aapne baat

  • Oct 5 2017 2:06PM

अपनी बात

एक ओर परब- त्योहार का मौसम है, तो दूसरी ओर रबी फसल की तैयारी समय पर करने की चुनौती भी है. दरअसल यह पूरा मौसम खेतों में सोना उगाने का वक्त है. जैसी तैयारी होगी, फसल वैसी ही होगी. इस साल बारिश अच्छी हुई है, तो झारखंड के खेतों में धान की फसल लहलहा रही है. उम्मीद यह की जा रही है कि इस बार झारखंड में धान की बंपर फसल होगी. अब तक के सारे रिकार्ड टूट जायेंगे. रबी फसल को लेकर भी यही उम्मीद किसानों में जगी हुई है. राज्य का कृषि विभाग भी रबी फसल की तैयारी में जुटा हुआ है.

कृषि विभाग रबी के लिए किसानों को क्या-क्या उपलब्ध कराता है. किसानों को कृषि विभाग की ओर से मिलेगी वाली मुफ्त सुविधाएं कैसे मिल सकती हैं. आखिर कौन है, जो सुविधाएं किसानों तक नहीं पहुंचने देता है. कौन वे लोग हैं, जो गरीब किसानों का हक मार ले जाते हैं. इन सभी तथ्यों को आप पाठकों के बीच सामने लाने की कोशिश इस बार के पंचायतनामा में की गयी है.

पंचायतनामा के इस अंक में ठंड के मौसम में पशुओं की देखभाल किस तरह से होनी चाहिए. दुधारू पशुओं का दूध कैसे बढ़ सकता है. इस संबंध में नये शोध के अनुसार पशुपालकों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए. मछली पालन, बकरी पालन, सूकर पालन, मुर्गी पालन, बतख पालन करनेवाले किसानों को कहां से और कैसे मदद हासिल हो सकती है. इसकी विस्तृत जानकारी देने का प्रयास इस अंक में किया गया है. पंचायतनामा की टीम ने यह अंक तैयार करते समय अलग-अलग किसानों से, कृषि अधिकारियों से बातचीत के दौरान यह पाया कि खेती की योजनाओं को लेकर बहुत ही लुभावने बातें होती रहती है, लेकिन किसानों को इसका कोई लाभ नहीं पहुंच पाता है. बहुत सारी ऐसी योजनाएं हैं, जिनकी जानकारी अधिकारी या विभाग किसानों को पहुंचाने में कोई रूचि ही नहीं रखता है. यहीं से परेशानियां शुरू होती हैं. किसान को योजना की जानकारी नहीं है और विभाग में योजनाएं पड़ी हुई है. किसान और विभाग के बीच में यह जो गैप है, वह बहुत ही खतरनाक है. इस गैप के कारण ही झारखंड में खेती-किसानी का जबरदस्त नुकसान हो रहा है. यह सभी जानते हैं कि सब्जियों के मामले में, मोटा अनाज मडुवा, तीसी के मामले में झारखंड के किसान बहुत कुछ कर सकते हैं. पशुपालन खासकर मछली पालन, सूकर पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन में झारखंड के किसान रिकार्ड बनाने की क्षमता रखते हैं. यहां का मौसम पशुपालकों के लिए अच्छा है. इसके बावजूद योजनाओं के संबंध में जानकारी नहीं होने का नुकसान यहां के किसान उठा रहे हैं. आप झारखंड के किसानों का सर्वे करके देख लीजिए. किसानों की आय बढ़ाने के सरकारी दावे के विपरीत सच्चाई यह है कि उनकी आय कम हो रही है. उनका जीना दूभर हो रहा है. ऐसे में किसानों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचना, उन्हें जागरूक करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम है. पंचायतनामा इसी मकसद को सामने रखकर आपके लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत कर रहा है.

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नमस्कार,
संजय मिश्र
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