badi khabar

  • Oct 3 2019 12:09PM

गांधी और कुटीर उद्योग

गांधी और कुटीर उद्योग

ग्राम स्वराज के प्रबल पक्षधर महात्मा गांधी की देशभर में 150वीं वर्षगांठ मनायी जा रही है. गांधीजी चाहते थे कि सत्ता का विकेंद्रीकरण हो. उद्योगों का विकास हो, ताकि ग्रामीणों को रोजगार की तलाश में शहर न जाना पड़े. गांव के छोटे से छोटे कारीगरों के हुनर को विशेष पहचान दिलाने में केंद्र व राज्य सरकार जुटी हुई है. झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बाेर्ड तथा मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के माध्यम से राज्य के कारीगरों को न सिर्फ आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग प्रदान कर रहा है, बल्कि उनके बनाये उत्पाद को बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है. पंचायतनामा के इस अंक में बापू की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष प्रस्तुति की तीसरी व अंतिम कड़ी में कुटीर उद्योग को प्रमुखता दी गयी है. इसमें राज्य के कुटीर उद्योगों की स्थिति, कारीगरों की पहचान व उनकी समस्याओं से रू--रू कराने का प्रयास किया गया है.