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  • Sep 16 2019 12:09PM

उम्र नहीं है जीत की कसौटी

उम्र नहीं है जीत की कसौटी

विजय बहादुर
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हाल में संपन्न हुए अमेरिकन ओपन टेनिस टूर्नामेंट में स्पेन के राफेल नडाल ने 33 वर्ष की उम्र में चैंपियनशिप जीत लिया. इनके साथ अभी खेल रहे टेनिस के बिग 4 में शामिल ऑल टाइम टेनिस ग्रेट माने जानेवाले स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर 37 साल, सर्बिया के नोवाक जोकोविच 32 साल और ब्रिटेन के एंडी मरे 32 साल के हैं. मतलब बिग 4 में शामिल सभी खिलाड़ी 32 वर्ष के ऊपर के हैं, जो टेनिस जैसे फिटनेस और तेज रफ्तार गेम के लिए ज्यादा उम्र मानी जाती है.

किसी फ्रेंच ओपन टूर्नामेंट के तीसरे राउंड में रोजर फेडरर का मुकाबला नार्वे के कैस्पर रूड से था. कैस्पर रूड के पिता के खिलाफ उन्होंने 1999 में डेब्यू किया था. उस वक्त 17 वर्षीय फेडरर और कैस्पर के पिता क्रिश्चियन रूड के बीच फ्रेंच ओपन का मुकाबला हुआ था. 37 की उम्र में भी फेडरर क्रिश्चियन रूड के बेटे कैस्पर के खिलाफ कोर्ट पर नजर आये और तीन सेट से जीत दर्ज करने में कामयाब हुए.

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जेन कुम ने 35 वर्ष में व्हाट्स एप, जिमी वेल्स ने 35 वर्ष में विकिपीडिया, रे क्रो ने 56 वर्ष में मैक्डोनाल्ड्स, कर्नल सैंडर्स ने 65 वर्ष में केंटुकी फ्राइड चिकेन रेस्टोरेंट चेन (केएफसी) एवं चार्ल्स डार्विन ने 50 वर्ष की उम्र में अपनी सबसे प्रसिद्ध किताब ओरिजिन ऑफ स्पेसीज (जीवजाति का उद्भव) लिखी. 48 की उम्र में महात्मा गांधी ने आजादी की लड़ाई शुरू की. जापान के 105 वर्षीय धावक हिडकीची मियाजाकि ने 42.22 सेकंड्स में 100 मीटर डैश कंप्लीट कर विश्व रिकॉर्ड बनाया. ग्रामीण बैंक के फाउंडर और नोबल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने 43 साल की उम्र में ग्रामीण बैंक शुरू किया. लता मंगेशकर और आशा भोंसले का लंबे समय तक गायिकी करना और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, शाहरूख खान, आमिर खान, सलमान खान जैसे 50 वर्ष से अधिक उम्र के बॉलीवुड कलाकारों का जलवा प्रमाण है कि बढ़ती उम्र सफलता का पैमाना नहीं है.

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने 27 की उम्र में लगातार असफलता के बाद फिल्मी करियर त्यागने का मन बना लिया था, लेकिन 29 वर्ष की उम्र में राजेश खन्ना के साथ आयी फिल्म आनंद से लोग उन्हें जानने लगे. 31 वर्ष की उम्र में फिल्म जंजीर से वो रातों-रात स्टार बन गये. इसके बाद उनका फिल्मी सफर मील का पत्थर बन गया.

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27 मई, 2018 को हुए आइपीएल के फाइनल में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) की एकतरफा जीत पर अधिकतर अखबारों ने भी लिखा था कि महेंद्र सिंह धौनी की डेड आर्मी ने फाइनल जीत लिया. टीमों की नीलामी भी हुई, तो अधिकतर एक्सपर्ट्स ने व्यंग्य किया था कि सीएसके ने बुड्ढों की टीम बना ली है. 36 वर्षीय कप्तान धौनी और 34 वर्ष की औसत उम्र वाले खिलाड़ियों से 20-20 फॉर्मेट में सफलता की उम्मीद बेमानी है, लेकिन सबसे बेहतर प्रदर्शन सीनियर खिलाड़ियों का ही रहा. धौनी का शानदार प्रदर्शन था. जिस शेन वाटसन को ऑक्शन में जगह मुश्किल से मिली थी, दो शतक लगाकर वो मैन ऑफ द मैच रहे थे. कहने का आशय ये कि कोई काम सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ दें कि उम्र हो गयी है. कुछ करने का जज्बा है, तो जब जगिये, तभी सवेरा.

सफलता उम्र की मोहताज नहीं है. उम्र महज एक आंकड़ा है. जीत की कसौटी नहीं है. जीत का जज्बा हमेशा उम्र पर भारी पड़ा है. इतिहास गवाह है कि उम्रदराज लोगों ने भी कामयाबी की नयी इबारत लिख दी है. ऐसे कई उदाहरण भरे-पड़े हैं, जो साबित करते हैं कि सफलता के लिए सिर्फ युवापन काफी नहीं है. जिद, जुनून और जीत की भूख हो, तो किसी भी उम्र में सफलता तय है.