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  • Sep 18 2019 5:01PM

मुंबई तक है दिरीगड़ा की सुंदरता की धमक

मुंबई तक है दिरीगड़ा की सुंदरता की धमक

पंचायतनामा टीम
प्रखंड: खूंटी
जिला: खूंटी 

ऐसा है न सर, हमारा गांव साफ और सुंदर है. गांव को साफ व सुंदर रखने की परंपरा पुरखों से चली आ रही है. इस गांव को लोग भले ही नाम से नहीं जानते हैं, लेकिन गांव की स्वच्छता व सुंदरता की धमक बंबई तक है. इस गांव में फिल्म की शूटिंग होती है. इतना बताते हुए चामू मुंडा का चेहरा गर्व से खिल उठता है. राजधानी रांची से करीब 70 किलोमीटर दूर कांची नदी के तट पर बसा दिरीगड़ा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपने को आज भी साकार कर रहा है. ऊंचे पहाड़, घने जंगल और गांव के किनारे से कल-कल कर बहती कांची नदी. प्रकृति ने इस गांव को बेमिसाल खूबसूरती प्रदान की है. साफ-सुथरी सड़कें, साफ-सुथरा आंगन और लाल मिट्टी से बने खपरैल मकान इस गांव की खूबसूरती को चार चांद लगा देते हैं. खूंटी और रांची जिले के बीच कांची नदी के तट पर बसा दिरीगड़ा तारूब गांव का एक टोला है. यह तिलमा पंचायत के अंतर्गत आता है. 20 घरों वाले दिरीगड़ा की आबादी लगभग 150 है. गांव में सिर्फ मुंडा जाति के लोग निवास करते हैं.

गांव में प्रवेश करते ही होता है सुखद एहसास
दिरीगड़ा पहाड़ की तलहट्टी पर बसा है. यहां तक पहुंचने के लिए घने जंगल और ऊंचे पहाड़ों से होकर गुजरना पड़ता है. जैसे ही ढलान खत्म होने के साथ आप गांव में प्रवेश करते हैं. एक सुखद एहसास होता है. गांव में प्रवेश करते ही समतल रास्ता मिलता है. सड़क के किनारे मिट्टी की ऊंची-ऊंची दीवारों वाले खपरैल मकान हैं. बाहरी दीवारें एकदम साफ दिखाई देती हैं. बारिश के मौसम में भी यहां सड़कों पर पानी नहीं बहता है. कीचड़ का नामोनिशान नहीं है. कुछ सड़क पीसीसी हैं और कुछ बालू से बनायी गयी हैं. गांव में नाली नहीं है, फिर भी पानी सड़क पर नहीं बहता.

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साफ-सफाई पर रहता है विशेष ध्यान
सभी ग्रामीण अपने घर और आसपास को हमेशा साफ रखते हैं. यही दिरीगड़ा की स्वच्छता और साफ-सफाई का मूलमंत्र है. ग्रामीण इधर-उधर कचरा नहीं फेंकते हैं. कचरा फेंकने के लिए एक खास जगह निर्धारित है, जहां जाकर कचरा फेंकते हैं. इससे घर के अासपास गंदगी नहीं फैलती है. इतना ही नहीं, गांव के बच्चों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाता है. गांव के युवा भी स्वच्छता को लेकर काफी जागरूक हैं. कहते हैं जब गांव साफ रहेगा, तब ही बाहर से लोग यहां आयेंगे. अधिक से अधिक फिल्मों की शूटिंग होगी. इससे ग्रामीणों को ही फायदा होगा.

हर गुरुवार होती है ग्रामसभा
यहां नियमित ग्रामसभा होती है. इसमें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती है. ग्रामसभा में गांव को साफ-सुथरा रखने पर विचार-विमर्श होता है. श्रमदान के जरिये ग्रामीण गांव की साफ-सफाई करते हैं. गांव में कहीं भी घर के आस-पास पानी जमा नहीं होने दिया जाता है. गांव की सड़कें भी श्रमदान से बनी हैं. इससे आवागमन सुलभ हुआ है. सड़क नहीं रहने के कारण पहले गांव से बाहर जाने के लिए पहाड़ पर बनी पगडंडी ही एकमात्र सहारा थी. अब सड़क बन जाने से ग्रामीणों को काफी राहत मिली है.

