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  • Oct 2 2018 10:32AM

स्वच्छता के कारण जामटोली के ग्रामीणों की सोच में आया बदलाव

स्वच्छता के कारण जामटोली के ग्रामीणों की सोच में आया बदलाव

प्रखंड : बेड़ो
जिला : रांची 

राजधानी रांची से लगभग 40 किलोमीटर दूर हरे-भरे जंगल और खूबसूरत वादियों के बीच बसी है बेड़ो प्रखंड की हरिहरपुर जामटोली पंचायत. आदिवासी बहुल इस पंचायत को रांची जिले की दूसरी और बेड़ो प्रखंड की पहली ओडीएफ पंचायत होने का गौरव प्राप्त है. पंचायत में सौ फीसदी शौचालय का निर्माण हुआ है और सभी ग्रामीण उसका इस्तेमाल भी करते हैं. आज सफाई के कारण ही ग्रामीण कम बीमार पड़ते हैं और डॉक्टरों के यहां भीड़ कम होती है. गांवों की सड़कें साफ रहती हैं. स्वच्छता के कारण ग्रामीणों की सोच में भी बदलाव आया है. ग्रामीण अपने बच्चों को हमेशा अपने आसपास साफ-सफाई रखने की बात बताते रहते हैं. करीब 70 फीसदी जंगलों से घिरी इस पंचायत की आबादी नौ हजार है. इस पंचायत में 16 वार्ड और नौ राजस्व गांव हैं.

स्वच्छता के प्रति लोगों को किया जाता है जागरूक
जामटोली गांव के घरों के बाहर दीवार लेखन के जरिये ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाता है. गांव के घरों की दीवारों में स्वच्छता संबंधी स्लोगन लिखे हुए हैं. ग्रामीण स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत दीवारों पर लेखन किया गया है. ग्रामसभा के जरिये लोगों को जागरूक किया जाता है. स्कूली बच्चों के द्वारा प्रभात फेरी निकाली जाती है और स्वच्छता संबंधी नारे लगाये जाते हैं, जिसका खासा असर भी दिखता है. बच्चों को खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने के लिए प्रेरित किया जाता है. लोग खुद की साफ-सफाई पर पूरा ध्यान देते हैं. स्कूली बच्चे भी अब नहा-धोकर और साफ कपड़े पहन कर स्कूल जाते हैं. पंचायत के गांवों में सभी घर और आंगन साफ दिखते हैं.

अब गांव से नहीं आती है डायरिया की शिकायत
वर्ष 2004-05 में पंचायत के बोदा गांव में डायरिया से लगभग 25 ग्रामीणों की मौत हो गयी थी, लेकिन अब गांव से एक भी डायरिया की शिकायत नहीं आती है. मुखिया के मुताबिक, पहले जून-जुलाई और सितंबर-अक्तूबर के महीने में डॉक्टरों के यहां मरीजों की भीड़ रहती थी, पर अब गांव में न के बराबर लोग बीमार पड़ते हैं. गांव के लोग घर के आस-पास पानी जमा नहीं होने देते हैं, जिसके कारण मलेरिया से भी बचे रहते हैं, हालांकि वन क्षेत्र होने के कारण कभी-कभार मलेरिया की एक-दो शिकायतें आ जाती हैं.
पहले बारिश के मौसम में रहना होता था मुश्किल
पहले जामटोली के ग्रामीण स्वच्छता को लेकर जागरूक नहीं थे. हर ओर गंदगी का अंबार था. चापाकल के आस-पास कीचड़ फैली रहती थी. बारिश के मौसम में तो गांव की सड़कों पर चलना मुश्किल होता था, लेकिन ग्रामीणों में जागरूकता आने के बाद स्थिति काफी सुधरी है. अब ग्रामीण साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं. पंचायत क्षेत्र में मनरेगा के तहत 149 नाडेब बनाये गये हैं, जहां लोग अपने घर का कचरा डालते हैं, जिसके कारण अब सड़कों पर गंदगी फैली नहीं दिखती. आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के साथ-साथ जामटोली कृषि प्रधान पंचायत है. अधिकांश आबादी खेती पर निर्भर है. खुले में शौच जाने के कारण पहले गांवों के किसानों को गंदगी के कारण अपने खेतों में काम करने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब किसान साफ और स्वच्छ खेतों में आराम से काम करते हैं.

