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  • Oct 17 2018 12:59PM

साैर ऊर्जा : बेहतर विकल्प

साैर ऊर्जा : बेहतर विकल्प

अनुज कुमार सिन्हा

बिजली की हर समस्या का एक आसान हल- साैर ऊर्जा का अधिक से अधिक इस्तेमाल. दरअसल यह सूर्य द्वारा दिया गया एक वरदान है. हर दिन सूर्य असीमित ऊर्जा देता है. इतनी ऊर्जा की पूरी दुनिया दिन-रात खर्च करते रहें, कम नहीं पड़ेगी. सवाल है कि इस ऊर्जा काे कितना जमा कर सकते हैं, कितना उपयाेग कर सकते हैं. दुनिया में ऊर्जा का बड़ा स्त्राेत काेयला है, जाे सीमित है. साथ ही प्रदूषण का बड़ा कारण भी है. दूसरी ऊर्जा है परमाणु ऊर्जा, खतरनाक है. कुछ अन्य स्त्राेत भी हैं, लेकिन सबसे सुरक्षित स्त्राेत है सूर्य. एक दिन में सूर्य जितनी ऊर्जा धरती काे भेजता है, अगर उसे रखने (जमा करने) की व्यवस्था हाे, ताे पूरी दुनिया काे एक साल तक कहीं आैर से ऊर्जा की व्यवस्था नहीं करनी हाेगी. यह ताकत है साैर ऊर्जा में. इस ताकत काे अब दुनिया समझ गयी है आैर यही कारण है कि साैर ऊर्जा का प्रचलन तेजी से बढ़ा है. चीन, जापान, जर्मनी, अमेरिका, इटली आैर इंग्लैंड के बाद भारत साैर ऊर्जा का अधिकतम उपयाेग करनेवाला देश बन गया है.

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भारत में सरकार द्वारा साैर ऊर्जा के संयंत्राें पर बड़े पैमाने पर सब्सिडी दी जा रही है, ताकि लाेगाें काे आकर्षण बढ़े. तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश आैर राजस्थान वे राज्य हैं, जिन्हें साैर ऊर्जा के उत्पादन में बहुत आगे कहा जा सकता है. झारखंड भी वह राज्य है जहां बड़े पैमाने पर इसे लाेकप्रिय बनाने का अभियान चल रहा है. राज्य में सैकड़ाें गांवाें में साैर ऊर्जा अपना कमाल दिखा रही है. शहराें में इसे आैर लाेकप्रिय बनाने का वक्त आ गया है. लाेगाें के मन में पहले यह बात थी कि साैर ऊर्जा से एक या दाे बल्ब जलेगा, इससे ज्यादा कुछ नहीं हाेगा. आज यह धारणा बदल गयी है. यह किसी भी घर की कुल ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति कर सकता है. घराें में टीवी चल सकते हैं, पंखे, एसी चल सकते हैं. बल्ब ताे जलेंगे ही. इतना ही नहीं, साेलर पंप भी बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं, जिनसे किसान खेत पटा सकते हैं. किसान इसका उपयाेग भी कर रहे हैं आैर सरकार इसे उपलब्ध करा रही है.

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एक लाख 60 हजार की कीमत वाले पंप काे सरकार इतनी सब्सिडी दे रही, जिससे किसानाें काे सिर्फ 24 हजार देने पड़ रहे हैं. इसका सीधा लाभ किसानाें काे मिल रहा है. जिन इलाकाें में बिजली नहीं पहुंची है या किसी कारण कम बिजली मिलती है, वहां किसी का काम हर्ज नहीं हाेगा. सवाल है इसके उपयाेग का. यह सही है कि झारखंड के अधिकांश इलाके बिजली के संकट से जूझ रहे हैं. सड़काें पर अंधेरा छा जाता है. अपार्टमेंट की छताें पर अगर साैर ऊर्जा प्लांट लगा दिये जायें (अभी कुछ घराें में है भी), ताे बिजली की समस्या ही नहीं रहेगी. यह खर्चीला भी नहीं पड़ता. सरकारी दफ्तराें की छताें पर इसका प्रयाेग शुरू हाे चुका है. इसकी महत्ता काे समझना हाेगा. सस्ता भी, प्रदूषण रहित भी. फिर इस बात का डर नहीं कि आंधी-तूफान में तार टूट गया या ट्रांसफारमर जल गया. अब लाेगाें पर निर्भर करता है कि वे कितनी तेजी से इसे अपना पाते हैं.