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  • Jan 28 2018 6:30PM

कुल्हाड़ी के खिलाफ जंग ने बचायी हरियाली

कुल्हाड़ी के खिलाफ जंग ने बचायी हरियाली

दीपक सवाल

प्रखंड कसमार

जिला बोकारो


बोकारो जिले के कसमार प्रखंड का हिसीम जंगल वन सुरक्षा के मामले में आज आदर्श है. हिसीम के जगदीश महतो की अथक मेहनत और कई दशकों के संघर्ष का ही नतीजा है कि इन जंगलों की हरियाली लौट आयी है. करीब तीन दशक पूर्व हिसीम पहाड़ और इसकी तलहटी के जंगलों को वन माफियाओं ने ग्रामीणों को भरोसे में लेकर साफ कर दिया गया था. इस दौरान कटे पड़ों की ठूंठें भी नहीं बख्शी जा रही थीं. लोग उन पर भी कुल्हाड़ियां चला रहे थे. ऐसे में जगदीश महतो के एक भी पेड़ पर कुल्हाड़ी न चलने देने के संकल्प के साथ शुरू हुए अभियान ने जंगलों की हरियाली लौटाने में अहम भूमिका निभायी.

संकट में लिया पेड़ों की सुरक्षा का संकल्प
जंगलों के विनाश के लिए इलाके में सक्रिय वन माफियाओं के साथ-साथ ग्रामीण भी जिम्मेदार थे. रोजगार के अभाव में रोजी-रोटी के लिए जूझते ग्रामीण वन माफियाओं के पक्ष में हो गये थे. ग्रामीणों में वनों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता तब आयी, जब जंगल लगभग खत्म हो गये और कटे पेड़ों की ठूंठों को भी उखाड़ने की नौबत आ गयी. 31 अक्तूबर 1984 को हिसीम पहाड़ पर बसे चारों गांव हिसीम, केदला, गुमनजारा और त्रियोनाला के ग्रामीण हिसीम के मध्य विद्यालय प्रांगण में जुटे और विचार-विमर्श के बाद वनों की सुरक्षा का संकल्प लिया. जगदीश महतो ने इसकी कमान संभाली.

जगदीश महतो व समिति की सूझबूझ काम आयी
जंगलों को काट कर मोटी कमाई करनेवाले माफियाओं ने दूसरे गांवों के लोगों को वन रक्षा अभियान के खिलाफ उकसाया. उनके इशारे पर अभियान के विरोध में उतरे दूसरे गांव के लोग पहाड़ पर बसे ग्रामीणों को नीचे उतरने से रोकने लगे. नीचे उतरने पर वह पहाड़वालों को परेशान करने लगे. एक ओर जंगल बचाने को लेकर पहाड़ पर बसे ग्रामीणों का अभियान था, तो दूसरी ओर वन माफियाओं का पूरा तंत्र सक्रिय था. इस विकट परिस्थिति में जगदीश महतो व समिति की सूझबूझ काम आयी. अभियान के खिलाफ उकसाये गये ग्रामीणों को भी वन रक्षा अभियान में शामिल करने की मुहिम चलायी गयी.

425
गांवों में फैला वन सुरक्षा अभियान
धीरे-धीरे वन सुरक्षा अभियान ने बड़ा रूप ले लिया और कसमार से निकल कर उत्तरी छोटानागपुर के लगभग 425 गांवों में वन सुरक्षा समितियां गठित की गयीं. केंद्रीय वन पर्यावरण सुरक्षा सह प्रबंधन समिति के तहत यह अभियान आज भी चल रहा है. जगदीश महतो केंद्रीय समिति के अध्यक्ष हैं. इस अभियान में श्री महतो को काफी संघर्ष और यातनाएं भी झेलनी पड़ी हैं. इसके बावजूद जगदीश अपने उद्देश्य से कभी पीछे नहीं हटे.

जनता ने किया जगदीश के जज्बे को सलाम
जगदीश महतो एक साधारण किसान परिवार से आते हैं. इस अभियान में उन्हें कई बार मवेशी, बीवी के गहने और यहां तक की अपनी जमीन बेचनी पड़ी थी. इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने अभियान में जुटे रहे. इनके नेतृत्व में पेड़ों में रक्षा बंधन का कार्यक्रम भी बीते दो दशक से अलग-अलग जंगलों में आयोजित होता आ रहा है. इनके संघर्ष के बल पर आज जंगलों के पेड़ लहलहा रहे हैं. इनके जज्बा और जुनून को हर कोई सलाम करता है. वन विभाग भी इनके योगदान को स्वीकारता है. जगदीश अपने इसी जुनून के कारण कई जगहों पर सम्मानित भी हो चुके हैं. इनके संघर्ष का ही परिणाम है कि इस बार के पंचायत चुनाव में क्षेत्र की जनता ने उन्हें भारी मतों से जिला परिषद का सदस्य निर्वाचित किया.