नवंबर तक पंचायत में पाइप से होगी जलापूर्ति
पीने के पानी की भी गांव में उचित व्यवस्था की गयी है. पंचायत में 27 डीप बोरिंग और 20 जलमीनार के जरिये पाइपलाइन से जलापूर्ति का काम चल रहा है. नवंबर महीने से सभी घरों में पाइपलाइन के जरिये शुद्ध पेयजल पहुंचने लगेगा. लोग साफ-सफाई को लेकर इतने जागरूक हैं कि फिलहाल सभी चापाकल का पानी पीते हैं. बारिश के मौसम में ग्रामीण पानी उबाल कर पीते हैं. पहले चापाकल के आस-पास कीचड़ भरा होता था, लेकिन अब चापाकल के आस-पास भी पूरी साफ-सफाई रखी जाती है.
पंचायत सचिवालय भवन में लगा है आरओ
हरिहरपुर जामटोली पंचायत के पंचायत सचिवालय में ग्रामीणों को शुद्ध पानी पीने के लिए मिलता है. परिसर में आरओ वाटर फिल्टर लगा हुआ है. उसके साथ घड़ा भी है. फिल्टर से होकर पानी घड़े में जमा होता रहता है. ग्रामीणों के लिए हमेशा ठंडा पानी उपलब्ध रहता है.

महिला समूहों की भूमिका सराहनीय
हरिहरपुर जामटोली पंचायत के बोदा गांव के ग्रामीण बंसी ओहदार बताते हैं कि गांव को साफ रखने में महिला समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण है. समूह की बैठक के बहाने सभी महिलाएं एक-दूसरे को स्वच्छता के प्रति जागरूक करती हैं. अपने घरवालों को भी साफ-सफाई बरतने की सलाह देती हैं. महिलाओं की इस पहल से हर घर तक स्वच्छता का संदेश आसानी से पहुंच रहा है और महिलाएं खुद भी स्वच्छता को एक अच्छी सीख की तरह ले रही हैं.

स्वच्छता से ही समृद्धि है : सुनील कच्छप, मुखिया
हरिहरपुर जामटोली पंचायत के मुखिया सुनील कच्छप कहते हैं कि अगर ग्रामीण कम बीमार पड़ेंगे, तो उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और बेहतर परिणाम होंगे. इसलिए समय-समय पर दीवार लेखन, प्रभात फेरी और ग्रामसभा के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया जाता है. पूरे पंचायत में 553 प्रधानमंत्री आवास आवंटित किये गये हैं. स्वच्छता को लेकर ग्रामीण काफी जागरूक हुए हैं. कहते हैं कि बदलाव आ रहा है, लेकिन लोगों की सदियों पुरानी मानसिकता को बदलने में थोड़ा समय लगेगा. चार से पांच साल में पूर्ण बदलाव दिखेगा.

70 फीसदी बदलाव आया है : बंसी ओहदार
ग्रामीण विकास विभाग के रिटायर्ड फील्ड ऑफिसर बंसी ओहदार बताते हैं कि स्वच्छता को लेकर पहले की अपेक्षा ग्रामीणों की सोच में काफी बदलाव आया है. अब तीन-चार साल के बच्चे भी खुले में शौच से परहेज करते हैं. लोग खुद के घर और आस-पास की सफाई हमेशा करते हैं. अब जो भी व्यक्ति नया घर बनाता है, वो सबसे पहले शौचालय निर्माण कराता है, जबकि लोग पहले सिर्फ घर बनाते थे. जो लोग पहले घर में बन रहे शौचालय निर्माण का विरोध कर रहे थे, अब वो शौक से इस्तेमाल करते हैं. साथ ही शौचालय निर्माण की योजना की सराहना भी करते हैं.

ग्रामीण खुद की सफाई पर भी दे रहे हैं ध्यान : जुबा उरांव, उप मुखिया
हरिहरपुर जामटोली पंचायत के उप मुखिया जुबा उरांव बताते हैं कि ग्रामीण पुरुष और महिलाएं दोनों साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं. शौचालय का इस्तेमाल करते हैं. इतने सालों में यह बड़ा बदलाव है. जुबा बताते हैं कि पहले ग्रामीण कई महीनों तक नहीं नहाते थे. गंदे कपड़े पहनते थे. वो खुद भी ऐसा करते थे, लेकिन धीरे- धीरे ग्रामीणों में जागरूकता आयी और अब उनकी आदत बदल गयी है. लोग सफाई की आदतों को अपना रहे हैं और खुशहाल हैं.

महिलाएं भी काफी जागरूक हुई हैं : सिरोफिल मिंज, ग्रामीण
खक्सीटोली की रितु महिला समूह की सदस्य सिरोफिल मिंज बताती हैं कि समूह की बैठकों में स्वच्छता को लेकर हमेशा चर्चा होती है. बैठक के बाद महिलाएं समूह बनाकर दूसरे घरों में जाती हैं और महिलाएं व बच्चों को साफ-सफाई रखने के लिए जागरूक करती हैं. इसका फायदा भी काफी हो रहा है. पहले की अपेक्षा महिलाएं अब कम बीमार पड़ती हैं. सिरोफिल बताती हैं कि स्वच्छता की जिम्मेदारी औरतों की ज्यादा होती है. इसलिए हम अपने घर और आस-पास सफाई रखते हैं. घर के सदस्यों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हैं.