आधा-अधूरा शौचालय निर्माण से परेशानी
साफ-सफाई के प्रति लोग जागरूक तो हैं, लेकिन शौचालय का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है. 20 घरों के लिए 20 शौचालय तो बना दिये गये, लेकिन कोई भी शौचालय पूरा नहीं बना हैै. किसी का दरवाजा नहीं है, तो किसी में पैन नहीं. किसी का शॉकपिट नहीं, तो किसी की छत नहीं है. ग्रामीणों के पास इतने पैसे नहीं है कि वो खुद से शौचालय बना सकें. इसलिए उन्हें मजबूरन खुले में शौच जाने को बाध्य होना पड़ता है.

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गांव में बना फिल्म का सेट
दिरीगड़ा में एक फिल्म का सेट बनाया गया है. एक मिट्टी का मकान है. बांस से घेरा गया बड़ा सा आंगन है. घर की छप्पर पुआल से बनी है. आंगन में फिल्म की शूटिंग के लिए डमी कुआं बना हुआ है. ग्रामीण बताते हैं कि जब फिल्म की शूटिंग पूरी होती है, तो पूरा सेट गंदा हो जाता है. ग्रामीण खुद उसकी सफाई करते हैं. सकुशल मंगल समेत दो फिल्मों की शूटिंग यहां पर हो चुकी है. इसके अलावा यहां फिल्म जंगल की शूटिंग भी होनी है.

हमारा गांव है, इसे हमें ही साफ रखना पड़ेगा : बसंती देवी
ग्रामीण बसंती देवी कहती हैं कि यह गांव हमारा है. इसे साफ रखेंगे, तो हमें ही फायदा होगा. गंदा रखेंगे, तो हमें ही नुकसान उठाना पड़ेगा. इसलिए गांव को साफ रखना हम सभी ग्रामीण अपनी जिम्मेदारी मानते हैं. अपने घर के आस-पास साफ-सफाई रखते हैं.

ग्रामसभा से मिलती है ताकत : श्याम लाल मुंडा
वार्ड सदस्य श्याम लाल मुंडा ने कहा कि ग्रामसभा ही हमारी ताकत है. हर गुरुवार को सभी ग्रामीण ग्रामसभा की बैठक में पहुंचते हैं. गांव की बेहतरी के लिए अपनी राय देते हैं और विकास के लिए कार्य करने का संकल्प लेते हैं.

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पानी की समस्या है : शालू देवी
शालू देवी ने बताया कि गांव में पेयजल की गंभीर समस्या है. मात्र एक चापाकल है, जिसका पानी पीने योग्य नहीं है. बारिश के मौसम में परेशानी बढ़ जाती है. नदी का पानी पीना पड़ता है. सभी ग्रामीण पानी गर्म करके पीते हैं.

स्वच्छता की सीख को आगे बढ़ायेंगे : राम मुंडा
बुंडू में रहकर पढ़ाई कर रहे राम मुंडा ने कहा कि उन्हें अपने गांव का स्वच्छ माहौल अच्छा लगता है. गांव सुंदर और साफ है, इसलिए लोग बाहर से फिल्म की शूटिंग करने के लिए हमारे गांव आते हैं. इससे हमें नयी चीजें सीखने को मिलती हैं.

स्वच्छता से मिल रहा रोजगार : सरिता मुंडा
गांव में मजदूरी के अलावा रोजगार का दूसरा कोई साधन नहीं है. शहर दूर है. इसलिए परेशानी होती है. फिल्म की शूटिंग के दौरान ग्रामीणों को कुछ समय के लिए काम मिल जाता है. यही कारण है कि गांव को स्वच्छ रखते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा फिल्म की शूंटिग यहां हो सके और हमें काम मिल सके.