badi khabar

  • Sep 16 2019 12:02PM

गांधी, स्वच्छता और झारखंड

गांधी, स्वच्छता और झारखंड

स्वच्छता यानी साफ-सफाई. सिर्फ घर या आस-पास की गंदगी दूर करना ही स्वच्छता नहीं है, बल्कि तन-मन की शुद्धता भी अहम है. स्वच्छता का जिक्र करते ही जेहन में सबसे पहले महात्मा गांधी का चेहरा तैरने लगता है. झारखंड में उनके सच्चे अनुयायी टानाभगतों की स्वच्छता और सादगी भी बरबस लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है. केंद्र की मोदी सरकार के स्वच्छ भारत मिशन व स्वच्छता ही सेवा जैसे अभियानों की वजह से स्वच्छता को लेकर आम लोगों में जागरूकता बढ़ी है. अब लोग साफ-सफाई को लेकर सजग हुए हैं. कई इलाकों में ग्रामीणों के श्रमदान का कमाल दिख रहा है. पंचायतनामा के इस अंक में बापू की 150वीं जयंती पर विशेष प्रस्तुति की दूसरी कड़ी में महात्मा गांधी और स्वच्छता को प्रमुखता दी गयी है. स्वच्छ गांवों की जमीनी हकीकत से भी आपको रू--रू कराने का प्रयास किया गया है

गांधी ने झारखंड में कहा था...
बच्चाें की पढ़ाई सफाई से ही आरंभ करनी चाहिए. हाथ धाेने आैर साफ रहने का महत्व शिक्षक बच्चाें काे बतायें. नीम या बबूल के दातुन से दांत साफ करें. आंख आैर कान की भी सफाई करें. नाखून काे समय-समय पर काटते रहे.
(
हरिजन छात्र सम्मेलन, रांची, 1934).