badi khabar

  • Jan 3 2020 12:32PM

संस्कार सीखते युवा

संस्कार सीखते युवा

जिस शिक्षा से हम अपना जीवन निर्माण कर सकें, मनुष्य बन सकें, चरित्र गठन कर सकें और विचारों का सामंजस्य कर सकें. वही वास्तव में शिक्षा कहलाने योग्य है. हमें ऐसी शिक्षा चाहिए, जिसमें चरित्र का निर्माण हो, मन की शक्ति बढ़े, बुद्धि का विकास हो और मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा हो सके. स्वामी विवेकानंद की ये पंक्तियां विश्व के सबसे अधिक युवाओं की आबादी वाले देश भारत के लिए पथप्रदर्शक हैं. वक्त के साथ स्कूलों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन गुरुकुल की तरह इनमें नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण पर जोर नहीं है. आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, आत्मज्ञान, आत्मसंयम और आत्मत्याग ये चरित्र निर्माण के पांच सूत्र हैं. आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम, ईमानदारी और उच्च मानवीय मूल्यों के बिना किसी का जीवन महान नहीं बन सकता. युवा किसी भी देश की पूंजी हैं. आधार स्तंभ हैं. ऐसे में युवाओं को चरित्रवान बनाकर ही मार्गदर्शक राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है. पंचायतनामा का ये अंक युवा चरित्र पर केंद्रित है. इसमें चरित्रवान युवाओं को तैयार करते संस्थानों की भूमिका का जिक्र किया गया है, ताकि युवा पीढ़ी इससे प्रेरित हो और अपने चरित्र निर्माण पर जोर दे सके.