारखंड मिल्क फेडरेशन के जीएम नरेंद्र शर्मा कहते हैं कि झारखंड के ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों से जो दूध लिए जाते हैं, उन्हें अपने डेयरी प्लांटों में प्रोसेसिंग करने के बाद झारखंड मिल्क फेडरेशन मेधा दूध के नाम से बेचता है. दूध राज्य के 15 जिलों के 1800 गांव और 19 हजार दुग्ध उत्पादकों से लिए जाते हैं. इसके लिए 600 पुलिंग प्वाइंट बनाये गये हैं, जहां दूध मित्र दूध संग्रह करने का कार्य करते हैं. पारदर्शिता और गुणवत्ता के लिए राज्यभर में 400 टेस्टिंग मशीन लगायी गयी है, जहां फैट और एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) के आधार पर किसानों को डीबीटी के जरिये हर 10 दिन पर दूध की कीमत दी जाती है. 65 बल्क मिल्क कुलिंग सेंटर और चार डेयरी प्लांट हैं. मेधा दूध समेत अन्य उत्पादों की बिक्री के लिए प्रदेश में 70 डिस्ट्रिब्यूटर हैं. 50 एक्सक्लूसिव मेधा बूथ और तीन हजार रिटेल आउटलेट हैं.

पड़ोसी राज्यों से दी जा रही है ऊंची कीमत
प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को फेडरेशन दूध के एवज में पड़ोसी राज्यों से ऊंची कीमत दे रहा है. यहां के दुग्ध उत्पादकों को दूध की कीमत पश्चिम बंगाल, बिहार और ओड़िशा से ज्यादा दी जाती है.

तीन तरह का है मेधा दूध, एक्सपायरी डेट देख कर ही लें
मेधा दूध टोंड मिल्क (38 रुपये लीटर), काऊ मिल्क (40 रुपये लीटर), स्टैंडर्ड मिल्क (42 रुपये लीटर) एवं शक्ति स्पेशल (42 रुपये लीटर) के रूप में बाजार में बिकता है. स्टैंडर्ड मिल्क में फैट 4.5 प्रतिशत है. काऊ मिल्क में 3.5 प्रतिशत और टोंड मिल्क में 3 प्रतिशत फैट है. एफएसएसआइ के मुताबिक, खाद्य पदार्थों पर एक्सपायरी डेट ही लिखना है. पाउच पर लिखी तारीख के बाद का दूध नहीं लें.

दुग्ध उत्पादकों का भरोसा ही है ताकत : नरेंद्र शर्मा
झारखंड मिल्क फेडरेशन के जीएम नरेंद्र शर्मा कहते हैं कि राज्य के 19 हजार दुग्ध उत्पादक ही झारखंड मिल्क फेडरेशन की ताकत हैं. चार साल में आज 1.30 लाख लीटर रोजाना दूध का उत्पादन उनकी मेहनत का ही नतीजा है. दूध उत्पादन में वृद्धि के जरिये श्वेत क्रांति की दिशा में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है.

आंकड़ों में झारखंड मिल्क फेडरेशन (मेधा)
जिला 15
गांव 1800
दुग्ध उत्पादक 19 हजार
पुलिंग प्वाइंट 600
दूध मित्र 600
टेस्टिंग मशीन 400
बल्क मिल्क कुलिंग सेंटर 65
डेयरी प्लांट 04
रोजाना दूध की खरीदारी 1.30 लाख लीटर
रोजाना दूध की बिक्री 80 हजार लीटर
एक्सक्लूसिव मेधा बूथ 50
रिटेल आउटलेट 3000
डिस्ट्रीब्यूटर 70