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  • Nov 5 2019 7:28PM

हुनर से लिख रहीं तरक्की की नयी कहानी

हुनर से लिख रहीं तरक्की की नयी कहानी

 

विजय बहादुर 
vijay@prabhatkhabar.in
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twitter.com/vb_ranbpositive

आपके पास हुनर है, तो हर जगह आपकी कद्र होगी. छोटे से गांव में रहकर भी आप बड़े सपने पूरे कर सकते हैं. विपरीत हालात में भी आप अपने हुनर की बदौलत सफलता की मोटी लकीर खींच सकते हैं. ये ऐसी ताकत है, जिससे न सिर्फ आपकी जिंदगी संवर जाती है, बल्कि परिवार को भी आप आर्थिक रूप से समृद्ध कर खुशहाली का तोहफा देते हैं. झारखंड की सुलोचना, रिंकी, अंजना और किरण ने गरीबी और बेबसी के आगे घुटने नहीं टेके, बल्कि हुनर के दम पर आज अपनी शर्तों पर जिंदगी जी रही हैं.

स्टोरी : 1
जी रहीं आत्मनिर्भरता की नयी जिंदगी
रामगढ़ जिले के घाटो की सुलोचना कुमारी ब्यूटी एंड वेलनेस क्षेत्र में कौशल विकास का प्रशिक्षण लेकर महीने के 10 हजार रुपये कमा रही हैं और खुशहाल जिंदगी जी रही हैं, लेकिन इस मुस्कुराहट के पीछे संघर्ष की लंबी दास्तां है. ड्राइवर पिता की बिटिया सुलोचना का दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद 16 वर्ष की उम्र में विवाह हो गया. मायके में गरीबी की मार झेल चुकी सुलोचना के लिए ससुराल में भी सब कुछ सामान्य नहीं था. समय के साथ सुलोचना दो बच्चों की मां बन गयीं. पति के बाहर कमाने चले जाने के बाद सुलोचना को ससुराल से बाहर निकाल दिया गया. मजबूरन सुलोचना वापस अपने मायके चली आयीं, लेकिन विपरीत हालात में भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया. जिद से आगे बढ़ने का निर्णय लिया.
झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी के तहत ब्यूटी एंड वेलनेस में तीन महीने का प्रशिक्षण लिया. यह उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. प्रशिक्षण पूरा होते ही वर्ल्ड फेम ओ टू स्पा के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट आउटलेट पर असिस्टेंट ब्यूटी थेरेपिस्ट के तौर पर उनका चयन हो गया. आज सुलोचना अपने पैरों पर खड़ी हैं और एक आदर्श मां की तरह अपनी दोनों बेटियों का पालन पोषण कर रही हैं.

 

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स्टोरी : 2
संघर्ष में तपकर निखरीं रिंकी
चाईबासा के सोनुआ प्रखंड की रिंकी प्रधान ने घर की माली हालत को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. संघर्ष में तपकर निखरीं रिंकी आज हुनर से आत्मनिर्भर हैं. किसी से मांगती नहीं हैं, देती हैं. तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी रिंकी इंटर की पढ़ाई करने के लिए प्रतिदिन 30 किलोमीटर का सफर तय करती थीं. आखिरकार कौशल विकास के प्रशिक्षण से रिंकी के सपनों को नयी उड़ान मिली
इनके परिवार के पास थोड़ी सी जमीन है, जिसमें सिर्फ धान की खेती होती है. इससे किसी तरह पालन-पोषण होता था, लेकिन रांची के दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र, टाटीसिल्वे में मेडिकल परिक्षेत्र में प्रशिक्षण लेकर रिंकी ने जीवन का नया अध्याय शुरू किया. हिंदी बैकग्राउंड के कारण थोड़ी परेशानी हुई, इसके बावजूद रिंकी ने छह महीने में कोर्स पूरा कर लिया और रांची के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में जेनरल ड्यूटी असिस्टेंट की नौकरी कर रही हैं. इससे अपने छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई समेत अन्य जरूरतें पूरी कर रही हैं. अपने पिता को खेती के लिए पैसे भी भेजती हैं. इससे न सिर्फ वह खुश हैं, बल्कि उनका परिवार भी खुशहाल है.

 

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स्टोरी : 3
हुनरमंद अंजना की ऊंची उड़ान
चाईबासा जिले के सोनुआ की अंजना प्रधान ने कौशल विकास के जरिए लंबी छलांग लगायी है. अपनी लगन और मेहनत से रांची के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में जेनरल ड्यूटी असिस्टेंट के रूप में काम कर रही हैं. प्रतिमाह 9 हजार रुपये कमा रही हैं. एक छोटे से गांव से यहां तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष भरा रहा है. अंजना के पिता वाहनों से सामान उतारने का काम किया करते थे. परिवार बहुत मुश्किल से चलता था. पढ़ाई तो दूर की बात थी, पर अंजना ने किसी तरह दसवीं की परीक्षा पास की. फिर इंटर की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद अंजना को झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी की जानकारी मिली. रांची के टाटीसिल्वे स्थित दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र में मेडिकल परिक्षेत्र के कौशल प्रशिक्षण से नया जीवन मिल गया. हिंदी बैकग्राउंड से होने के कारण शुरुआत में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन छह महीने में उन्होंने अपना कोर्स पूरा कर लिया. अंजना ने साबित कर दिया है कि छोटे गांव से निकल कर भी बड़े सपने पूरे किये जा सकते हैं.

स्टोरी : 4
खूबसूरती के हुनर से बदली जिंदगी
रामगढ़ जिले के घाटोटांड़ की किरण कुमारी ब्यूटी एंड वेलनेस क्षेत्र में कौशल विकास का प्रशिक्षण लेकर प्रतिमाह 10 हजार रुपये कमा रही हैं. अपनी कमाई से बचत करते हुए घर के खर्च में अपने पिता का हाथ भी बंटाती हैं. अपने हुनर और हौसले की बदौलत किरण सुदूर गांव से निकल कर सौंदर्य के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं. रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट स्थित वर्ल्ड फेम ओ 2 स्पा में किरण ब्यूटी थेरेपिस्ट के तौर पर कार्य कर रही हैं. सिक्यूरिटी गार्ड पिता की कमाई से घर चलाना मुश्किल था, पर इस बीच किरण को झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी की जानकारी मिली. प्रशिक्षण पाने के लिए किरण को रांची आना पड़ा. चार महीने में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनका चयन वर्ल्ड फेम ओ 2 स्पा के लिए हो गया. हुनर से आज इनकी जिंदगी बदल गयी है