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  • Apr 2 2019 5:56PM

घरों तक रोजाना पहुंच रहा करीब 200 लीटर दूध

घरों तक रोजाना पहुंच रहा करीब 200 लीटर दूध

पवन  कुमार
रांची

सेहत के लिए दूध जरूरी है. अगर यह शुद्ध नहीं मिले, तब सेहत पर इसका क्या असर होगा. हर घर में शुद्ध दूध पहुंचे, इसे ध्यान में रख कर दो युवा इंजीनियर पीयूष और आदित्य ने दुग्ध व्यवसाय में स्टार्टअप की शुरुआत की. कृषि, गौ पालन और संचार क्रांति की नयी तकनीक के साथ रांची के दो युवा घर- घर दूध पहुंचाने में जुटे हैं.

कैसे हुई शुरुआत
प्योरेश के संस्थापक सदस्य मनीष पीयूष ने बीआइटी मेसरा से बी टेक और आइआइएम इंदौर से मार्केटिंग में एमबीए किया है. उनके दोस्त आदित्य कुमार भी बीआइटी मेसरा से बीटेक हैं. दोनों मल्टीनेशनल कंपनियों में काम कर चुके हैं. इन दोनों को वहां मन नहीं लगा. दोनों दोस्त वापस रांची आ गये और कुछ करने का निर्णय लिया. काफी रिसर्च के बाद उन्होंने पाया कि रांचीवासियों को शुद्ध दूध नहीं मिल पा रहा है, जबकि लोग अधिक दाम देने के लिए भी तैयार हैं. दोनों ने दुग्ध व्यवसाय करने के बारे में विचार किया. ओरमांझी में मनीष के पिता के पास जमीन थी, जहां पर पहले से गौ पालन होता था. सबसे पहले दोनों ने एक एप बनाया. इसके बाद इसी एप के माध्यम से वे घर-घर दूध पहुंंचा रहे हैं. यह दूध 55 से लेकर 65 रुपये प्रति लीटर है. फिलहाल डेयरी से हर रोज करीब दो सौ लीटर दूध की बिक्री हो रही है.

इस तरह से रखी जाती है शुद्धता
एक मॉडल डेयरी के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए टीम कार्य कर रही है. गाय के चारे से लेकर गाय का दूध तक जैविक रखने पर जोर है. दरअसल डेयरी से निकलने वाले गोबर से केंचुआ खाद बनायी जाती है और उसी खाद से गाय के लिए हरा चारा, गाजर, लहसुन, प्याज, हल्दी और घास उगाया जाता है. इसमें खाद का उपयोग नहीं होता. फार्म में ही प्रोटीनयुक्त हारा चारा अजोला का भी उत्पादन किया जाता है. गर्मियों के मौसम में हरा चारा को लेकर हाइड्रोफोनिक्स तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. गाय को प्राकृतिक हल्दी और लहसुन जैसी चीजें खिलायी जाती हैं, ताकि गाय निरोग रहें. दूध को दो घंटे के अंदर ग्राहकों तक पहुंचा दिया जाता है.

कैसे काम करता है एप
इस एप के माध्यम से ग्राहक हर रोज अपनी जरूरत के हिसाब से दूध की मात्रा कम या ज्यादा कर सकते हैं. इससे दूध की बर्बादी नहीं होती है और ग्राहकों का पैसा भी बच जाता है. अपने दूध का हिसाब-किताब भी रख सकते हैं. दूध की गुणवत्ता बनी रहे और रास्ते में दूध में मिलावट न हो सके, इसके लिए दूध को शीशे के बोतल में सील पैक किया जाता है. इसके साथ ही कॉल सेंटर के माध्यम से ग्राहक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. ग्राहकों से फीडबैक भी लिया जाता है. ग्राहकों को भी त्योहार से पहले दूध की उपलब्धता से संबंधित जानकारी एप के माध्यम से मिल जाती है.

दूध घाटे का कारोबार नहीं है : मनीष पीयूष
प्योरेश के संस्थापक मनीष पीयूष कहते हैं कि एप के माध्यम से शुद्ध दूध बेचने का आइडिया विदेश में रहते हुए आया. इससे किसानों को भी लाभ होगा. हमारा प्रयास है कि डेयरी उद्योग को आधुनिक तकनीक के जरिये मॉडल उद्योग की तरह विकसित करें, ताकि किसानों को इससे लाभ मिले और ग्राहकों को शुद्ध दूध मिल सके. उन्हें मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान भी मिल चुका है.

शुद्ध दूध हर घर तक पहुंचाने का लक्ष्य : आदित्य कुमार
प्योरेश के एक अन्य संस्थापक सदस्य आदित्य कुमार कहते हैं कि उनका लक्ष्य लोगों तक शुद्ध दूध पहुंचाना है. वे चाहते हैं कि किसान आत्मनिर्भर बनें. इसके लिए उन्हें तकनीक के माध्यम से दूध उत्पादन से जोड़ा जायेगा. डेयरी उद्योग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उद्योग का कोई वेस्ट प्रोडक्ट नहीं होता. गोमूत्र और गोबर का भी इस्तेमाल हो जाता है. गौ सेवा का सुख भी मिल जाता है.